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Tuesday, April 14, 2026

हिंसा के साम्राज्य का अंत: शीर्ष नक्सली कमांडर बारसे देवा हथियारों सहित पुलिस के सामने झुका

तेलंगाना में नक्सलवाद को बड़ा झटका लगा है। शीर्ष माओवादी सैन्य कमांडर बारसे देवा उर्फ सुक्का ने शुक्रवार को तेलंगाना पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया। उसके साथ 15 से अधिक नक्सली कैडर भी हथियार छोड़कर मुख्यधारा में लौटे। यह घटनाक्रम साफ संकेत देता है कि हिंसा और भय पर टिका नक्सलवाद अपने अंतिम दौर में पहुंच चुका है और सुरक्षा बलों की निर्णायक रणनीति रंग ला रही है।

तेलंगाना के पुलिस महानिदेशक बी शिवधर रेड्डी के समक्ष यह आत्मसमर्पण हुआ। पुलिस अधिकारियों के अनुसार बारसे देवा पर कुल 25.47 लाख रुपये का इनाम घोषित था। आत्मसमर्पण के बाद उसे तेलंगाना पुलिस की अभिरक्षा में लिया गया है और शनिवार को मीडिया के सामने पेश किया जाएगा। गुरुवार शाम को बारसे देवा और उसके साथियों ने छत्तीसगढ़ से तेलंगाना में प्रवेश किया था, जिसके बाद शुक्रवार को उन्हे हैदराबाद लाया गया।

पुलिस सूत्रों ने बताया कि बारसे देवा की उम्र करीब 45 वर्ष है और वह माओवादी संगठन की सबसे अहम सैन्य इकाई मानी जाने वाली बटालियन नंबर एक का प्रभारी था। वर्ष 2021 से वह एरिया जोनल कमेटी सदस्य (AZCM) के पद पर रहा। यह वही बटालियन है जिसे संगठन की अंतिम कोर लड़ाकू इकाई माना जाता था। लगातार अभियान और दबाव के चलते यह इकाई कमजोर होती चली गई और अब उसका ढांचा लगभग ढह चुका है।

माडवी हिडमा (L) और बारसे देवा (R)

बारसे देवा का नाम शीर्ष माओवादी कमांडर माडवी हिडमा के बेहद करीबी सहयोगी के रूप में लिया जाता रहा है। नवंबर में आंध्र प्रदेश के मारेडुमिल्ली के जंगलों में हुए मुठभेड़ में हिडमा के मारे जाने के बाद बारसे देवा लगातार भय में था। पिछले एक महीने से वह अपनी लोकेशन बार-बार बदल चुका था और संगठन को संभालने की कोशिश कर रहा था। हिडमा की मौत के बाद उसने माओवादी सैन्य विंग पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (PLGA) के संचालन की जिम्मेदारी संभाली थी, लेकिन सुरक्षा बलों की सख्ती ने उसकी सारी गणनाएं विफल कर दीं।

दोनों कमांडर छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले के पुवार्टी गांव के निवासी रहे हैं। यह इलाका करीब चार दशक तक माओवादियों के कब्जे में रहा, लेकिन फरवरी 2024 में सुरक्षा शिविर की स्थापना के बाद वहां स्थिति बदली। बारसे और हिडमा ने साथ मिलकर कई बड़े हमलों की साजिश रची थी, जिनमें 2013 का दरभा घाटी हमला और 2021 का सुकमा बीजापुर हमला शामिल रहा। इन हमलों में निर्दोष नागरिकों और सुरक्षाकर्मियों की जान गई थी, जो नक्सलवाद की असल सच्चाई को दिखाता है।

अधिकारियों के मुताबिक बारसे देवा हथियारों की खरीद, लॉजिस्टिक्स और सशस्त्र दस्तों के समन्वय में अहम भूमिका निभाता रहा। आत्मसमर्पण के समय उसके पास से एक लाइट मशीन गन (LMG) बरामद हुई। उसके साथ मौजूद ऑपरेशन टीम के सदस्यों ने भी हथियार डाल दिए। खुफिया आकलन बताते हैं कि कभी 130 सशस्त्र कैडर वाली बटालियन नंबर एक अब बिखर चुकी है और शेष सदस्य भी जल्द आत्मसमर्पण का रास्ता अपना सकते हैं।

बारसे देवा का आत्मसमर्पण माओवादी संगठन की रीढ़ मानी जाने वाली PLGA के लिए निर्णायक आघात है। हिडमा की मौत और बारसे के आत्मसमर्पण के बाद CPI (Maoist) की संगठित हिंसक क्षमता लगभग समाप्त मानी जा रही है। कभी हजारों हथियारबंद कैडरों वाला यह नेटवर्क अब भरोसे और नेतृत्व के संकट से जूझ रहा है।

सुरक्षा एजेंसियों का आकलन स्पष्ट है कि नक्सलवाद अब अंतिम सांसें गिन रहा है। विकास, सुरक्षा और कानून के सामने हथियारों की राजनीति टिक नहीं पाई। बारसे देवा का आत्मसमर्पण यह स्पष्ट संदेश देता है कि माओवादियों के लिए हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में लौटना ही एकमात्र विकल्प है।

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Shomen Chandra
Shomen Chandra
Shomen Chandra is a writer and columnist who contributes articles and opinion pieces to various media organisations. He previously served as the Editor of News4Fact and is currently pursuing a postgraduate degree in Journalism and Mass Communication.

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