सफेद शर्ट के पीछे लाल एजेंडा?

हैदराबाद में गुरुवार को एक हैरान करने वाली घटना घटी। जंगलों में छिपकर गोलियां बरसाने वाले माओवादी नेता अब सफेद शर्ट और स्नीकर्स पहनकर राजनेताओं से मिल रहे हैं। हाल ही में आत्मसमर्पण करने वाले माओवादी नेता देवजी उर्फ टिपिरी तिरुपति ने अपने साथियों के साथ हैदराबाद स्थित MB भवन में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) [CPM] के नेताओं से मुलाकात की। यह मुलाकात देखने में एक सामान्य शिष्टाचार भेंट लगती है, लेकिन इसके पीछे एक गहरी और खतरनाक साजिश काम कर रही है।

आत्मसमर्पण के समय देवजी बदले हुए रूप में सामने आया था। उसने दाढ़ी कटवा ली थी, घनी मूंछ रखी थी और सफेद शर्ट, फॉर्मल पैंट व स्नीकर्स पहने हुए था। उसने पत्रकारों से कहा था कि वह स्वास्थ्य कारणों से अंडरग्राउंड जीवन छोड़ रहा है। साथ ही, उसने संकेत दिए थे कि अब वह जनता के अधिकारों के लिए कानूनी दायरे में रहकर काम करेगा। माओवादी संगठन से जुड़े सवालों पर उसने टिप्पणी करने से इनकार कर दिया था और कहा था कि वह अपने राजनीतिक भविष्य को प्रभावित करने वाले विवादों से बचना चाहता है।

राजी रेड्डी ने भी आत्मसमर्पण के समय अपने विचारों को लेकर कोई नरमी नहीं दिखाई थी। 46 साल तक अंडरग्राउंड रहने वाले इस वरिष्ठ नक्सली नेता ने पत्रकारों से कहा था कि उसका उद्देश्य संसदीय व्यवस्था में शामिल होना नहीं है। उसने यह भी दावा किया था कि माओवाद कभी समाप्त नहीं होगा और दुनिया के विभिन्न हिस्सों में उसका प्रभाव बढ़ रहा है। इस तरह के बयान इस धारणा को मजबूत करते हैं कि आत्मसमर्पण के बावजूद उसने अपनी वैचारिक प्रतिबद्धताओं से सार्वजनिक रूप से दूरी नहीं बनाई थी।

18 जून को देवजी और राजी रेड्डी ने अपने साथियों चंद्रन्ना, पद्माक्का, संजीव और बंदी प्रकाश के साथ हैदराबाद में CPM के राज्य सचिव जॉन वेस्ली से मुलाकात की। बैठक के बाद जॉन वेस्ली ने केंद्र सरकार के ‘ऑपरेशन कगार’ की आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि सरकार माओवादियों के खिलाफ दमनकारी नीतियां अपना रही है। उन्होंने पूर्व माओवादियों पर लगाए गए सभी प्रतिबंध हटाने की भी मांग की। देवजी ने इस मुलाकात को शिष्टाचार भेंट बताया। उसका कहना था कि वह उन राजनीतिक नेताओं का आभार व्यक्त कर रहा है जिन्होंने ‘ऑपरेशन कगार’ को रोकने की मांग की थी। हालांकि, उसने फिलहाल किसी राजनीतिक दल में शामिल होने की संभावना से इनकार किया।

इन माओवादियों के मुख्यधारा में लौटने के नाटक का सच इनके अपने ही दस्तावेज ‘भारत की क्रांति की रणनीति और कार्यनीति’ में छिपा है। यह दस्तावेज इनके असली इरादों को पूरी तरह बेनकाब करता है। दस्तावेज साफ बताता है कि जब दुश्मन बहुत मजबूत हो, तो अपनी ताकत बचाने के लिए पीछे हटना ही सबसे सही रणनीति है।

दस्तावेज में गुरिल्ला युद्ध का मूल मंत्र स्पष्ट रूप से लिखा है। इसके अनुसार जब दुश्मन आगे बढ़ता है, तो हम पीछे हटते हैं। जब दुश्मन कैंप लगाता है, तो हम उसे परेशान करते हैं। जब दुश्मन थकता है, तो हम अचानक हमला करते हैं। जब दुश्मन पीछे हटता है, तो हम उसका पीछा करते हैं।

यही नियम ‘मोबाइल वारफेयर’ पर भी लागू होता है। इस सिद्धांत के तहत माओवादी केवल तभी लड़ते हैं जब वे आसानी से जीत सकते हैं। जब वे नहीं जीत सकते, तो वे दूर चले जाते हैं। माओ की रणनीति कहती है कि हम जीत की स्थिति में लड़ेंगे और हार की स्थिति में पीछे हटेंगे।

सुरक्षा बलों की लगातार कार्रवाई, शीर्ष नेताओं के मारे जाने, गिरफ्तार होने और आत्मसमर्पण की घटनाओं के बाद माओवादी संगठन का सशस्त्र ढांचा लगभग पूरी तरह बिखर चुका दिखाई देता है। कई क्षेत्रों में उसके हथियारबंद कैडर की मौजूदगी नगण्य रह गई है और संगठन अपनी पूरी सैन्य क्षमता खो चुका है। यही कारण है कि अब उसके सामने अस्तित्व बचाने की चुनौती खड़ी हो गई है। ऐसी परिस्थितियों में माओवादी सिद्धांत “रणनीतिक आत्मरक्षा” की बात करता है, जिसके तहत संगठन प्रतिकूल हालात में पीछे हटकर अपने बचे हुए नेटवर्क और संसाधनों को बचाने का प्रयास करता है। इसके बाद अवसर मिलने पर “सामरिक जवाबी हमला” और सीमित, तेज कार्रवाइयों की रणनीति अपनाने की बात कही जाती है।

देवजी और राजी रेड्डी का आत्मसमर्पण किसी हृदय परिवर्तन का संकेत नहीं दिखाता। उनके सार्वजनिक बयानों से भी ऐसा नहीं लगता कि उन्होंने अपनी मूल विचारधारा से दूरी बनाई है। हथियार छोड़ने के बाद उन्होंने लोकतांत्रिक और कानूनी दायरे में काम करने की बात जरूर कही है, लेकिन उनके राजनीतिक कदमों और संपर्कों ने नई बहस को जन्म दिया है। ऐसे समय में इन नेताओं को मिल रहा राजनीतिक समर्थन कई सवाल खड़े करता है।

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Shomen Chandra
Shomen Chandra
Shomen Chandra contributes articles to select media organisations. He is the founding editor of The Tilda Times and holds a postgraduate degree in journalism and mass communication.

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