“लव जिहाद को बरेली कोर्ट ने बताया था अंतरराष्ट्रीय साजिश, मुस्लिम शख्स समुदाय के खिलाफ बताते हुए पहुँचा सुप्रीम कोर्ट: शीर्ष न्यायालय बोला- तथ्यों पर आधारित है टिप्पणी, सनसनीखेज मत बनाइए”, ऑपइंडिया, जनवरी 03, 2024
“सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार (2 जनवरी) को बरेली कोर्ट की टिप्पणियों को ‘सनसनीखेज’ बनाने का प्रयास करने के लिए एक व्यक्ति को फटकार लगाई। दरअसल, बरेली कोर्ट ने मोहम्मद आलिम (या अलीम) नामक व्यक्ति को लव जिहाद मामले में दोषी ठहराते हुए पाकिस्तान और बांग्लादेश शैली के धर्मांतरण को लेकर चेतावनी दी थी। कोर्ट के इन टिप्पणियों को हटाने के लिए अनस नामक शख्स ने जनहित याचिका दायर की थी।
अनस ने अधिवक्ता मनस पी हमीद के माध्यम से दायर अपनी जनहित याचिका में कहा था कि बरेली कोर्ट द्वारा की गई टिप्पणियाँ मुस्लिम समुदाय के खिलाफ हैं। जस्टिस हृषिकेश रॉय और एसवीएन भट्टी की पीठ ने अनस की याचिका को खारिज कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि याचिका दायर करने वाला उस मामले में पक्षकार नहीं था और वह इस विषय को ‘सनसनीखेज’ बना रहा था।
अधिवक्ता हमीद ने भी माना कि उनका मुवक्किल उत्तर प्रदेश के संबंधित मामले में पक्षकार नहीं था। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए जस्टिस रॉय ने कहा, “आप एक व्यस्त व्यक्ति हैं… बस किसी ऐसी चीज़ में हस्तक्षेप कर रहे हैं, जो आपके लिए बिल्कुल भी काम की नहीं है। आप इस तरह के मामले के लिए अनुच्छेद 32 याचिका दायर नहीं कर सकते हैं…..”
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