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Wednesday, April 15, 2026

सारण में देर रात छापों में छह आर्केस्ट्रा समूहों से 15 लड़कियों को मुक्त कराया, सात गिरफ्तार

बिहार के सारण में महज दस किलोमीटर के दायरे में देर रात हुई छापों की कार्रवाई में छह आर्केस्ट्रा समूहों से 15 नाबालिग लड़कियों को मुक्त कराया। बिहार पुलिस की एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग इकाई और गैरसरकारी संगठनों एसोसिएशन फॉर वॉलंटरी एक्शन (एवीए) व नारायणी सेवा संस्थान की पांच घंटे तक चली संयुक्त कार्रवाई में सात आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। मुक्त कराई गई ज्यादातर लड़कियों के शरीर पर चोट के निशान थे। इन लड़कियों को ट्रैफिकिंग के जरिए पंजाब, ओड़ीशा, असम, पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश से लाया गया था। इस दौरान एक गाड़ी को जब्त किया गया और मुक्त कराई गई लड़कियों को आश्रय गृह भेज दिया गया। एसोसिएशन फॉर वॉलंटरी एक्शन और नारायणी सेवा संस्थान बाल अधिकारों की सुरक्षा व संरक्षण के लिए 250 से भी ज्यादा नागरिक समाज संगठनों के देश के सबसे बड़े नेटवर्क जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन (जेआरसी) के सहयोगी संगठन हैं।  

यह कार्रवाई बिहार के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (कमजोर वर्ग, सीआईडी, बिहार पुलिस मुख्यालय) डॉ. अमित कुमार जैन के दिशानिर्देशों के बाद सारण के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के आदेश पर हुई। छापे की कार्रवाई आधी रात शुरू हुई और भोर तक जारी रही। इसमें विभिन्न आर्केस्ट्रा परिसरों से 12 लड़कियों को मुक्त कराया गया जबकि खुशी आर्केस्ट्रा के मालिक ने तीन लड़कियों को कार में लेकर भागने की कोशिश की। आठ किलोमीटर तक पीछा करने के बाद उसे पकड़ लिया गया और तीनों नाबालिग लड़कियों को मुक्त करा लिया गया।

Authorities rescue minor girls from orchestra groups during midnight raid in Saran district.

मुक्त कराई गई सभी लड़कियों ने बताया कि उन्हें शारीरिक प्रताड़ना व यौन उत्पीड़न का सामना करना पड़ता था और अश्लील गानों पर नाचने को मजबूर किया जाता था। एफआईआर के अनुसार, “इन लड़कियों को रात में भीड़ के सामने अश्लील गानों पर जबरन नृत्य कराया जाता था। इन्हें पूरी तनख्वाह नहीं दी जाती थी और इनका शारीरिक व मानसिक उत्पीड़न किया जाता था।”    

लड़कियों के शरीर पर दिख रहे चोटों के निशान बता रहे थे कि आर्केस्ट्रा मालिकों ने उन पर कितना अत्याचार किया था। जिन आर्केस्ट्रा समूहों पर छापे मारे गए उनमें काजल आर्केस्ट्रा, सुर संगम आर्केस्ट्रा, कोपा चट्टी आर्केस्ट्रा, खुशी आर्केस्ट्रा, श्याम आर्केस्ट्रा और दिया आर्केस्ट्रा शामिल थे।

अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक और बिहार पुलिस टीम की इस त्वरित कार्रवाई की सराहना करते एसोसिएशन फॉर वॉलंटरी एक्शन के वरिष्ठ निदेशक मनीष शर्मा ने कहा, “बिहार पुलिस ने जिस तरह आर्केस्ट्रा समूहों पर शिकंजा कसा है, वह एक नजीर है। ये आर्केस्ट्रा समूह बड़े ट्रैफिकिंग गिरोहों के लिए एक अहम कड़ी हैं। ये गिरोह कमजोर पृष्ठभूमि की लड़कियों को जाल में फांसते हैं और उन्हें शोषण व उत्पीड़न के अंतहीन चक्र में धकेल देते हैं। ऐसे में यह जरूरी है कि स्थानीय पुलिस इसे संगठित आपराधिक गिरोहों से जुड़ा मामला समझ कर इसकी छानबीन करे और उसी के अनुरूप कानूनी कार्रवाई करे। साथ ही, हमें इन नाबालिग बच्चियों का तत्काल पुनर्वास सुनिश्चित करना होगा ताकि ये फिर से समाज की मुख्य धारा में लौट सकें।”

पुलिस ने सातों आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की प्रासंगिक धाराओं, पॉक्सो अधिनियम, 2012; किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल व संरक्षण) अधिनियम, 2015 और बंधुआ मजदूरी प्रणाली (उन्मूलन) अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है। सभी नाबालिग लड़कियों को बाल कल्याण समिति के समक्ष पेश किया गया जहां से उन्हें काउंसलिंग व पुनर्वास के लिए आश्रय गृह भेज दिया गया।

(यह प्रेस विज्ञप्ति जितेंद्र परमार से प्राप्त या उनके द्वारा लिखित रूप में प्रकाशित की गई है)

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