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Wednesday, December 1, 2021

“मुस्लिमों में हिन्दुओं की बेटी लेनी है, हिन्दुओं को बेटी देने पर मृत्यु दंड मिलेगा”- जहांगीर

अभी हाल ही में जहांगीर का जन्मदिन निकला था। जहांगीर के विषय में हिंदी फिल्मों में जो मीठा जहर पेश किया गया है, जिसमें झूठ के अलावा कुछ नहीं है। फिर भी अकबर के उस बेटे को लेकर एक अजीब सी रूमानियत साहित्य में भी प्रस्तुत की गयी है, जिसका जीवन ही अय्याशी से भरा हुआ है। जो खुद बताता है कि वह कितना शराब पीता था।  और जो खुद को न ही यहाँ की भाषा से जोड़ता था और न ही यहाँ के प्रणाम करने के तौर तरीकों से।

हमने पहले कई लेखों में बताया है कि कैसे एक अय्याश व्यक्ति को प्यार का मसीहा बनाकर प्रस्तुत किया गया। JAHANGIRNAMA Memoirs of Jahangir, Emperor of India Translated, edited, and annotated by Wheeler M. Thackston में कई बातें बहुत ही रोचक हैं, और वह सारी उस सफेदी की कलई खोलकर रखती हैं जो इन इतिहासकारों ने जानबूझकर छिपाई।

बीबीसी ने 30 अगस्त को ही एक लेख जहांगीर को समर्पित किया था। और जहांगीर की प्रशंसा में बहुत कुछ कई प्रोफेसर्स के माध्यम से लिखा था। मगर वह कई बातें लिखने से रह गया था। वैसे तो तुजुके-जहाँगीरी अर्थात जहांगीरनामा या फिर Memoirs of Jahangir ही पढ़ने से काफी कुछ पता चल जाता है। फिर भी इतिहासकार अपने मन से ही लिखते हुए आए हैं। कश्मीर का एक प्रकरण बहुत अजीब है। यह लव जिहाद की मूल प्रवृति को दिखाता है।

Memoirs of Jahangir पुस्तक के पृष्ठ 349 पर कश्मीर के राजौर का किस्सा बयान करते हुए जहांगीर कहता है कि शुक्रवार को हमारा शाही शिविर जहां लगा, वह जगह राजौर थी। पुराने समय में यहाँ पर लोग हिन्दू हुआ करते थे और जमींदार कहलाया करते थे।  सुलतान फ़िरोज़ ने उन्हें मुस्लिम बना लिया था। फिर भी वह खुद को राजा कहा करते थे …………………………वह पति के मरने पर पत्नियों को कब्र में जिंदा दफ़न करते थे।  कुछ दिन पहले ही दस या बारह साल की लड़की को उन्होंने दफ़न किया था। बेटी के पैदा होते ही वह गला दबाकर मार देते थे। और वह हिन्दुओं से बेटियाँ लेते भी थे और बेटियाँ देते भी थे। (अर्थात विवाह सम्बन्ध थे)

अब जरा सोचिये, कि एक न्याय पसंद करने वाले और कथित रूप से हिन्दुओं का भला करने वाले जहांगीर का दृष्टिकोण क्या होना चाहिए था? जिस कथित महान बादशाह ने अपनी गद्दी पर बैठते समय यह घोषणा कराई थी कि हिन्दू औरत को जबरन सती न कराए, जो मन से होना चाहे उसे होने दें। तो ऐसे न्यायप्रिय शासक की चिंता अपने मज़हब के लोगों के लिए क्या होनी चाहिए थी कि “लड़कियों को जिंदा क्यों दफनाना, वह तो हिन्दुओं की कुरीति है, हिन्दू अपनी बेटियों को मारते हैं” मगर इन्साफ पसंद और हिन्दुओं को प्रेम करने वाले जहांगीर ने अपने द्वारा टाँगे गए न्याय की घंटी बजाकर कहा

“Taking them is all well and good, but giving them to Hindus God forbid! It was commanded that henceforth such customs would not be allowed, and anyone who committed such practices would be executed।”

इसे हिंदी में समझते हैं! हिन्दुओं से अतिशय प्यार करने वाले जहांगीर ने कहा कि “हिन्दुओं से बेटियों को लेना (अर्थात मुसलमानों की बहू बनाना) तो ठीक है, मगर हिन्दुओं को अपनी बेटी देना? अल्लाह माफ़ करे! यह हुक्म दिया गया कि आगे से ऐसा कोई भी निकाह नहीं होगा, और जिसने भी ऐसा किया उसे मौत की सजा दी जाएगी!”

अर्थात जहांगीर ने यह नहीं कहा कि कब्र में लड़कियों को जिंदा गाढ़ना बंद किया जाए, मगर वह कहता है कि हिन्दुओं में मुस्लिम बेटियाँ नहीं दी जाएँगी, और उस व्यक्ति को मौत की सजा दी जाएगी जो अपनी बेटी हिन्दुओं को देगा। जहांगीर अपने उस विवरण में यह नहीं लिखता कि उस व्यक्ति को मृत्यु की सजा दी जाएगी जो अपनी बेटी को जिंदा दफना देते हैं।

इतना ही नहीं, जैसा हमने पहले भी कहा है कि जहांगीर सलाम करने के लिए चंगेज़ खान के नियम का पालन करता था और वह खुद कहता है कि मैं पैदा तो हिन्दुस्तान में हुआ हूँ, पर इससे कोई यह न समझे कि मुझे तुर्की नहीं आती। काबुल में बाबर की विरासत के बारे में बात करते हुए लिखता है

“In connection with an account of Kabul, I was shown His Majesty Firdaws-Makani [BaburJ’s memoirs। They were entirely in his own blessed handwriting, except for four sections 1 copied myself। At the end of these sections I penned a sentence in Turkish to show that the four sections were in my writing।

Although I grew up in Hindustan, I am not ignorant of how to speak or write Turkish।” (The Jahangirnama, Memoirs of Jahangir पृष्ठ 77)

अर्थात वह कहता है कि हालाँकि मैं हिन्दुस्तान में बढ़ा हूँ, पर फिर भी मैं तुर्की भाषा को जानता हूँ।

मगर वही जहांगीर हिन्दुओं की भाषा और संस्कृति के विषय में इतना असहिष्णु है कि वह पुष्कर में वराह अवतार की मूर्ति को तुड़वा कर फिंकवा देता है।

जहांगीर की अय्याशियों के चलते अकबर ने उसके बेटे को अधिक स्नेह देना आरम्भ कर दिया था, उसकी कहानी कल पाठकों को बताएंगे कि कैसे उसने अपने ही बेटे को प्रताड़ित किया था।


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