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Wednesday, August 17, 2022

वह जीवन जो मायने नहीं रखते हैं कन्हैया लाल से लेकर अब कर्नाटक में प्रवीण नेत्तारु तक? कब चेतेगी सरकार, लोग कर रहे अब प्रश्न अपार!

कर्नाटक में कथित “सिर तन से जुदा” गैंग ने एक और हिन्दू युवक की जान ले ली है, वहीं इस उन्माद को भड़काने वाले सब शांत हैं। जैसे हर कोई इस बात पर संतुष्ट है कि उनकी बोई विषबेल अब फल दे रही है। उदयपुर में कन्हैया लाल से आरम्भ होकर यह अब भोपाल और फिर कर्नाटक में पहुँच गया है। “सिर तन से जुदा” का यह सफ़र न ही आज का है और न ही यह नया है और न ही यह यहीं तक सीमित रह जाना है।

कमलेश तिवारी का चेहरा हम सभी को याद होगा ही, कमलेश तिवारी की हत्या भी इसी प्रकार हुई थी, परन्तु आज तक उनके हत्यारों को सजा नहीं हुई है। सिर कटते रहे हैं, बस अभी यह सब हमारे सामने हो रहा है तो हम उस काल का स्मरण कर मात्र सिहर ही सकते हैं कि यह सब भी होता था या ऐसे ही होता था, और क्या होता है शरिया? और क्या होता है शरिया क़ानून? क्या कुछ अलग?

जब भी मन आए किसी का भी गला काटकर चला जाया जाए? हिन्दू युवक कभी किसी बहाने तो कभी किसी बहाने इस जिहादी मानसिकता का शिकार हो रहे हैं। कर्नाटक में प्रवीण नेत्तारु नामक युवक जो भारतीय जनता युवा मोर्चा का कार्यकर्त्ता भी था, उसकी “सिर तन से जुदा” गैंग द्वारा की गयी जघन्य हत्या के चलते लोगों में बहुत आक्रोश है। उसकी हत्या क्यों की गयी?

उसकी हत्या मात्र उन लोगों ने नहीं की है जो हथियार लेकर आए थे, उसके हत्यारे वह सभी हैं, जो नुपुर शर्मा के सिर तन से जुदा के नारों पर मौन थे, प्रवीण के हत्यारे वह सभी हैं जो नुपुर शर्मा को दी जा रही धमकियों पर यह कह रहे थे कि “इससे मुस्लिमों का असली चरित्र दिख रहा है!”, प्रवीण के हत्यारे वह सभी हैं जो अपने अपने ट्वीट्स के माध्यम से बार बार कट्टर इस्लामी हिंसा को सही ठहराते हैं, वह सभी लेखक और लेखिकाएं हैं जो बार-बार इस बात का रोना रोती हैं कि हिन्दू समुदाय मुस्लिमों पर अत्याचार कर रहा हैं, जो उन्हें तुष्टिकरण की उस सीमा पर ले जाते हैं, जहाँ से वापस आना संभव नहीं है।

यह हिन्दुओं का जारी जीनोसाइड है! अब उन्हें निशाना बनाया जा रहा है, जो धर्म के विषय में खुलकर बोलते हैं। सबको मारना आवश्यक नहीं है। प्रतीकों को मारना आवश्यक है। यह रणनीति कट्टरपंथी मुस्लिम बहुत भली तरह से समझते हैं। यही कारण है कि उन्होंने मंदिरों को अपना निशाना बनाया था और यही कारण है कि अंग्रेजों ने भी मंदिरों की आय को अपना निशाना बनाया। दुर्भाग्य से स्वतंत्रता के बाद भी जीनोसाइड जारी रहा और अब हिन्दू बेचारा हर ओर से ऐसा विवश और लाचार हो गया है कि उसकी अपनी ही चुनी हुई सरकार में उसके कार्यकर्ताओं की हत्या हो रही है और वही लाठी खा रहा है!

यह भी हिन्दुओं का दुर्भाग्य है कि जहाँ एक ओर शाहीन बाग़ और किसान आन्दोलन के चलते तथा यहाँ तक हिजाब के चलते जो भी कथित आन्दोलन और हिंसा हुई, उसमें लाठियां नहीं चलाई गईं, फिर ऐसा क्या कारण है कि प्रवीण की नृशंस हत्या का विरोध प्रदर्शन करने वाले हिन्दुओं पर लाठियां चला दी गईं?

कन्हैया लाल का समर्थन करना भी क्या अब अपराध है?

परन्तु न्याय के लिए हिन्दू कहाँ जाएं? जिनसे वह न्याय की आशा करता है, वही इस उन्माद को फैलाने वाले को पत्रकार कहकर ट्वीट करने की आजादी देकर न्याय कर पहले ही कर चुके हैं!

एक यूजर ने लिखा कि

“हमारे संविधान में मूलभूत अधिकार मुस्लिमों के लिए हैं और हिन्दुओं के लिए मूलभूत कर्तव्य हैं।

इसलिए हिन्दुओं के लिए जीवन का अधिकार है ही नहीं। यही कारण है कि उच्चतम न्यायालय एवं सरकार निशंक राठौर या प्रवीण नेत्तारू और ऐसे ही कई लोगों की हत्याओं के विषय में कुछ नहीं कह रही है!”

इतनी संवेदनहीनता हिन्दुओं के प्रति क्यों है, यह समझ से परे है। यह उपेक्षा पार्टी कार्यकर्ताओं को भी चुभ रही है और उन्हें ऐसे कदम उठाने के लिए बाध्य कर रही है, जो संभवतया वह नहीं उठाना चाहते हों, परन्तु वह पीड़ा के चलते उठा रहे हैं। भारतीय जनता पार्टी युवा मोर्चा के सदस्यों ने कर्नाटक में सदस्यता छोड़ो अभियान चला दिया है!

लोग आक्रोशित हैं कि आखिर सत्ता में रहते हुए इन जिहादी तत्वों पर भारतीय जनता पार्टी की सरकार कदम क्यों नहीं उठा रही है? प्रवीण के अंतिम संस्कार में भारतीय जनता पार्टी के कर्नाटक प्रदेश अध्यक्ष नलिन कुमार कतील की गाड़ी पर भी भाजपा कार्यकर्ताओं ने हमला कर दिया।

आखिर ऐसा आक्रोश अपनी ही पार्टी के प्रति क्यों उमड़ रहा है? यह कहीं न कहीं उस असहायता के भाव से उपजा है जो नुपुर शर्मा को मिली धमकियों एवं उसके बाद कन्हैया लाल से लेकर प्रवीण की कुल्हाड़ी से गला काटने तक की घटनाओं से उपजी हैं!

लोग कह रहे हैं कि भारतीय जनता पार्टी अपनी ही पार्टी के कार्यकर्ताओं पर होने वाले हमलों पर मौन रही है और यही कारण है कि यह हो रहा है!

नुपुर शर्मा, नवीन जिंदल एवं अरुण यादव पर जिस प्रकार से कथित लॉबी के चलते अनुशासनात्मक कार्यवाही की गयी है, और जो कार्यकर्ताओं में असहायता का संदेश गया है, वह कहीं से भी पार्टी के लिए उचित नहीं है और जिस प्रकार से पार्टी ने जैसे एक वर्ग विशेष के प्रति आत्मसमर्पण सा कर दिया है, वह पार्टी के कार्यकर्ताओं को चुभ रहा है, उन्हें ऐसा लग रहा है जैसे उन्हें बीच मझधार में लाकर छोड़ दिया है!

अपने कार्यकर्ताओं पर हो रहे इस प्रकार के हमलों को देखकर होनाली के विधायक एमपी रेनुकाचार्य ने मांग की कि जिन्होनें भी यह किया है उनका एनकाउटर किया जाना चाहिए और यदि इस मामले में सरकार कोई निर्णय लेने में अक्षम रहती है तो वह इस्तीफ़ा दे देंगे।

उन्होंने यह भी कहा कि अगर हमारी सरकार योगी सरकार के जैसे ही कड़े कदम उठाएगी तो ही सरकार और संगठन कार्य कर सकता है, यदि हम सत्ता में रहते हुए भी हिन्दू कार्यकर्ताओं को बचा न पाएं तो सत्ता का लाभ ही क्या!

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