गुंडाधुर की धरती पर विकास का संकल्प: बस्तर बनेगा नए भारत का मॉडल

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार को बस्तर दौरे के दौरान कहा कि 50 साल तक नक्सल हिंसा ने जनजातियों का भविष्य छीना, लेकिन अब सरकार अगले 4 से 5 साल में विकास के जरिए उस नुकसान की भरपाई करेगी। शाह ने नेतानार में कहा कि सरकार बस्तर को नक्सलवाद से मुक्त कर विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार का बड़ा केंद्र बनाएगी।

नक्सलवाद खात्मे के बाद पहली बार बस्तर पहुंचे अमित शाह ने कहा कि जब तक बस्तर विकसित नहीं होगा, तब तक देश का विकास अधूरा रहेगा। उन्होंने वीर गुंडाधुर को याद करते हुए कहा कि इसी धरती ने अंग्रेजों के खिलाफ संघर्ष की मशाल जलाई थी और अब यही क्षेत्र विकास का नया मॉडल बनेगा।

शाह ने कहा कि कुछ साल पहले तक बस्तर में भय का माहौल रहता था। नक्सली जवानों की हत्या करते थे, स्कूलों को नुकसान पहुंचाते थे और गरीब परिवारों का राशन तक लूट लेते थे। उन्होंने कहा कि नक्सली मासूम बच्चों को जबरन बंदूक थमाकर उनका बचपन खत्म कर देते थे। अब सुरक्षा बलों ने कड़े अभियान चलाकर इस गनतंत्र को समाप्ति की ओर पहुंचा दिया है।

उन्होंने साफ कहा कि सरकार अब केवल सुरक्षा तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि जनजाति परिवारों तक हर जरूरी सुविधा पहुंचाएगी। बस्तर के गांवों में अब साफ पेयजल, राशन कार्ड, आधार कार्ड, स्वास्थ्य सुविधाएं और मुफ्त इलाज की योजनाएं तेजी से पहुंच रही हैं। शाह ने कहा कि आयुष्मान योजना के तहत गरीब परिवारों को 5 लाख रुपए तक के इलाज की सुविधा मिल रही है और अब जनजातीय बच्चों को भी शहरों जैसी आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।

Indian Prime Minister Narendra Modi presenting award to military personnel at HinduPost event.

नेतानार कार्यक्रम के बाद अमित शाह जगदलपुर के आसना स्थित बादल अकादमी पहुंचे। यहां उन्होंने BSF, CRPF, ITBP, NIA, SSB और NTRO के अधिकारियों का सम्मान किया। छत्तीसगढ़ एडीजी विवेकानंद सिन्हा और बस्तर आईजी सुंदरराज पी को भी सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में जवानों ने नक्सल विरोधी अभियानों के अनुभव साझा किए।

जवानों ने गृह मंत्री को हाल ही में बसवाराजू समेत 38 नक्सलियों के खिलाफ हुई कार्रवाई की जानकारी भी दी। इस दौरान नक्सल हिंसा से प्रभावित परिवारों ने अपने दर्द की कहानी सुनाई। जगरगुंडा की रहने वाली जानकी कश्यप ने बताया कि नक्सलियों ने उनकी आंखों के सामने उनके देवर समेत कई ग्रामीणों की हत्या कर दी थी। उन्होंने कहा कि पहले गांव तक पहुंचना मुश्किल था, लेकिन अब पुलिस कैंप और सड़कों के निर्माण से हालात तेजी से बदले हैं।

वीरगति को प्राप्त जवान की बहन पिंकी सेठिया ने कहा कि अब जंगलों में ड्यूटी कर रहे जवानों के परिवारों का डर कम हुआ है। लोगों को भरोसा है कि सरकार और सुरक्षा बल बस्तर में स्थायी शांति कायम करेंगे।

विजय शर्मा ने कहा कि बस्तर अब नक्सलवाद से बाहर निकल चुका है और सुरक्षा कैंपों को सुविधा केंद्र में बदला जाएगा। नेतानार से इसकी शुरुआत होगी। इन केंद्रों में लोगों को स्वास्थ्य, राशन, शिक्षा और सरकारी योजनाओं की सुविधाएं मिलेंगी। सरकार का फोकस अब जनजातीय युवाओं को रोजगार और शिक्षा से जोड़ने पर रहेगा।

दूसरी तरफ कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज ने दौरे और मध्य क्षेत्रीय परिषद की बैठक पर सवाल उठाते हुए इसे वर्चुअल तरीके से कराने की बात कही। उन्होंने नेताओं के दौरे पर होने वाले खर्च को मुद्दा बनाया। हालांकि बस्तर के लोगों का कहना है कि दशकों तक नक्सल हिंसा और पिछड़ेपन से जूझते रहे क्षेत्र को पहली बार केंद्र सरकार सीधे प्राथमिकता दे रही है। स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, बस्तर में बैठक आयोजित करने से विकास योजनाओं, सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा और सुरक्षा से जुड़े फैसलों को जमीन पर तेजी से लागू करने में मदद मिलेगी। कांग्रेस विकास और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर ठोस सुझाव देने के बजाय केवल विरोध की राजनीति करती नजर आई, जबकि सरकार बस्तर को हिंसा से बाहर निकालकर विकास की मुख्यधारा में लाने पर फोकस कर रही है।

आज जगदलपुर में मध्य क्षेत्रीय परिषद की 26वीं बैठक होगी। बैठक में छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री तथा वरिष्ठ अधिकारी शामिल होंगे। बैठक में सुरक्षा, अंतरराज्यीय समन्वय, नक्सल प्रभावित इलाकों के विकास और प्रशासनिक सहयोग जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी।

बैठक के बाद अमित शाह प्रेस कॉन्फ्रेंस करेंगे। माना जा रहा है कि वे बस्तर के लिए सुरक्षा और विकास से जुड़े कई बड़े फैसलों की घोषणा कर सकते हैं। बस्तर में लंबे समय तक हिंसा झेल चुके लोगों को अब उम्मीद है कि सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के जरिए उनका क्षेत्र नई दिशा पकड़ेगा।

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Shomen Chandra
Shomen Chandra
Shomen Chandra contributes articles to select media organisations. He is the founding editor of The Tilda Times and holds a postgraduate degree in journalism and mass communication.

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