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Sunday, May 29, 2022

यूनिवर्सिटी स्तर पर बाइबिल  पढ़ाने वाले थे चरणजीत सिंह चन्नी!

‘जब किसी को कहीं प्यार नहीं मिलेगा, तो वो क्या करेगा’  पंजाब के  पूर्व सीएम चरणजीत सिंह ‘ चन्नी’ का चुनावों के ठीक बीच  ये जवाब था, ये पूछने पर कि आपने ईसाई धर्म क्यूँ स्वीकार कर लिया l भाई-बहन  राहुल -प्रियंका की जोड़ी पूरे देश को दिखाने  ये दावा करते रहे कि देखो उनका सीएम उम्मीदवार ‘दलित’ है, और उसने  स्वयं उनके दावे की पोल खोलने में कोई संकोच नहीं रखा l ये दावा उस  रविदसीया  समाज  को ये सन्देश पहूँचाने के लिए काफी था कि जिसे ये बताया जा रहा है कि वो उनके समाज का है, वो उनकी जाति का तो छोड़ो, अब  वो सिख भी नहीं बचा l बल्कि दाड़ी-मूछ-पगड़ी लागाये आरक्षण का लाभ उठाने वाले उन तमाम ‘क्रिप्टो-क्रिस्चियनों’ में  से एक  है,  जिनकी पंजाब में की तो छोड़ो पूरे  देश में कोई कमी नहीं l

और फिर मुख्यमंत्री रहते  हुए उनके इस बयान ने  भी बहुत सुर्खियाँ बटोरी थीं  कि  “ईसा मसीह की जयंती के अवसर पर राज्यस्तरीय एक कार्यक्रम में यूनिवर्सिटी स्तर पर बाइबिल की पढ़ाई के लिए यूनिवर्सिटी लेवल पर चेयर स्थापित करने का फैसला लिया गया है। ईसाइयों के कब्रिस्तान की समस्या का भी निराकरण होगा। हर जिले में कम्युनिटी हॉल बनाए जाएँगे।”  रविदसिया और सिख समाज के लिए गैर हो जाने के बाद  उनसे स्वजातीय बंधुत्व भाव  से प्राप्त होने वाले  समर्थन की उम्मीद नहीं रखी जा सकती, और वही चुनाव परिणाम ने दिखा दिया. सबने मिलकर उन्हें दो-दो जगह से पराजित करके वापस भेजा l

एक वक्त  क्षेत्रवाद की  भावना भड़काते हुए उत्तर प्रदेश और बिहार वासीयों के लिए वो अपमान जनक टिपण्णी तक कर गए थे l स्वभाविक है कि ईसाईयत के रंग में वो इतना गहरे उतर गए थे कि उन्हें इतना तक याद नहीं रहा कि पंजाब के रविदासीया-समाज के पूज्य  संत रविदास स्वयं उत्तरप्रदेश के थे l और जहां चन्नी हिन्दू-धर्म छोड़कर भाग खड़े हुए थे, वहीं संत रविदास नें धर्मान्तरण के विरुद्ध तमाम विपरीत परस्थतीयों के बाद भी डटकर मुकाबला किया था l

इतिहास में ये प्रसंग  दर्ज है कि  एक बार जब  सिकंदर लोधी ने दवाब डालकर उन्हें मुसलमान बनाने की  कोशिशें करी तो उनका उत्तर था- ‘वेद वाक्य उत्तम धर्मा, निर्मल वाका ज्ञान; यह सच्चा मत छोड़कर, मैं क्यों पढूं कुरान l’  इसके बाद भी जब सिकंदर लोधी नें सदना नाम के एक पहुँचे हुए  पीर को रविदास जी के पास उनको इस्लाम का प्रभाव दिखलाकर मुसलमान बनानें के लिए भेजा, तो इसका परिणाम उल्टा ही हुआ l रविदास जी की आध्यात्मिकता से सदना इतना भाव विभोर हो उठा कि वो  हिन्दू बन रामदास नाम से उनका  शिष्य बन गया l

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Rajesh Pathak
Rajesh Pathak
Writing articles for the last 25 years. Hitvada, Free Press Journal, Organiser, Hans India, Central Chronicle, Uday India, Swadesh, Navbharat and now HinduPost are the news outlets where my articles have been published.

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