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Monday, June 27, 2022

पाकिस्तान में पेशावर में शिया मस्जिद में फिदायीन विस्फोट: कई मरे सैकड़ों घायल

भारत में आईएएस अधिकारियों की कुछ कोचिंग संस्थाएं एवं कथित सेक्युलर किताबों में जो इतने जतन से झूठ पढ़ाया जाता है, वह व्यवहार में आकर मुस्लिम समुदाय की कुछ हरकतों से खुल जाता है। अभी हाल ही में विजन आईएएस में एक शिक्षिका यह कह रही थीं कि भक्ति आन्दोलन इसलिए हिन्दुओं में आरम्भ हुआ क्योंकि मुस्लिम लिबरल थे और उसके साथ ही मुस्लिमों में भेदभाव नहीं था।

खैर, पाकिस्तान में दिनांक 4 मार्च 2022 को जो बम विस्फोट हुआ, वह भारत के कट्टरपंथी मुस्लिमों द्वारा फैलाए जा रहे इस झूठ को एकदम तार तार कर देता है। यह विस्फोट शिया मस्जिद में हुआ और इसे पाकिस्तान में शियाजेनोसाइड कहा जा रहा है। अर्थात इसका अर्थ है कि शियाओं का नरसंहार! एक व्लोगर सादिया अहमद ने इस हमले को शियानस्लकुशी का नाम दिया। नस्लकुशी से कुछ पाठकों को याद आया? कुछ कौंधा दिमाग में? क्या कौंधा? एक पर्वत का नाम! जिसका नाम है हिन्दुकुश! अर्थात हिन्दुओं को इस प्रकार मारना कि वह समूल नष्ट हो जाएं, परन्तु फिर भी हिन्दू चेतना के साथ आगे बढ़ रहे हैं और जिन्हें अकादमिक रूप से भेदभाव रहित घोषित किया जा रहा है, वह परस्पर एक दूसरे को मार रहे हैं।

सदिया अहमद कहती हैं कि यह पूरी तरह से केवल और केवल शियाओं का जारी नरसंहार है

वह कह रही हैं कि जब भी वह यह कहती हैं कि यह शियाओं का नरसंहार हुआ है, तो उन्हें यह कहा जाता है कि ऐसा न कहा जाए क्योंकि मुल्क की नेशनल यूनिटी में असर आएगा? उनका कहना यह है कि जब तक आपके मुल्क में शिया, हिन्दू, मसीही, आदि सलामत नहीं रहेंगी तब तक आप खूब क्रिकेट मैच करा लें, अंग्रेजों से व्लोग बनवा लें, आप के मुल्क में यूनिटी नहीं आएगी।

इस पर ज़हरा हैदर ने शियाओं के नरसंहार पर एक डॉक्यूमेंट्री साझा की। जिसमें बताया गया है कि कैसे पाकिस्तान में शियाओं का कत्लेआम हो रहा है। और शियाओं को काफिर कहा जाता है।

एक यूजर ने लिखा कि यह बहुत ही भयानक है कि लोग मजहब के नाम पर उन्हीं को मार रहे हैं जो एक ही अल्लाह की इबादत करते हैं

शिया नरसंहार पर एक यूजर ने एक ऐसी बात कही, जिस पर अब वास्तव में सोचना चाहिए, विचार करना चाहिए। उसने लिखा कि

कल को कोई सुन्नी किसी शिया से किसी हिंदू को मारने के लिए साथ आने के लिए कहेगा तो शिया हाथ मिलाएंगे और यहीं पर समस्या है, इसे समझना होगा।

कोई हिन्दू नहीं बचा तो बस आप हो तो या तो सुन्नी बन जाएं या फिर ।।।!!

समस्या यही है कि जब पकिस्तान में हिन्दुओं को निशाना बनाया जा रहा था या अभी भी बनाया जाता है, या फिर भारत में जब हिन्दुओं के साथ कट्टर मुस्लिम जब मजहब के आधार पर गलत करते हैं तो शिया और सुन्नी लगभग एक ही धरातल पर होते हैं।

खैर, पाकिस्तान से जो वीडियो निकल कर आ रहे हैं। उनमें एक वीडियो में कहा गया है कि शिया मरा है, उसकी हिफाजत करना फर्ज है, क्योंकि वह जिम्मी बनकर हमारे मुल्क में रहते हैं, उनकी हिफाजत करना हमारा फर्ज है, पर उन्हें मुसलमान तो नहीं कह सकते न?

एक यूजर ने लिखा कि

वे फिलिस्तीन, सीरिया, कश्मीर और अन्य देशों के लिए झूठे आंसू बहाएंगे,  लेकिन अपने ही नागरिकों के उत्पीड़न पर आंखें मूंद लेंगे क्योंकि वे बहुसंख्यकों की तुलना में #इस्लाम की एक अलग परिभाषा का पालन करते हैं।

हालांकि पाकिस्तान की ओर से यह कहने का कुप्रयास किया गया, परन्तु जल्दी ही यह झूठ खुल गया और पता चला कि आईएसआईएस ने इस हमले की जिम्मेदारी ली है

मारने वाला भी इस्लाम को मानता है और मरने वाला भी इस्लाम को मानता है, परन्तु वह परस्पर एक दूसरे के भाई नहीं हैं। यह बहुत ही हैरान करने वाली बात इसलिए है क्योंकि जनमानस में यह तथ्य भीतर तक धंसा हुआ है कि सुन्नी और शिया, अहमदिया, और जुलाहा, पठान आदि आदि एक नहीं हैं। परन्तु भारत में जो लोग कथित इतिहास पढ़ाते हैं, वह झूठ पढ़ाते हैं, और जिसके हमले के मूल में ही भेदभाव की भावना है कि “काफ़िर को जीने का अधिकार नहीं है, काफिर को मुस्लिम नहीं माना जा सकता है और काफिर को जन्नत नहीं मिल सकती है” उसे वह समानता का मजहब बताते हुए हमारे बच्चों का दिमाग दूषित ही नहीं करते हैं, बल्कि वह शत्रुबोध भी समाप्त कर देते हैं।

और जो लोग हिन्दुओं को हिंसक बताते हैं और हिन्दुओं को पिछड़ा बताते हैं, वह वर्ग इस बात का उत्तर देने में विफल रहता है कि भाई चारे का मजहब जिसे वह बार बार बताते हैं, उसके आने के बाद ही और जहाँ पर वह मुख्य मजहब है, वहीं पर अशांति क्यों रहती है? अश्विनी उपध्याय ने इस विषय में कहा कि

राजा भरत के ननिहाल कैकेय(पेशावर) में पवित्र दिन पवित्र स्थान पर पवित्र कार्य के समय बहुत बड़ा धमाका

46 शांतिप्रिय निर्दोष लोगों की मौत हो गई और 50 लोग बुरी तरह घायल हैं

कैकेय में अब एक भी अगड़ा पिछड़ा दलित परिवार नहीं बचा है और संघ की शाखा भी नहीं है फिर यह बम धमाका किसने किया?

यह प्रश्न तो उन सभी से पूछा जाएगा कि जिन्हें आप भाईचारे का मजहब बताते हैं, उनके बीच जो विभिन्न फिरके हैं, उनके विषय में कौन बताएगा? जब आप हमारे बच्चों के मस्तिष्क में यह सब बातें डालते हैं तो उनके द्वारा की गयी हिंसा को कौन बताएगा?

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1 COMMENT

  1. What a horrendous attack indeed that has taken away lives of dozens, leaving more than a hundred in a flash! It’s a genocidal attack that points its finger to Sunnis!
    Religion should bring solace and peace. But what we actually see is a hate crime. As a result Muslims are killing the Muslims. Sunnis do not consider Shias as true Muslims. That being said can Sunnis deny right for survival to Shias? Can they deny Shias the right to pray in their mosques?
    Religion-based education is the main culprit. It teaches segregation, divsion of people, the superiority of one sect over the others. As the boys and girls are indoctrinated with such narrow, religious doctrines, they grow up to hate people of other sects and religions, commit violence, wage pogrom on other communities. What is needed is elimination of such kind teaching by science-based teaching & learning where reason and logic will hold sway over narrow religious ideologies.

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