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Tuesday, November 30, 2021

गुरुग्राम में नमाज के स्थान पर बढ़ी रार, इस सप्ताह सार्वजनिक स्थान पर हिन्दू कार्यकर्ताओं ने बिछाए कंडे

हरियाणा में गुरुग्राम में नमाज का विरोध अब और तेज होता जा रहा है। हिन्दू कार्यकर्ताओं के साथ साथ आम नागरिक भी इस बात पर जोर दे रहे हैं, कि खुल में सार्वजनिक स्थानों पर नमाज नहीं होनी चाहिए।  गुरुग्राम में यह विवाद अब और भी तेज हो गया है। पिछले सप्ताह ही आठ ऐसे स्थानों पर नमाज की अनुमति रद्द कर दी गयी थी, जिन्हें प्रशासन द्वारा कथित रूप से नमाज के लिए आवंटित किया गया था।

एनडीटीवी की एक रिपोर्ट के अनुसार गुरुग्राम के अधिकारियों ने मुस्लिम समुदाय को यह बता दिया गया है कि यदि स्थानीय नागरिकों की ओर से कोई शिकायत आएगी तो उस स्थान पर नमाज पढने की अनुमति नहीं दी जाएगी। किसी भी सार्वजनिक स्थान पर नमाज पढने के लिए प्रशासनिक अनुमति आवश्यक है, परन्तु यदि स्थानीय लोग आपत्ति करेंगे, तो यह अनुमति रद्द हो सकती है!”

एनडीटीवी के अनुसार हरियाणा के गुरुग्राम में आज हिन्दू ग्रुप के कुछ कार्यकर्ताओं ने मैदान में नमाज नहीं होने दी और वह सेक्टर 12ए में मुस्लिमों को नमाज से रोकने के लिए बैठ गए। एनडीटीवी के अनुसार वहां पर बैठे हुए लोगों ने कहा कि “हम एकदम शांत बैठे हैं। मगर हम नमाज नहीं होने देंगे। हम यहाँ पर एक गेम की योजना बना रहे हैं।” और फिर दूसरे कार्यकर्ता ने कहा कि “हम एक नेट बनाएंगे। हम यहाँ पर एक वॉलीबॉल का मैदान बना देंगे, और बच्चे खेलेंगे, पर हम यहाँ पर नमाज नहीं होने देंगे, चाहे कुछ भी हो!”

और उसके पास ही मैदान में गोबर के कंडे पसरे हुए थे। लोगों ने वहां पर कंडे थाप रखे थे। और वहीं पर वह गोबर भी उपस्थित था, जो पिछले सप्ताह गोवर्धन पूजा के लिए प्रयोग किया गया था।

वहां पर भारी संख्या में पुलिस बल उपस्थित था। मगर वहां उपस्थित लोगों ने कहा कि हम विरोध नहीं कर रहे, हम समर्थन नहीं कर रहे, पर हम खुले में नमाज नहीं होने देंगे।  जब वहां पर मुस्लिम समुदाय के लोग नमाज के लिए इकठ्ठा हुए तो, वह नमाज नहीं कर सके और उन्होंने कहा कि “हमने सभी से कहा है कि जब तक हम अपने हिन्दू भाइयों के साथ किसी भी समझौते पर नहीं पहुँचते, हम यहाँ नमाज नहीं पढेंगे। डीसी साहब ने भी हमें एक सप्ताह का समय दिया है।”

यह मामला काफी लम्बे समय से चला आ रहा है और कहा जाता है कि इस स्थान पर नमाज पढ़ने को लेकर हिन्दू और मुस्लिम समुदाय के बीच एक समझौता हुआ था।

इस घटना को लेकर जहाँ कुछ हिन्दू इसके समर्थन में आए हैं और इस कदम को सही कह रहे हैं।

सोशल मीडिया पर लोग इसकी तुलना सत्याग्रह से कर रहे हैं। कुछ कह रहे हैं कि गुरुग्राम के हिन्दू एक उदाहरण सेट कर रहे हैं।

तो वहीं एक बड़ा वर्ग ऐसा है जो इसे लेकर हिन्दुओं को कोस रहा है, और उन्हें पिछड़ा कह रहा है:

और कुछ पत्रकार हैं जो इसे घृणा फैलाने वाला कह रहे हैं, गार्गी रावत ने कहा कि नमाज के लिए दिया गया मैदान गोबर के कंडों से भर दिया गया है, और सप्ताह में केवल एक घंटा भी नहीं दे सकते हैं, और यह दिखाता है कि नफरत कितनी गहरी है!

परन्तु इस बात पर सहज ही कोई बात करने के लिए तैयार नहीं है कि समस्या नमाज पढने से नहीं है, समस्या है खुले में नमाज पढने से। नागरिकों को समस्या है कि इस बहाने शक्ति प्रदर्शन होता है। पहले भी उन्होंने कहा था कि उनकी बेटियों को आने जाने में समस्या होती है और इतना ही नहीं एक मुस्लिम व्यापारी ने भी कहा था कि उनके व्यापार पर प्रभाव पड़ रहा है।

खुले में नमाज को लेकर एक ही स्थान पर विवाद नहीं है, अपितु यह समस्या पूरे देश में है। और इनके कारण होने वाली परेशानियों को लेकर वह बात कर रहे हैं।

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