हेलमेट पर फिलिस्तीन का झंडा… खेल या साजिश?

जम्मू कश्मीर में खेल के मैदान से राजनीति और राष्ट्रविरोधी सोच को हवा देने का एक गंभीर मामला सामने आया है, जहां स्थानीय क्रिकेटर फरकान भट ने न्यू ईयर के दिन हेलमेट पर फिलिस्तीनी झंडा लगाकर मैदान में उतरकर विवाद खड़ा कर दिया। यह घटना जम्मू में आयोजित जेएंडके चैंपियंस लीग के एक मुकाबले के दौरान हुई, जिसने खेल को खेल की मर्यादा से बाहर निकालकर राष्ट्रीय सुरक्षा और सार्वजनिक व्यवस्था से जुड़ा विषय बना दिया।

यह मैच जेके 11 किंग्स और जम्मू ट्रेलब्लेजर्स के बीच खेला गया था। जैसे ही फरकान भट के हेलमेट पर लगे फिलिस्तीनी झंडे की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आए, लोगों में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली। जम्मू कश्मीर जैसे संवेदनशील क्षेत्र में किसी विदेशी राजनीतिक प्रतीक का खुला प्रदर्शन कई सवाल खड़े करता है। खेल के मंच का उपयोग विचारधारात्मक संदेश देने के लिए करना न केवल नियमों के विरुद्ध है बल्कि यह एक सुनियोजित उकसावे की ओर भी इशारा करता है।

जम्मू पुलिस ने मामले को हल्के में नहीं लिया और फरकान भट को डोमाना थाने बुलाकर पूछताछ शुरू कर दी। साथ ही टूर्नामेंट आयोजक जहीद भट को भी तलब किया गया है ताकि यह स्पष्ट किया जा सके कि क्या यह कृत्य पूर्व नियोजित था और आयोजकों ने आचरण संबंधी बुनियादी दिशा निर्देशों की अनदेखी की। वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने पुष्टि की कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 के तहत प्रारंभिक जांच के आदेश दिए गए हैं, जिसे 14 दिनों के भीतर पूरा करना होगा।

पुलिस सूत्रों के अनुसार जांच इस बात पर केंद्रित है कि विदेशी राजनीतिक झंडे के प्रदर्शन के पीछे क्या मंशा थी, किन परिस्थितियों में इसे अनुमति मिली और क्या इससे सार्वजनिक व्यवस्था भंग होने या राष्ट्रीय भावना को ठेस पहुंचने की संभावना बनी। फिलहाल एफआईआर दर्ज नहीं हुई है, लेकिन कानून के तहत आगे की कार्रवाई से इनकार नहीं किया जा सकता।

यह घटना केवल एक खिलाड़ी के व्यवहार तक सीमित नहीं है। फिलिस्तीन के समर्थन के नाम पर ऐसे प्रतीकों का प्रदर्शन उस विचारधारा की ओर इशारा करता है जो हमास जैसे आतंकी संगठनों के कृत्यों पर मौन या अप्रत्यक्ष समर्थन जताती है। हमास ने बीते वर्षों में निर्दोष नागरिकों पर रॉकेट हमले किए, बच्चों और महिलाओं को बंधक बनाया, सार्वजनिक स्थानों पर नरसंहार किया और हिंसा को अपनी नीति बनाया। ऐसे संगठनों की क्रूरता ने पूरी दुनिया को झकझोर दिया है। ऐसे में उनके नाम से जुड़े झंडे को खेल के मैदान में गर्व से प्रदर्शित करना यह दर्शाता है कि समर्थक किस तरह के विचारों को बढ़ावा देना चाहते हैं।

जम्मू कश्मीर क्रिकेट एसोसिएशन ने भी इस विवाद से खुद को अलग करते हुए स्पष्ट किया कि जेएंडके चैंपियंस लीग उसकी मान्यता प्राप्त प्रतियोगिता नहीं है और उसका इससे कोई संबंध नहीं है। यह बयान अपने आप में आयोजकों की जिम्मेदारी पर सवाल खड़े करता है।

देश में ऐसे कई लोग मौजूद हैं जो खेल, संस्कृति या अभिव्यक्ति की आजादी की आड़ में राष्ट्रविरोधी सोच को सामान्य बनाने की कोशिश करते हैं। फरकान भट का यह कृत्य उसी खतरनाक प्रवृत्ति का उदाहरण है। खेल देश को जोड़ने का माध्यम होता है, न कि आतंकी विचारधाराओं के प्रचार का मंच।

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Shomen Chandra
Shomen Chandra
Shomen Chandra contributes articles to select media organisations. He is the founding editor of The Tilda Times and holds a postgraduate degree in journalism and mass communication.

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