केजीएमयू मतांतरण: एसटीएफ जांच में ‘स्लीपर मॉड्यूल’ का आरोप, नई महिला डॉक्टरों को फंसाने का जाल

सारांश: केजीएमयू मतांतरण मामले में एसटीएफ की जांच रिपोर्ट शासन को सौंपे जाने के बाद लखनऊ के किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय की साख को गहरा धक्का लगा है। सूत्रों के मुताबिक रमीजुद्दीन का गिरोह दूर-दराज के जिलों और अन्य राज्यों से आने वाली नई महिला डाक्टरों पर नजर रखता था, उनकी रेकी कर समस्याएं सुलझाकर सहानुभूति जीतता था और झूठे प्रेमजाल में फंसाकर मतांतरण का दबाव बनाता था। एक अधिकारी के हवाले से बताया गया है कि एसटीएफ जांच में पैथोलाजी, माइक्रोबायोलाजी, रेडियोलाजी और गांधी वार्ड जैसे विभागों में तैनात आया, नर्स, वार्ड ब्वाय और पार्किंग कर्मचारी तक इस सिंडिकेट के ‘स्लीपर माड्यूल’ की तरह काम करते मिले। जागरण की रिपोर्ट के अनुसार, खुलासे के बाद परिसर में डाक्टर से लेकर वार्ड ब्वाय तक इस मसले पर चुप्पी साधे हैं।

क्यों अहम है: यह एक व्यक्ति का मामला नहीं, देश के एक बड़े चिकित्सा संस्थान के भीतर बुना गया तंत्र है, जो बाहर से आई नई छात्राओं को निशाना बनाता था। केजीएमयू, भोपाल के कॉलेज, बिजयनगर के स्कूल और टीसीएस जैसी कंपनियों तक, ग्रूमिंग व मतांतरण गिरोहों के मामले एक के बाद एक सामने आ रहे हैं। भारतीय मुस्लिम समाज आत्मचिंतन कब करेगा? और हिंदू समाज को उसकी सामाजिक बुराइयों पर उपदेश देते न थकने वाला वामपंथी-उदारवादी अभिजात वर्ग इस कट्टरता को भीतर से मिटाने की मांग कब उठाएगा?

स्रोत: “KGMU में ‘द केरल स्टोरी’ की तर्ज पर स्लीपर मॉड्यूल: सहानुभूति के जाल में फंसाकर महिला डॉक्टरों के मतांतरण की साजिश”, जागरण, 31 अक्टूबर 2026।

शहर के सबसे प्रतिष्ठित किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू) में मतांतरण और उत्पीड़न के संगठित गिरोह के खुलासे के बाद खलबली मची है। एसटीएफ द्वारा शासन को सौंपी गई जांच रिपोर्ट के बाद संस्थान की साख पर गहरा धक्का लगा है।

हालांकि, इस पूरे मामले के उजागर होने के बाद विश्वविद्यालय परिसर में एक अजीब सी खामोशी पसरी है। शनिवार को परिसर का जायजा लिया गया तो मरीजों और तीमारदारों की चहल-पहल तो दिखी, लेकिन डाक्टर, नर्स से लेकर वार्ड ब्वाय तक इस संवेदनशील मसले पर चुप्पी साधे हैं।

सूत्रों के मुताबिक, फिल्म ‘द केरल स्टोरी’ की स्क्रिप्ट की भांति ही केजीएमयू में भी पढ़ाई करने आने वाली नई महिला डाक्टर पर रमीजुद्दीन के गिरोह की पैनी निगाह रहती थी। दूर-दराज के जिलों व अन्य राज्यों से आने वाली नवोदित छात्राओं को सहानुभूति और झूठे प्रेमजाल में फंसाकर मतांतरण का दबाव बनाने का घिनौना खेल खेला जा रहा था।

पूरा लेख जागरण पर पढ़ें →

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