“जिस कॉन्ग्रेस ने बनाया FCRA, वही अब विदेशी फंडिंग को लेकर BJP सरकार को घेर रही: NGOs की अवैध फंडिंग रोकने पर क्यों मचा बवाल?”, ऑपइंडिया, अगस्त 09, 2026
“कान्ग्रेस पार्टी इन दिनों मोदी सरकार पर विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम यानी FCRA के गलत इस्तेमाल का आरोप लगा रही है। कान्ग्रेस का कहना है कि सरकार FCRA के जरिए नागरिक समाज समूहों और गैर-सरकारी संगठनों (NGOs) पर दबाव बना रही है और राजनीतिक असहमति को रोकने की कोशिश कर रही है।
हालाँकि, FCRA का इतिहास काफी पुराना है। यह कानून पहली बार 1976 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी की सरकार के दौरान लाया गया था। इसके बाद राजीव गाँधी सरकार ने 1980 के दशक में इसमें बड़े बदलाव किए। 2010 में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली UPA सरकार ने नया FCRA कानून लागू किया, जिसने NGOs के विदेशी फंड पर निगरानी और सरकारी नियंत्रण को और बढ़ाया।
इंदिरा गाँधी के समय आया FCRA
FCRA की शुरुआत 1976 में हुई थी। उस समय देश में प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी के नेतृत्व में आपातकाल लगा हुआ था। नागरिक स्वतंत्रताएं सीमित थीं, विपक्षी नेताओं को MISA यानी आंतरिक सुरक्षा रखरखाव अधिनियम के तहत जेल में रखा गया था और प्रेस पर भी कड़े प्रतिबंध थे…….”
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