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Saturday, October 23, 2021

लद्दाख- कुछ और नहीं समझीयेगा, फर्क है सिर्फ नज़रिए का

‘१७००० फीट ऊँचाई पर स्थित ये वो भूभाग है, जहां घांस का टुकड़ा भी नहीं उगता। लद्दाख अनुपयोगी, और रहने के लायक जगह नहीं है। हम खुद भी नहीं जानते कि वास्तव ये कहाँ स्थित  है।’ अक्साई चिन को चीन के हांथों गवांते हुए, जवाहरलाल नेहरु नें ये बात कही थी।

लेकिन अब स्थिति बदल चुकी है। कभी अपनी उर्जा की जरूरत को पूरा करने के लिए  डीज़ल  पर आश्रित ये क्षेत्र अब नेशनल ग्रिड से जुड़ चुका है। ये कार्य फ़रवरी २०१९ में तब पूर्ण हुआ जब श्रीनगर-अल्स्तेंग-द्रास-कारगिल-लेह के मध्य 220KV ट्रांसमिशन सिस्टम तैयार हो स्थापित हुआ।

अब ठण्ड के मौसम में भी बिजली  अबाधित रूप से मिलती है, जिससे  आर्थिक गतिवीधीयों में आया  उछाल आसानी से देखा  जा सकता है।  इसी प्रकार फरवरी २०१९ में ही 9 MW दाह हाइड्रो-इलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट का निर्माण पूर्ण हो  २२०KV(S/C) ट्रांसमिशन लाइन से घर-घर बिजली  पहुंचाने का कार्य का श्रीगणेश हो चुका।

अभी उच्च शिक्षा की चाहत रखने वाले विद्यार्थीयों को अपने घरों से दूर देश के  अन्य स्थानों पर जाकर रहना पड़ता है। पर अब उन्हें इस कष्ट से मुक्ति मिलने वाली है। लद्दाख की पहली सेंट्रल यूनिवर्सिटी, साथ ही बुद्धिस्ट अध्ययन केंद्र  शीघ्र बनकर तैयार होने जा रहा है। इस यूनिवर्सिटी से छात्र विज्ञान सहित अन्य विषयों में डिग्री प्राप्त कर सकेँगे।

दूर-दराज के गाँवों के लिए ठण्ड का मौसम तमाम विपत्तियाँ अपने साथ लेकर आता है। ठण्ड के छह महीनें इन गावों को राजधानी लेह से समस्त प्रकार से  संपर्क विहीन जीवन बिताना पड़ता है। लेकिन अब वो दिन दूर नहीं जब इनके  जीवन से ये कष्ट बहुत हद तक दूर हो जायेंगे। इलाके में बड़ी संख्या में मोबाइल टॉवर का निर्माण लगभग पूर्ण हो चुका है, जो कि इस परिवर्तन के वाहक  हैं।

लद्दाख की  भौगोलिक दुर्गमता के कारण  वहां के वासियों  में  आपस में मिलने का विचार  फल-फूल ही नहीं पाता था। वर्तमान  सरकार लोगों की  इस पीड़ा से अनभिग्य नहीं थी, और इसलिए इसको दूर करने की  दिशा में इस पर मंथन भी चल रहा था। इस मंथन से ही  हर मौसम में आवागमन चलता रहे उसके लिए एक सड़क के निर्माण के विचार ने आकार लिया। और काराकोरम पास और लेह को पूरे वर्ष जोड़कर रखने वाली २५५ किमी लम्बी गलवान वैली में सड़क बनकर तैयार हुई।

वर्ष २०१५ में सरकार नें २०२२ तक  देश में १७५ गीगावाट सौर-ऊर्जा  को प्राप्त करने का लक्ष्य रखा है। बताते चलें कि इस योजना में लद्दाख भी शामिल है। सरकार ने लेह-कारगिल जिलों में सौर उर्जा से बिजली उत्पादन की एक परियोजना  के संचालन के लिए ५०,००० करोड़ रूपए स्वीकृत किये हैं, जिस पर काम भी शुरू हो चुका है।

उद्धोग के साथ-साथ, पर्यटन को बढ़ावा देते हुए सियाचिन ग्लेसिएर को भी पर्यटकों  के लिए खोल दिया गया है जिससे प्राकृतिक सौन्दर्य का आनंद उठानें के साथ ही देशवासीयों को ये भी अनुभूति हो कि किन परस्थितियों  में एक  सैनिक उस दुर्गम स्थान  पर रह पाता है।  इसके साथ ही  एअरपोर्ट के बेहतर विकास; जैविक-खेती ; बीआरओ द्वारा निर्मित बाकि देश से जोड़ने वाली रोड इत्यादि ये वो काम है जिसनें  लद्दाख के निवासीयों को ये अहसास कराया है कि देश के  बाकि लोगों  की ही तरह वो भी संसाधनों से युक्त एक  प्रदेश के वासी हैं।


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Rajesh Pathak
Writing articles for the last 25 years. Hitvada, Free Press Journal, Organiser, Hans India, Central Chronicle, Uday India, Swadesh, Navbharat and now HinduPost are the news outlets where my articles have been published.

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