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Friday, September 30, 2022

shethepeople ने फिर चली चाल: महिला को जबरन परिवार के सामने नहाने को विवश करने वाले मौलाना को बताया तांत्रिक, विरोध के बाद बदला शीर्षक! परन्तु क्या यही एकमात्र मामला है?

महिलाओं के लिए कथित रूप से काम करने का दावा करने वाले पोर्टल शीदपीपल की मालकिन ने जिस दिन भारतीय जनता पार्टी सरकार के मंत्री से भेंट की, उसके आसपास भी उनका पोर्टल हिन्दुओं के विरुद्ध जहर ही फैलाता हुआ दिखा था। वैसे तो कहने के लिए महिलाओं का चैनल है, महिलाओं का पोर्टल है, परन्तु उसमें जो ओपिनियन पीस प्रकाशित होते हैं, उनमें  कई लेखों में काफी सीमा तक हिन्दू समाज के प्रति तिरस्कार की भावना या हिन्दुओं को हीन समझने की भावना होती है कि सहज ही किसी को तनिक भी विश्वास न हो। परन्तु जो है सो है, जो दिखता है, वही लिखा जाता है।

परन्तु यह बहुत ही विरोधाभासी है कि एक ओर हिन्दुओं के विरुद्ध अवधारणात्मक वैचारिक शैल चोपड़ा लडती हैं तो वहीं उसी सरकार के मंत्री को अपनी किताब उपहार में देनी है, जिसे वोट देने वाले समुदाय पर उनका पोर्टल सबसे ज्यादा उंगली उठाता है।

जब वह अपनी किताब तोहफे में दे रही थीं, तब भी वह अपना एजेंडा चला रही थीं और वह एजेंडा था हिन्दुओं को बदनाम करने का। हिन्दुओं के शब्द तांत्रिक को मौलाना के किए गए अपराध के लिए दोषी ठहराना!

उस पोर्टल पर एक समाचार का शीर्षक था कि “पुणे में एक तांत्रिक ने एक महिला को खुले में स्नान करने के लिए बाध्य किया, जिससे उसके बेटा हो सके!”

जबकि उसके भीतर लिखा था कि मौलाना बाबा जामदार को पुलिस ने हिरासत में लिया गया।

हालांकि ऐसा ही कई और मीडिया हाउसेस ने किया, जैसे zee news आदि ने

रिपोर्ट के अनुसार घटना यह थी कि महिला का पति और ससुराल वाले उसे आरोपी के पास ले गए, जिसने उस पर कुछ रस्में निभाईं। उन्होंने कहा कि उसे बेटा तभी हो सकता है जब महिला अपने पति, ससुराल वालों और खुद के सामने बिना कपड़ों के रायगढ़ में एक झरने के नीचे स्नान कर ले।”

परिवार रायगढ़ गया और उसने वह रस्म पूरी की, जिसके बाद पीड़िता को लगा कि यह सही नहीं है। उसने भारती विद्यापीठ पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज की, और उसके परिवार के सदस्यों और मौलाना सहित उसके चार लोगों पर “अंधविश्वास विरोधी अधिनियम, धारा 478 और जादू टोना अधिनियम, धोखाधड़ी, घरेलू हिंसा और मानव बलि के तहत मामला दर्ज किया गया। “

मगर शीदपीपल ने बहुत आसानी से इसे तांत्रिक कर दिया, मगर नेट के यूजर्स ने इस चालबाजी को समझ लिया और फिर इस छल से भरी रिपोर्टिंग का विरोध करना शुरू कर दिया तो उन्हें अपनी खबर में परिवर्तन करना पड़ा। वैसे भी शीदपीपल में कई बार हिन्दू घृणा या हिन्दुओं के प्रति हिकारत का भाव दिखता है, तो ऐसे में यह शीर्षक ऐसा दिया था तो अचरज नहीं होना चाहिए।

जिस शीर्षक का विरोध हुआ

जिस मामले में तनिक भी हिन्दू मुस्लिम का संदेह नहीं था, उसमें हिन्दुओं को दोषी ठहराने का कार्य किया और झारखंड में अंकिता हत्याकांड में शाहरुख हंसता हुआ पुलिस के साथ जा रहा था, तो उसे पूरी तरह से पुरुषों के विरुद्ध मामला बना दिया कि आदमियों में डर नहीं शेष रहा है जो एक महिला को जलाने वाला आदमी इस तरह हँसते हुए जा रहा है? परन्तु शीदपीपल को शाहरुख का नाम शीर्षक में बताने में क्या समस्या है?

अंकिता वाले समाचार की दो तीन बार रिपोर्टिंग इस पोर्टल ने की है, परन्तु एक बार भी शाहरुख़ का नाम शीर्षक में नहीं है, अंकिता का नाम एक समाचार में शीर्षक में है, और जब अब यह पता लग गया है कि अंकिता की उम्र 15 से 16 वर्ष के बीच की थी, तो भी “महिलाओं के लिए काम करने वाला पोर्टल” शीदपीपल अंकिता की उम्र 19 वर्ष क्यों बता रहा है? हालांकि एक खबर में इन्होनें यह अवश्य लिखा है कि मृतका की उम्र बाल कल्याण के अनुसार 16 वर्ष है, परन्तु उन्होंने पहले के समाचारों में सम्पादन नहीं किया है, जिससे पर्याप्त भ्रम उत्पन्न हो रहा है कि अंकिता की उम्र कितनी थी? क्या महिलाओं के लिए कार्य करने वाले पोर्टल्स को एक लड़की के प्रति इतना असंवेदनशील होना चाहिए? या फिर उनका एजेंडा कुछ और है? कई बार प्रश्न उठता है, जब दूसरी खबर आ गयी है, और POSCO एक्ट में एफआईआर दर्ज हो गयी है, तो क्या इन समाचारों को सम्पादित नहीं करना चाहिए?

https://www.shethepeople.tv/news/jharkhand-woman-burnt-alive/
https://www.shethepeople.tv/news/jharkhand-girl-burnt-alive-pocso-act/

जब यह साफ़ होता जा रहा है कि नूर मुस्तफा ने जानबूझकर अंकिता की उम्र 19 वर्ष की थी तब भी शीदपीपल पर अंकिता की उम्र 19 वर्ष क्यों दिखाई जा रही है? क्या यह पोर्टल झारखंड में अंकिता को जलाने वाले शाहरुख के साथ खड़ा है? यदि नहीं तो अब तक पुराने समाचारों में आवश्यक सम्पादन क्यों नहीं किया गया?

यद्यपि शीदपीपल द्वारा किए गए छल न ही नए हैं और न ही ऐसा है कि इस पोर्टल ने नया कुछ किया है, यह बार बार ऐसा करते हैं, परन्तु अंकिता के मामले में इस सीमा तक असंवेदनशीलता देखकर हैरानी हो रही है क्योंकि यह पोर्टल महिलाओं के लिए काम करने का दावा करता है? परन्तु ऐसा लगता है कि यह कहीं न कहीं पोर्टल छद्म धर्मनिरपेक्षता अर्थात मात्र हिन्दुओं को ही निशाना बनाने काअड्डा मात्र तो नहीं है! ऐसा कई यूजर्स भी प्रश्न करते हैं!

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1 COMMENT

  1. यहा प्रत्येक हिन्दुने ध्यान रखना चाहिए कि मुसलमान कुरान के काफिर विरोधी आदेश पालन करना अत्यंत आवश्यक है !! इसलिए भाईचारे के नाटक पर विश्वास रखना मूर्खता है !! हर हर महादेव !!

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