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Thursday, October 6, 2022

“लीसेस्टर जल रहा है और हिंदू अपनी जान बचाने को भाग रहे हैं”, जानिये यूनाइटेड किंगडम में हो रही हिंदू-विरोधी हिंसा के घटनाक्रम को

यूनाइटेड किंगडम में पिछले 24 घंटों में हिंदू व मुस्लिमों के समूहों के बीच सड़क पर भीषण संघर्ष सामने आया है। लंदन के उत्तर पश्चिमी क्षेत्र में लीसेस्टर में बड़े स्तर पर हिंदुओं पर आक्रमण किये गए हैं, उनके परिसरों व धार्मिक प्रतीकों को हानि पहुचायी गयी है। 4 सितंबर, 5 सितंबर और 6 सितंबर की लगातार 3 रातों में हिंदुओं के विरुद्ध हजारों कट्टरपंथी इस्लामवादियों द्वारा उत्पात मचाने के बाद, अब इन इस्लामवादियों द्वारा हिंदुओं के विरुद्ध फर्जी मामले भी दर्ज किए जा रहे हैं, सोशल मीडिया पर हिन्दुओ के प्रति अफवाहें फैलाई जा रही हैं और इसमें अंतराष्ट्रीय गठजोड़ भी इनका सहयोग कर रहा है।

ऐसा माना जाता है कि 28 अगस्त को भारत-पाकिस्तान के बीच मैच के दौरान दोनों समूहों के बीच काफी तनाव पैदा हो गया था, जिसके बाद पूरे ही यूनाइटेड किंगडम में इस प्रकार की घटनाएं हो रही हैं। सोशल मीडिया की रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि इस सप्ताह दोनों पक्षों में तनाव और गंभीर हो गया जब एक विरोध मार्च निकाला गया। दोनों पक्षों के अलग-अलग विरोध मार्च को पुलिस ने रोकने की कोशिश की तो बवाल हो गया। सोशल मीडिया पर पोस्ट्स में कई जगह कांच की बोतलें फेंकते हुए दिखाया गया है तो कहीं लाठी-डंडों के साथ लोगों को देखा गया है।

भारत सरकार ने किया हिंसक हमलों का विरोध

यूनाइटेड किंगडम के लीसेस्टर में भारतीय समुदाय के खिलाफ की गई हिंसा और हिंदू धर्म के प्रतीकों की तोड़फोड़ की भारत ने निंदा की है। भारतीय उच्चायोग ने इन घटनाओं की निंदा करते हुए कहा है कि उन्होंने यूनाइटेड किंगडम के उच्चाधिकारियों के साथ इस मामले को उठाया है, और इन हमलों में लिप्त लोगों के विरुद्ध कार्रवाई के लिए भी कहा गया है। भारतीय समुदाय के खिलाफ किसी प्रकार की हिंसा को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और इसे उचित मंच पर उठाया जाएगा।

लीसेस्टर में सबसे ज्यादा तनाव क्यों?

लीसेस्टर ब्रिटेन में हिंदू समुदाय का गढ़ है, जो 70 से अधिक वर्षों से वहां फला-फूला है। लीसेस्टर यूरोप में दूसरी सबसे अधिक हिंदू आबादी वाला क्षेत्र है। यहाँ भारत के बाहर सबसे बड़ा दिवाली उत्सव मनाया जाता है, और कई दशकों से ब्रिटिश हिंदू समुदाय यहाँ शांतिपूर्ण तरीके से रह रहा है। लीसेस्टर के बारे में अधिक जानने के लिए हमे वहां के जनसांख्यिकी आंकड़ें भी समझने पड़ेंगे। पिछली जनगणना के अनुसार यह आंकड़ें हैं।
ईसाई: 181,882 (32.4%)
मुस्लिम: 104,413 (18.6%)
हिंदू: 85.327 (15.2%)
सिख: 24,700 (4,4%)
बौद्ध: 2 245 (0.40)
यहूदी: 561 (0.1%)

वहीं अगर लीसेस्टर की राजनीतिक संरचना को देखा जाए, तो हमे यह आंकड़ा दिखाई देता है।
लेबर : 50
स्वतंत्र : 2
लिबरल डेमोक्रेट्स : 1
रूढ़िवादी : 1

अब हम आपको इस पूरे घटनाक्रम के बारे में बताने जा रहे हैं, कि कैसे एक हिन्दू बहुल और शांत रहने वाला क्षेत्र एकाएक अशांत हो गया है।

रविवार 28 अगस्त 2022

एशिया कप क्रिकेट मैच में पाकिस्तान पर भारत की जीत के बाद लीसेस्टर की सड़कों पर सभी धार्मिक पृष्ठभूमि के भारतीय क्रिकेट प्रेमियों ने खुशियाँ मनाई। पुलिस की उपस्थिति भी इन क्षेत्रों में कम होती है, क्योंकि यहाँ कभी मजहबी हिंसक घटनाएं नहीं होती थी । भारतीय प्रशंसकों ने कई तरह के नारे लगाए, जो किसी भी प्रकार से आक्रामक नहीं थे।

तभी एक जिहादी अपमानजनक व्यवहार करते हुए एक भारतीय के हाथों से भारत का ध्वज छीन लेता है। बदले में भारतीय क्रिकेट प्रशंसकों ने उसे फटकार लगाई और ऐसा ना करने को कहा। इसी बीच कुछ भारतीय क्रिकेट प्रशंसकों ने ‘पाकिस्तान मुर्दाबाद‘ के नारे लगाए थे । यह एक देश के विरुद्ध नारा था, जिसमे इस्लाम या मुसलमानों के विरुद्ध कुछ भी नहीं था, और यह नारा लगाने वाले भारतीय भी सभी धार्मिक पृष्ठभूमि के लोग थे।

अगले दिन, सनी हुंडल (वामपंथी पत्रकार एवं द इंडिपेंडेंट के पूर्व डिप्टी एडिटर), गुज़ खान (कॉमेडियन और अभिनेता), और सोशल मीडिया पर कई इस्लामिक तत्वों ने भारतीय क्रिकेट प्रशंसकों को अस्तित्वहीन हिंदू चरमपंथी बताया और उनके व्यवहार की आलोचना की। सोशल मीडिया पर मुस्लिमों द्वारा इस घटना के बदले में हिंसा करने की चेतावनी भी दी गई। जबकि हिन्दुओं ने मुसलमानों या इस्लाम के विरुद्ध कुछ भी नहीं बोला, लेकिन यह झूठी कहानी जंगल की आग की तरह फैलती गयी।

पुलिस (मुख्य निरीक्षक पॉल एलन) द्वारा लीसेस्टर काउंसिल ऑफ फेथ्स को 31 अगस्त को भेजे गए एक ईमेल में कहा गया था कि हिन्दुओं ने मुसलमानों की मौत का आह्वान करते हुए कई आपत्तिजनक नारे लगाए गए थे। हालांकि घटनस्थल पर जांचे गए साक्ष्य, सीसीटीवी और मोबाइल द्वारा बनाये गए वीडियो से यह सिद्ध हो चुका है कि इस प्रकार का कोई भी नारा या धमकी नहीं दी गयी थी। यह एक झूठा वक्तव्य था, जिसने कट्टरपंथी इस्लामवादियों को हिन्दुओ के विरुद्ध हिंसा भड़काने के लिए एक बहाना दे दिया।

गुरुवार 1 सितंबर 2022

1 सितंबर को, मुख्य निरीक्षक पॉल एलन ने एक स्पष्टीकरण ईमेल भेजा जिसमें उन्होंने बताया कि उनकी जांच के पश्चात ऐसा कोई साक्ष्य नहीं मिला है कि भारतीय समूह ने मुसलमानों या इस्लाम के विरुद्ध कोई भी नारे लगाए हैं। इस ईमेल में पुलिस द्वारा दिए गए स्पष्टीकरण को व्यापक रूप से जनता के साथ साझा करने की अपील की गयी थी। हालांकि इसे प्रचारित नहीं किया गया, जिसने हिंदुओं के प्रति अनुचित गुस्सा पैदा किया और हिंसा को और भड़काया।

क्लाउडिया वेब लीसेस्टर ईस्ट से संसद सदस्य हैं। लीसेस्टर ईस्ट उनका निर्वाचन क्षेत्र है, यहीं हिंदू समुदाय के विरुद्ध हिंसा हुई थी। वह भारत विरोधी गतिविधियों के लिए जानी जाती हैं, वह पूर्ण में लेबर पार्टी से सम्बद्ध थीं, जहां से उन्हें अक्टूबर 2021 में उत्पीड़न के आपराधिक दोषी ठहराए जाने के पश्चात निष्कासित कर दिया गया था। 1 सितंबर को, क्लाउडिया ने पुलिस मुख्यालय को एक पत्र लिखा, जिसमें उन्होंने फेडरेशन ऑफ मुस्लिम संगठनों के लिए अपने समर्थन की घोषणा की।

यह पत्र क्रिकेट प्रशंसकों के बीच झड़प के तीन दिन बाद जारी किया गया था, उन्होंने इसे सोशल मीडिया के जरिए प्रचारित किया है।इसमें उन्होंने हिंदू और मुसलमानों के बीच हुए टकराव को गलत तरीके से चित्रित किया था, और हिन्दुओं पर ही दोषारोपण किया था। हालांकि, हिंदू समुदाय के खिलाफ हिंसक हमलों को बढ़े हुए अब 10 दिन से अधिक समय हो गया है, और उन्होंने अभी तक हिंदू समुदाय के समर्थन में कोई टिप्पणी नहीं की है या यहां तक कि पीड़ितों के प्रति किसी भी प्रकार की सहानुभूति भी नहीं दिखाई है।

रविवार 4 सितंबर 2022

भारत और पाकिस्तान के बीच एक और एशिया कप क्रिकेट मैच हुआ, जिसमें पाकिस्तान ने भारत पर विजय प्राप्त की थी। इसके बाद खेल प्रशंसकों के बीच झड़प नहीं हुई, बल्कि हिंदू समुदाय को निशाना बनाकर की गई हिंसा हुई। हिंदू समुदाय इस रात गणेश चतुर्थी का त्योहार मना रहा था जब उन पर सैकड़ों कट्टरपंथी इस्लामियों ने हमला कर दिया था।

एक हिन्दू परिवार ने अपने घर के बाहर भगवा ध्वज लगा रखा था, परिवार घर में गणेश पूजा कर रहा था, वहीं महिलाएं अगले दिन पूजा के लिए माला बना रही थीं। घर के सामने का दरवाजा खुला छोड़ दिया गया था ताकि समुदाय के अन्य सदस्य दर्शन के लिए प्रवेश कर सकें।
तभी किसी ने उनके घर पर अंडे फेंक दिए, जो एक धार्मिक असंवेदनशीलता का विषय था, वह भी तब जब समस्त परिवार एक धार्मिक उत्सव मना रहा हो।

जब परिवार के कुछ सदस्य बाहर यह देखने गए कि अंडा किसने फेंका है, तब उन पर मुस्लिम युवकों के एक समूह ने हमला कर दिया।
एक जिहादी ने उन पर लंबे चाकू से हमला किया, यह तो सौभाग्य था कि किसी को चोट नहीं आयी। बताया गया कि हमलावरों द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले अंडों से भरी एक सफेद वैन थी, जिसे बाद में पुलिस ने उनके पहुंचने पर जब्त कर लिया था, लेकिन स्थानीय पुलिस की ओर से इस पर और कोई जानकारी नहीं मिली है।

सोमवार 5 सितंबर 2022

पिछले दिनों हुई घटनाओं के पश्चात सभी समुदाय के नेताओं और पुलिस द्वारा सभी से संयम रखने की अपील की गई थी। हिंदू समुदाय ने इसका पालन किया और अपने घरों के अंदर ही रहे, लेकिन कट्टर इस्लामिक युवा लीसेस्टर की सड़कों पर आ गए। ऐसा बताया गया कि यह आस पास के नगरों से लाये गए थे। ऐसे दर्जनों वीडियो उपलब्ध हैं जिन्हे लोगो ने सोशल मीडिया पर भी डाला, जिनमे पता लग रहा था कि यह लोग स्थानीय नहीं थे। यह मजहबी भीड़ हिंदू विरोधी और भारत विरोधी अपमानजनक नारे लगा रही थी, और साथ ही इन्होने इस्लामी नारेबाजी भी की। पुलिस ने ५ सितम्बर को हुई घटनाओं के संबंध में बर्मिंघम से दो लोगों की गिरफ्तारी की पुष्टि की।

मंगलवार 6 सितंबर 2022

इस दिन भी लीसेस्टर की सड़कों पर पुलिस की उपस्थिति थी, लेकिन फिर भी सैकड़ों मुसलमान सड़कों पर हिंसक व्यवहार कर रहे थे, वहीं हिंदू समुदाय डर के मारे अपने अपने घरों में छुपा हुआ था। इस दिन लगभग पचास घटनाएं हुईं, जिनमें हिन्दुओं के घरों, खिड़कियों और कारों को नुकसान पहुंचाना और निवासियों को धमकी देना और डराना सम्मिलित है।

इस इस्लामिक भीड़ ने हिन्दुओं के घरों पर लगे धार्मिक प्रतीकों और मूर्तियों पर हमले किये, और कई घरों के प्रवेश द्वारों को भी हानि पहुंचाई।
यह शांतिपूर्ण हिंदुओं पर मुस्लिम चरमपंथियों का हमला था, जिसमे उन्होंने हिंदू विरोधी और भारत विरोधी अपशब्द बोलने के साथ-साथ इस्लामी नारे भी लगाए।

स्थानीय लोगों के अनुसार इस तरह की नस्लीय हिंसा ब्रिटेन में पहले कभी नहीं हुई, और इस प्रकार से मजहबी गुटों द्वारा सामाजिक ताने-बाने को तोड़ने का प्रयास नहीं किया गया था। जहाँ एक तरफ हिन्दुओं ने अपने धार्मिक नेताओं और स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का पालन किया और अपने घरों में ही रहे, यह बात मुसलम समुदाय के बारे में नहीं कही जा सकती। ऐसा माना जा रहा है कि उन्होंने स्थनीय प्रशासन के निर्देशों की अनदेखी की और मजहबी नेताओं के कहेनुसार उपद्रव किया।

बुधवार 15 सितंबर 2022

ईस्ट लीसेस्टर में इस दिन दो हिंसक घटनाएं हुई थी। पहली घटना प्रॉस्पेक्ट हिल, लीसेस्टर में एक 22 वर्षीय व्यक्ति के साथ हुई, जिस पर दो संदिग्धों ने हमला किया। वह युवक अपनी कार में था जब उस पर हमला हुआ, उसने कोई भी उकसावे की कार्यवाही नहीं की थी, लेकिन इन दोनों व्यक्तियों ने उस पर हमला कर दिया, क्योंकि वह एक हिन्दू था।

वहीं दूसरी घटना कोरल स्ट्रीट पर शाम को लगभग पांच बजे हुई, जब कुछ हिन्दू युवकों पर संदिग्ध लोगो ने हमला किया। उपलब्ध सीसीटीवी फुटेज से पता चलता है कि पैदल चल रहे हिन्दू युवकों के समूह को रोका गया और कार में बैठे लोगों ने उन पर हिंसक हमला किया। सौभाग्य की बात थी कि इस घटना में कोई घायल नहीं हुआ।

सामुदायिक बैठकें और झूठी कथा बनाने का प्रयास

स्थानीय प्रशासन ने विभिन्न सामुदायिक नेताओं के साथ मिलकर शांति वार्ता का आयोजन किया और इसमें सभी धर्म और मजहब के नेताओं से भाग लेने का अनुरोध किया था। इनमें से एक बैठक के दौरान एक मस्जिद के इमाम ने कहा कि हिंदू समुदाय पिछले चालीस से पचास वर्षों से लीसेस्टर में बिना किसी समस्या के रह रहा है। लेकिन फिर उसने भारत के दमन-दीव क्षेत्र से आये हिन्दुओं को “अशिक्षित” बता कर उन्हें समस्या की जड़ के रूप में चित्रित किया। मजहबी नेताओं ने पुलिस अधिकारियों को बताया कि भारतीय हिन्दुओं में आयी उग्रता का कारण है भारत में बदलता हुआ राजनीतिक परिदृश्य।

हालांकि इन दावों को सही बताने के लिए कोई भी प्रत्यक्ष साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया। एक अन्य मुस्लिम प्रतिनिधि ने सवाल उठाया कि घरों पर ‘नारंगी आरएसएस के झंडे’ क्यों थे, जबकि वह भगवा ध्वज थे जो एक प्राचीन हिंदू प्रतीक है जिसका उपयोग पूरे हिंदू समुदाय द्वारा किया जाता है। यह भगवा ध्वज देश और दुनिया भर में हिंदू मंदिरों और सामुदायिक केंद्रों पर प्रदर्शित किया जाता है। यह सीधा सीधा प्रयास है हिंदू समुदाय को नीचे दिखाने का, उनके धार्मिक चिन्हों पर हमला करने का।

यह भारत में राजनीति से प्रभावित हिंदू चरमपंथ के अस्तित्व की झूठी कहानी गढ़कर मजहबी भीड़ से हटा कर पीड़ितों और हिंदू समुदाय पर दोष स्थानांतरित करने का एक स्पष्ट प्रयास था। इनमें से किसी भी वक्तव्य में कोई दम नहीं था, बल्कि यह एक नस्लवादी हमला था हिंदुत्व को मानने वालों पर और उनके धर्म को ही यहाँ दोष दिया जा रहा है।

इन घटनाओं का हिन्दुओं पर पड़ रहा है नकारात्मक प्रभाव

लगातार तीन रातों से हो रहे इस्लामिक उपद्रव के बाद पूरे क्षेत्र के हिंदू दहशत में हैं। प्रभावित क्षेत्र के हिंदु पिछले सप्ताह के पश्चात अपने घरों से बाहर नहीं निकले हैं, और उन्होंने अपने बच्चों को भी स्कूल व विश्वविद्यालय नहीं भेजा है। स्थानीय हिंदुओं ने अपने घरों के सामने से ओम प्रतीकों और ‘शुभ लाभ’ शब्दों को हटा दिया है। वहीं देवी मां के भक्तों ने अपनी खिड़कियों और कारों में प्रदर्शित किसी भी चित्र को हटा दिया है ताकि लक्षित हमलों की पुनरावृत्ति से बचा जा सके।

लीसेस्टर में पिछले कुछ वर्षों में ऐसी मजहबी हिंसा की घटनाएं होनी शुरू हो गयी हैं। जुलाई 2017 में कट्टरपंथी इस्लामवादियों ने भारतीय झंडा लिए एक हिंदू व्यक्ति को उसकी मोटरसाइकिल से धक्का दे दिया था, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया था। तब पुलिस ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की थी, इस कारण कट्टर जिहादियों को बल मिला है, और अब इन घटनाओं की संख्या बढ़ती ही जा रही है।

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