देश-भक्ति और मजहब को एक करके चलने में  होने वाली कठिनाई को समझें !!

सनातन धर्म की व्याख्या करते हुए , बाबासहाब अंबेडकर कहते हैं : ‘ब्रह्मवाद के तीन महावाक्य है ; एक , ब्रह्म सर्वत्र व्याप्त है ; दो, इसलिये मैं ब्रह्म ही हूँ; तीन, इसलिए आप भी ब्रह्म हैं। ये सब एक जीविता अथार्थ समता व स्वतंत्रता के तत्व हैं। सनातन धर्म अन्य आस्थाओं से कई गुना समता का पोषक है। सब ईश्वर के रूप हैं, यह इस महान धर्म का ओजस तत्व है।’

पर अन्य आस्थाओं में इसके ठीक विपरीत प्रसंग देखने को मिलते रहे है। भोपाल शहर के टीआईटी कॉलेज में घटी अजमेर-कांड की तरह सामूहिक ‘लव-जिहाद’ की घटना को लेकर हुई गिरफ़्तारी में एक पढ़े-लिखे मुसलमान युवा अभियुक्त ने अपने बयान में बेझिझक कह दिया कि उसने तो ‘सवाब’ का काम किया है। एक सनातनी बौद्ध, जैन, सिख या हिन्दू को आश्चर्य हो सकता है, कि भला ये कौन सी बात हुई ?

तो चलिए देखें , अपनी रचना ‘जिहाद’ में मुशी प्रेमचंद के द्वारा सर्जित पात्र क्या कहता पाया गया है- ‘ एक काफिर के दिल को इस्लाम के उजाले से रोशन कर देने का सवाब सारी उम्र के रोज़े,नमाज़ और ज़कात से कहीं ज्यादा हैं. और इतनी ज्यादा कि इस लोक के सारे सुख तो मिलेंगे ही, ज़न्नत नसीब होने पर हूरें तेरी बालाएं लेंगी. फ़रिश्ते तेरे कदमों की ख़ाक अपने माथे पर मलेंगे.’

एक हिन्दू को फिर भी ये बात समझ पाने में यदि उसकी ‘सेकुलर’ मानसिकता उस को रोकती है, तो राष्ट्र कवि रामधारी सिंह दिनकर अपनी किताब ‘संस्कृति के चार अध्याय’ (जिसकी प्रस्तावना जवाहरलाल नेहरु नें लिखी है ) में क्या लिखते हैं, ये देख लें : “एक मुसलमान के लिए इस सम्भावना को कबूल कर पाना कठिन है कि दुनिया के अन्य धर्म इस्लाम की छाया भी छू सकते हैं. इस्लाम प्रभावित होने से डरता है क्यूंकि संशोधित, प्रभावित अथवा सुधरा हुआ इस्लाम, इस्लाम नहीं.

अपने को सच्चा मुसलमान कहने वालों के साथ कठिनाई ये है कि ज़माने से उन्हें ये सीखाया गया है कि जिस देश पर मुसलमानों का राज्य नहीं, वह देश दारुल-हरब यानी ‘शत्रुओं का देश’ समझा जाना चाहिए. अतएव देश-भक्ति और धर्म-भक्ति को एक करके चलने में उन्हें कठिनाई होती. ’’

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Rajesh Pathak
Rajesh Pathak
Writing articles for the last 25 years. Hitvada, Free Press Journal, Organiser, Hans India, Central Chronicle, Uday India, Swadesh, Navbharat and now HinduPost are the news outlets where my articles have been published.

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