राजा भैया का सनातन समाज को दर्पण दिखाने का प्रयास

सामान्यतः देखा गया है कि जातिवाद के चक्कर में जनता कई बार ऐसे व्यक्ति को जनप्रतिनिधि बना देती है जिसमें सनातन जागरूकता शून्य होती है और वह व्यक्ति अपने पूरे कार्यकाल में सनातन रक्षार्थ तो कुछ करता ही नहीं साथ ही साथ मजहबी तुष्टिकरण की राजनीति के चलते उन इस्लामिक व्यक्तियों का सगा अवश्य बन जाता है जो भारत में रहते हुए भी भारतीय राष्ट्रगान और राष्ट्रीय उद्घोष का विरोध करते हैं । सोचिए क्या लाभ ऐसे जनप्रतिनिधि का जो जातिगत वोट पाकर उन मजहबियों का विरोध नहीं कर पाता जो हमारी बेटियों और बच्चों के साथ अमानवीय कृत्य करना अपना मजहबी दायित्व समझते हैं। कुंडा विधायक और जनसत्ता दल लो. के मुख्या रघुराज प्रताप सिंह उर्फ़ राजा भैया का एक कथा में उध्बोधन हुआ जो वास्तव में सुनने और समझने योग्य है क्यूंकि इस प्रकार का जागरूक उध्बोधन न तो सनातनी धर्म गुरु कह रहे हैं और न ही जनप्रतिनिधि । राजा भैया ने कहा की हमें दुसरो से मजहबो से भी सीखना चाहिए मुसलमान का बच्चा अपने मजहब के बारे में सब कुछ जानता है जबकि सनातनियों के बच्चे मात्र विधालय की शिक्षा तक सिमित हैं सनातनियों को अपने बच्चो को धर्म ज्ञान देना चाहिए प्रत्येक सनातनी को तिलक धारण करना चाहिए और २४ घंटे में से कुछ समय उस ईश्वर की आराधना अवश्य करनी चाहिए जिससे ये सारी सत्त्ता है । राजा भैया का यह कहना भी उचित है की शिक्षा साक्षर भी बनाती है और यदि शिक्षा प्राप्त करने का उद्देश्य गलत हो तो साक्षर का उल्टा राक्षस भी बनाती है यह बिलकुल वैसा है की पढ़ा लिखा जिहादी अनपढ़ से ज्यादा भयावह होता है जिसका प्रमाण दिल्ली बम धमाकों में सबने देखा है इन सबके अतिरिक्त राजा भैया ने सबसे महत्वपूर्ण बात कही की विधर्मी भारत के स्वरूप को खंडित करना चाहते हैं जिसको रोकना है तो प्रत्येक सनातनी को जागरूक और मुखर होना होगा ,संतान और शस्त्र विद्या में वृद्धि आवश्यक रूप से करनी होगी क्यूंकि पूरे विश्व में भारत ही एक मात्र राष्ट्र है जिसको मां जैसे पवित्र शब्द से सम्बोधित किया जाता है।

कल्पना कीजिए जब भारत की संसद और अलग अलग राज्य की विधानसभाओं में वन्दे मातरम् का विरोध करने वाले और राष्ट्रगान पर खड़े न होने वाले मजहबी जनप्रतिनिधि पहुँच जाते हैं तो भारत के स्वाभिमान को कितनी चोट पहुँचती होगी । इन शब्दों से खुलकर क्या ही कहा जा सकता है की समय अनुकूल नहीं सनातन समाज को सजग और कर्मठ होना ही होगा।

— दिव्य अग्रवाल

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