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Friday, January 21, 2022

साइना नेहवाल पर अभद्र टिप्पणी पर “एक्टर” सिद्धार्थ ने माँगी “माफी”, परन्तु क्या यही पर्याप्त है?

वामपंथियों के लिए एक कहावत है कि इनका दायरा सीमित होता है, और यह उसी सड़े बदबूदार पानी में खुश रहते हैं। स्त्री आदर इनके लिए सापेक्ष है और यदि स्त्री दूसरे विचारों की है तो स्त्री आदर पर सेमिनार करने वाले वामपंथी अभद्रता और अश्लीलता की हर सीमा पार कर जाएंगे। वह करते ही हैं। स्मृति ईरानी से लेकर, कंगना रनावत तक लडकियां इनकी शिकार रही हैं। इनके लिए देश के लिए पदक लाने वाली खिलाड़ी भी इसलिए आदर के योग्य नहीं होती हैं क्योंकि वह उनके सड़े पानी में सांस लेने से इंकार कर देती हैं।

ऐसी कई खिलाड़ी हैं, जिनके अपने राजनीतिक विचार हैं! परन्तु राजनीतिक विचार होने का अर्थ यह जरा भी नहीं होता है कि आप राजनीतिक विरोध में अभद्र टिप्पणी करेंगे। कथित सेलिब्रिटी वामपंथी, जिनके लिए उनकी कुंठा और असफलता ही उनका जीवन है, वह अपने आप को किसी भी प्रकार से प्रासंगिक रखते हुए उन लोगों पर अपनी ओछी और गंदी मानसिकता से प्रहार करते हैं, जो देश का नाम अपने खेल से रोशन करते हैं, अपने देश की बुराई से अपनी जेब नहीं भरते!

“एक्टर” सिद्धार्थ, ने जो स्पष्ट है कि हिन्दुओं और नरेंद्र मोदी दोनों के प्रति ही अपनी घृणा में इतने अंधे हो गए हैं, कि देश के गौरव के साथ भी खिलवाड़ करने लगे हैं। साइना नेहवाल ने प्रधानमंत्री मोदी की सुरक्षा चूक को लेकर एक ट्वीट किया, तो उनकी ट्वीट पर वैसे तो उनकी ट्रोलिंग पूरे लिबरल गैंग ने की, परन्तु कथित “एक्टर” सिद्धार्थ ने अश्लीलता की हद पार करते हुए लिखा ““subtle cock champion”।

हिंदी में इसका अनुवाद करने के लिए संभवतया शब्द नहीं हैं! यह साइना नेहवाल पर की गयी एक बेहद घटिया एवं अश्लील टिप्पणी थी, जो कहीं से भी आवश्यक नहीं थी। प्रश्न यह उठता है कि क्या कोई भी भारतीय अब सोशल मीडिया पर इन वामपंथी कुंठित “एक्टर” से पूछकर अपने मत व्यक्त करेगा? और एक और बात सब मामले स्पष्ट करते हैं कि यदि सोशल मीडिया नहीं आता तो कभी भी यह नहीं पता चल सकता था कि “देश” के लिए कथित “फिल्मों” में अभिनय करने वाले लोग दिमाग से इतने खोखले और विपरीत विचारों के प्रति इतनी घृणा से भरे हुए हो सकते हैं।

इनके लिए स्त्री की निजता कोई मुद्दा नहीं है, इनके लिए स्त्री आदर कोई मुद्दा नहीं है, बल्कि इनके लिए विपरीत विचारों वाली स्त्री इनकी अतृप्त यौन कुंठाओं को शांत करने का माध्यम है।

जैसे ही यह ट्वीट वायरल हुआ, वैसे ही सिद्धार्थ के विरुद्ध गुस्सा बढ़ने लगा। दरअसल यह गुस्सा इसलिए भी था क्योंकि कुछ ही दिन पहले यह पूरा का पूरा गैंग स्त्री आदर के नाम पर बुल्ली बाई एप को लेकर रोना धोना मचा रहा था।

और आज खुद ही एक स्त्री पर अश्लील हमला कर रहा था। कोई व्यक्ति या कोई गैंग इतना परस्पर विरोधाभासी कैसे हो सकता है? बुल्ली बाई एप बनाने वाला अपराधी और साइना नेह्वाला पर घटिया टिप्पणी करने वाला सिद्धार्थ “क्रांतिकारी?”

यह परिभाषा इन कथित फेमिनिस्ट, जो कट्टर इस्लाम की कठपुतली हैं, को किसने दी?

इस मामले पर बबिता फोगट ने ट्वीट किया

एक यूजर ने एकदम सही प्रश्न करते हुए बॉलीवुड की पोल खोली। उसने लिखा कि परिणिति चोपड़ा ने मूवी ने साइना नेहवाल की भूमिका निभाई थी, परन्तु अब जब असली खिलाड़ी फिल्म उद्योग के ही एक व्यक्ति के कारण अपमानित हो रही है, तो वह शांत है!

साइना नेहवाल के पिता ने भी इस विषय में रोष व्यक्त करने हुए कहा कि इस तरह की टिप्पणी व्यक्ति की ‘असभ्य मानसिकता’ दर्शाती है। उन्होने यह भी प्रश्न किया था कि मेरी बेटी ने तो मैडल जीते, तुमने क्या किया? और माफी की मांग की थी!

सारी फेमिनिस्ट शांत हैं और अर्बन नक्सल वाली सभी महिलाएं शांत है, जैसे कुछ नहीं हुआ है।

हालांकि साइना नेहवाल ने सीएनएन से बात करते हुए कहा कि उन्हें नहीं पता कि सिद्धार्थ के कहने का क्या मतलब था, वह उसे एक अभिनेता के रूप में पसंद करती थीं, परन्तु यह ट्विट्टर है, यहाँ आप ऐसी ही भाषा से जाने जा सकते हैं

ऐसा नहीं है कि “एक्टर” सिद्धार्थ ने केवल साइना का मजाक उड़ाया था, उसने नविका कुमार के बारे में भी अभद्र टिप्पणी की थी:

साइना के समर्थन में बहुत लोग आए

हालांकि आज की माफी को लोग “एक्टर” की महानता बता रहे हैं, पर यह महानता नहीं कानून का डर है क्योंकि राष्ट्रीय महिला आयोग ने कड़ी कार्यवाही करते हुए कदम उठाया था

हालांकि उसने इन तमाम शोर के बीच कथित “माफी” मांग ली है:

परन्तु क्या यह माफी पर्याप्त है? क्या लिबरल गैंग इस माफी के बाद छूटता रहेगा? क्या लिबरल गैंग को यह अधिकार है कि वह विपरीत विचारों वाली स्त्रियों पर अश्लील और अभद्र टिप्पणी करके छूटता रहे?

ऐसे कई मामले सामने आते हैं,। परन्तु यह देश का दुर्भाग्य ही कहा जा सकता है कि जो देश को बार बार तोड़ने की कोशिश करते हैं, उन्हें लिबरल कहकर महान बताया जाता है और हिन्दुओं को, जो देश को अपना मानकर इस पर बलिदान होते रहे हैं, जो देश के लिए पदक लाते रहे हैं, उनका अपमान किया जाता है।

यह और भी दुर्भाग्य है कि सोशल मीडिया पर लेफ्ट लिबरल का शोर अधिक सुना जा रहा है, और पालघर में साधुओं की हत्या को लेकर भी शांति छाई हुई है!

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