spot_img

HinduPost is the voice of Hindus. Support us. Protect Dharma

Will you help us hit our goal?

spot_img
Hindu Post is the voice of Hindus. Support us. Protect Dharma
32.4 C
Sringeri
Wednesday, February 18, 2026

आर्थिक और मानसिक संकट के बीच कराया गया कन्वर्जन, गांव के प्रयासों से हुई वापसी

ओडिशा के केन्दुझर जिले से एक महत्वपूर्ण खबर सामने आई है। यहां दस साल पहले ईसाई मिशनरियों के प्रभाव में आकर अपना धर्म बदल चुके एक जनजातीय परिवार के छह सदस्यों ने फिर से अपने मूल धर्म में वापसी की है। हो जनजाति से जुड़े इस परिवार ने गांव के वरिष्ठ लोगों और ग्रामीणों की उपस्थिति में घर वापसी की। परिवार के सदस्यों ने अपने निर्णय पर संतोष जताया और समाज के साथ मिलकर जीवन बिताने का संकल्प लिया।

आनंदपुर ब्लाक के काठकटा पंचायत के बरगोठ गांव में रहने वाली नीतिमा हो के पति का दस साल पहले निधन हुआ। पति की मृत्यु के बाद नीतिमा गहरे दुख में डूब गईं। इसी दौरान कुछ ईसाई पास्टर उनके घर पहुंचे। उन्होंने नीतिमा को समझाने के नाम पर डर दिखाया। उन्होंने कहा कि यदि वह अपने धर्म में रहीं तो उनके बच्चों पर भी संकट आएगा। उन्होंने यह भी कहा कि ईसा की शरण लेने से उनका परिवार सुरक्षित रहेगा। दुख और भय की स्थिति में नीतिमा ने अपने परिवार के साथ धर्म परिवर्तन कर लिया।

कन्वर्जन की यह घटना गांव के लोगों को लगातार खटकती रही। गांव के कई लोग मानते हैं कि मिशनरी संगठन लोगों की मानसिक और आर्थिक स्थिति का लाभ उठाते हैं। वे संकट के समय सहारा देने के नाम पर लोगों को उनके मूल से अलग करने का प्रयास करते हैं। बरगोठ गांव में भी ऐसा ही हुआ।

शहीद बिरसा मुंडा क्लब के कार्यकर्ताओं ने इस परिवार से लगातार संवाद बनाए रखा। क्लब के सदस्यों ने कई वर्षों तक धैर्य के साथ परिवार को उनकी परंपराओं और पूर्वजों की संस्कृति की याद दिलाई। उन्होंने परिवार को समझाया कि संकट के समय किसी का धर्म बदलवाना उचित नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि समाज से कटकर कोई भी व्यक्ति पूर्ण संतोष नहीं पा सकता।

क्लब के अध्यक्ष बाईधर बिंधाणी ने साफ शब्दों में कहा कि कुछ पास्टर गांवों में जाकर लोगों की कमजोरियों को निशाना बनाते हैं। वे आर्थिक सहायता और चमत्कारिक वादों के सहारे लोगों को प्रभावित करते हैं। उन्होंने कहा कि हमारे समाज के लोगों को अपने पूर्वजों से जोड़कर रखना हमारा कर्तव्य है। कोई बाहरी ताकत यदि हमारे लोगों को उनकी जड़ों से अलग करने की कोशिश करती है तो हमें सजग रहना चाहिए।

लगातार प्रयासों के बाद परिवार ने स्वयं अपने निर्णय पर पुनर्विचार किया। परिवार के एक सदस्य ने बताया कि कन्वर्जन के बाद वे अपने त्योहारों, रीति-रिवाजों और सामाजिक आयोजनों से दूर हो गए थे। उन्हें यह दूरी भीतर से परेशान करती रही। अंततः उन्होंने अपने मूल धर्म में लौटने का फैसला लिया। गांव के लोगों ने इस निर्णय का स्वागत किया और सामूहिक रूप से घर वापसी का आयोजन किया।

यह घटना केवल एक परिवार की वापसी नहीं है। यह समाज को एक संदेश भी देती है। कन्वर्जन की प्रक्रिया यदि लालच, भय या भ्रम के आधार पर चलती है तो वह सामाजिक संतुलन को प्रभावित करती है। संविधान हर नागरिक को अपने धर्म का पालन करने की स्वतंत्रता देता है, लेकिन किसी की मजबूरी का लाभ उठाकर धर्म बदलवाना नैतिक रूप से गलत है।

बरगोठ गांव में अभी कुछ और परिवार ऐसे हैं जिन्होंने पहले धर्म परिवर्तन किया। शहीद बिरसा मुंडा क्लब के सदस्य उनसे भी संवाद कर रहे हैं। वे चाहते हैं कि समाज में एकता बनी रहे और कोई भी व्यक्ति अपने संकट के समय गलत दिशा में न जाए।

समाज को चाहिए कि वह जागरूक रहे। संकट के समय सहायता देना मानवीय कर्तव्य है, लेकिन सहायता के बदले कन्वर्जन की शर्त रखना समाज में अविश्वास पैदा करता है। केन्दुझर की यह घटना बताती है कि संवाद और धैर्य से लोग अपने मूल की ओर लौट सकते हैं। समाज यदि सजग और संगठित रहे तो कोई भी बाहरी प्रभाव उसकी जड़ों को कमजोर नहीं कर सकता।

Subscribe to our channels on WhatsAppTelegram &  YouTube. Follow us on Twitter and Facebook

Related Articles

Shomen Chandra
Shomen Chandra
Shomen Chandra is a writer and columnist who contributes articles and opinion pieces to various media organisations. He previously served as the Editor of News4Fact and is currently pursuing a postgraduate degree in Journalism and Mass Communication.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Latest Articles

Sign up to receive HinduPost content in your inbox
Select list(s):

We don’t spam! Read our privacy policy for more info.

Thanks for Visiting Hindupost

Dear valued reader,
HinduPost.in has been your reliable source for news and perspectives vital to the Hindu community. We strive to amplify diverse voices and broaden understanding, but we can't do it alone. Keeping our platform free and high-quality requires resources. As a non-profit, we rely on reader contributions. Please consider donating to HinduPost.in. Any amount you give can make a real difference. It's simple - click on this button:
By supporting us, you invest in a platform dedicated to truth, understanding, and the voices of the Hindu community. Thank you for standing with us.