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Tuesday, August 16, 2022

दक्षिण भारत में हिन्दुओं पर अत्याचार में अप्रत्याशित बढ़ोत्तरी, शैव और शंकराचार्य की धरती पर भी हिन्दू सुरक्षित क्यों नहीं?

दक्षिण भारत का सनातन के उद्भव में बड़ा ही महत्वपूर्ण योगदान रहा है। यह शैव संतों और जगद्गुरु शंकराचार्य की धरती है, जिसने हजारों वर्षों से हिंदुत्व को सींचा है। दक्षिण भारत आज भी हिन्दू संस्कृति, कलाकृति और स्थापत्य कला के वैभव के लिए जाना जाता है , लेकिन पिछले कुछ समय से ऐसा लगने लगा है जैसे इस क्षेत्र में भी हिन्दुओं को शिकार बनाया जा रहा है। दक्षिण भारत में पेरियावाद, मिशनरी, और इस्लामिक जिहादी संगठनों के एकजुट हो कर काम करने से हिन्दुओं को बहुत बड़ा धक्का लगा है।

पिछले कुछ वर्षों से हिन्दुओं के प्रति हिंसा की घटनाओं में बढ़ोत्तरी हुई है। यही नहीं, हिन्दुओं की संस्कृति, त्यौहारों और मान्यताओं पर भी समय समय पर आक्रमण किया जाता रहा है। जहां केरल में पीएफआई जैसे आतंकी संगठन और वामपंथी दल हिन्दुओं पर अत्याचार करते हैं, वहीं तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश में क्षेत्रीय दल और मिशनरी दलों का बोलबाला है, जो येन केन प्रकारेण हिन्दुओं को परेशान करने के अवसर की ताक में ही बैठे रहते हैं।

केरल में नहीं थम रही हिन्दुओं की नृशंस हत्या

ऐसी ही एक घटना पिछले दिनों केरल में हुई, जहां कन्नूर जिले के कुथुपरंबा क्षेत्र के पनौंदा में पिछले हफ्ते सीपीएम के आतंकियों ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के स्वयंसेवक जिमनेश की बर्बर हत्या कर दी थी। जिमनेश मात्र 32 वर्ष का था, और दुःख की बात है कि इस घटना को इतने दिन होने के पश्चात भी पुलिस ने अभी तक उसके हत्यारों के विरुद्ध कोई कार्रवाई नहीं की है।

आरएसएस के स्वयंसेवक पिनाराई में टी अक्षय के घर पर गुरु दक्षिणा कार्यक्रम में भाग लेने के लिए इकट्ठा हुए थे, जिसे सभी शाखाएं गुरु पूर्णिमा के त्योहार के अवसर पर आयोजित करती हैं। सीपीएम के आतंकियों ने स्वयंसेवकों पर हमला किया और त्योहार के लिए तैयार किए गए झंडे और अन्य सजावट को नष्ट कर दिया। अक्षय, ए आदर्श, पीवी जिष्णु और केपी आदर्श सभी घायल हो गए हैं और उनका थालासेरी के एक अस्पताल में इलाज चल रहा है।

हमले में जिमनेश गंभीर रूप से घायल हो गया था और अगले दिन 26 जुलाई को चिकित्सा करते हुए उसका निधन हो गया था। सूत्रों के अनुसार चिकित्सा के लिए अस्पताल ले जाने के बाद वह गिर गया। ऐसा माना जा रहा है कि आंतरिक रक्तस्राव के कारण उसकी मृत्यु हुई हगि, वहीं पुलिस का कहना कि यह मृत्यु ‘हार्ट अटैक’ से हुई है।

डॉक्टरों ने पुलिस को बताया कि जिमनेश के शरीर में ऐसे निशान थे जो सीपीआर (कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन, एक चिकित्सा प्रक्रिया जिससे शरीर पर हानिकारक प्रभाव भी पड़ सकते हैं) से मेल खाते हैं। वहीं पुलिस ने इस मामले को दबाने के लिए कहा कि पीड़ित के शरीर को कोई चोट नहीं आई थी और उसकी मृत्यु सामान्य थी। ऐसे में क्या आपको लगता है कि जिमनेश को न्याय मिले पायेगा?

तमिलनाडु में भगवान श्रीराम का मंदिर गिराया गया

तमिलनाडु के तामबरम में श्रीराम जी का मंदिर गिराये जाने से जुड़े एक वीडियो के सोशल मीडिया पर वायरल होने से सनसनी फैल गई है। इस वीडियो के बारे में यह कहा जा रहा था कि एक हिन्दू मंदिर को सरकार ने जबरन गिरा दिया। यह वीडियो मक्कल काची नामक व्यक्ति ने शेयर किया था, उसने आरोप लगाया था कि राज्य की द्रमुक सरकार तामबरम में राम मंदिर को गिरा रही है।

इस वीडियो में आप देख सकते हैं कि मंदिर को तोडा जा रहा है, वहीं श्रद्धालु बड़े ही द्रवित हो कर यह देख रहे हैं। कई महिलाएं तो फूट कर रो भी रही हैं। इस वीडियो को देख कर हिन्दुओं की भावनाएं भी आहत हुई और सोशल मीडिया पर लोगों ने अपना दुःख और क्षोभ प्रकट करना शुरू कर दिया और तमिलनाडु सरकार को कोसने लगे।

हालांकि तामबरम के कमिश्नर ने स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि 2015 में मद्रास हाईकोर्ट के निर्देश पर मंदिर के साथ-साथ एक अन्य ढांचे को गिराया गया है। पुलिस का कहना है कि जल विभाग की जमीन पर यहां अतिक्रमण था जिसे गिरा दिया गया है। पुलिस अधिकारियों ने कहा कि इस संबंध में अफवाह फैलने वाले लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

उन्होंने कहा था कि इस तरह की घटनाओं से तमिलनाडु सरकार के खिलाफ द्वेष और अविश्वास ही पैदा होगा। पिछले वर्ष स्मार्ट सिटी परियोजना से अतिक्रमण हटाने के नाम पर निगम अधिकारियों ने मुथानकुलम तालाब के किनारे 125 साल पुराने मंदिर को ही ध्वस्त कर दिया था। वहीं चेन्नई में बेसिन ब्रिज के पास 300 साल पुराना एक मंदिर और मदुरै में 200 साल पुराना वाझवंडन मंदिर भी द्रमुक सरकार ने ध्वस्त करवा दिया था।

अधिकांश हिंदू मंदिरों को या तो नदी या झीलों के किनारे पर बनाया गया था, ताकि भक्त मंदिरों में प्रवेश करने से पहले स्नान कर सकें या अपने पैरों और हाथों को धो सकें। ऐसी किसी व्यवस्था को अतिक्रमण नहीं माना जाना चाहिए। अगर किसी मंदिर को तोडना अत्यंत जरूरी भी हो, तो अधिकारी ध्वस्त करने से पहले मठों के प्रमुखों और अन्य धार्मिक व्यक्तियों से परामर्श कर सकते हैं, और आसपास वैकल्पिक भूमि प्रदान करने की व्यवस्था भी की जानी चाहिए।

हिन्दुओं में द्रमुक सरकार की एकतरफा कार्यवाही को लेकर बड़ा ही रोष है। हिन्दू धर्म के अनुयायियों के अनुसार प्रदेश में सैंकड़ो चर्च और मजहबी इमारतें हैं, जो अतिक्रमण करके बनायी गयी हैं। यहाँ तक की निगम को भी इस बारे में जानकारी है, लेकिन उन पर किसी भी तरह की कार्यवाही नहीं की जाती, जबकि हिंदू मंदिरों को जब चाहे अतिक्रमण के नाम पर तोड़ दिया जाता है।

यह बड़ी ही दुर्भाग्यपूर्ण स्थति है कि हिन्दुओं को इस तरह का व्यवहार उन्ही के देश में झेलना पड़ रहा है। कहने को हिन्दू बहुसंख्यक हैं, हजारों वर्षों से इस धरती पर रह रहे हैं, लेकिन राजनीतिक और हिन्दुओं विरोधी दलों की मिलीभगत के कारण हिन्दू हित की हमेशा ही अनदेखी की जाती रही है।

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