सारांश: छत्तीसगढ़ के कवर्धा जिले के पंडरिया विकासखंड में कुई-कुकदूर वनांचल के 18 गांवों के ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि इलाके में 40 से अधिक जगहों पर अवैध चर्च और प्रार्थना सभाएं चल रही हैं और चर्च बनाने के लिए सरकारी भूमि पर कब्जा किया जा रहा है। मंगलवार को कलेक्टर तूलिका प्रजापति को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर उन्होंने कहा कि गरीब, अशिक्षित परिवारों को बहलाकर और प्रलोभन देकर उनकी मूल परंपराओं से दूर किया जा रहा है, और बैगा व जनजातीय समाज की पारंपरिक पहचान को लेकर चिंता जताई। ग्रामीण शिक्षक, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, स्वास्थ्य कर्मचारी और कोटवार समेत शामिल सरकारी और गैर-सरकारी लोगों के नामों की सूची भी लाए थे। उन्होंने जांच की मांग की और कार्रवाई न होने पर आंदोलन की चेतावनी दी है।
क्यों अहम है: गरीब ग्रामीणों और बैगा जनजातीय समुदाय की अपनी परंपरा और पहचान बचाने की यह लड़ाई स्वघोषित उदारवादी एक्टिविस्टों के लिए अहम होनी चाहिए थी, पर ऐसा नहीं है। अंग्रेज़ी अख़बारों में ऐसी ख़बरें न के बराबर दिखती हैं। अवैध ईसाई मतांतरण गिरोहों में शिक्षक और स्वास्थ्य कार्यकर्ता जैसे सरकारी कर्मचारियों, जिन पर गांव भरोसा करते हैं, की संलिप्तता के गंभीर आरोप भी सामने आ रहे हैं। अब परीक्षा प्रशासन की है: क्या सरकारी ज़मीन पर कब्ज़ों और नामित कर्मचारियों की जांच होगी, या यह ज्ञापन फाइलों में दबा रह जाएगा?
स्रोत: “छत्तीसगढ़: 40 अवैध चर्चों के खिलाफ 18 गांवों के लोगों ने खोला मोर्चा, कलेक्ट्रेट में सौंपा ज्ञापन”, जागरण, 3 नवंबर 2026।
छत्तीसगढ़ के कवर्धा जिले के पंडरिया विकासखंड में कुई-कुकदूर वनांचल क्षेत्र के ग्रामीणों ने क्षेत्र में चल रहे मतांतरण में सरकारी शिक्षक से लेकर मितानिनों (ग्रामीण स्वास्थ्य कार्यकर्ता) तक की संलिप्तता का आरोप लगाया।
18 गांवों के ग्रामीणों ने क्षेत्र में 40 से अधिक स्थानों पर अवैध चर्च व प्रार्थना सभाओं के संचालित होने की बातें कही। आरोप है कि चर्च बनाने के लिए सरकारी भूमि पर कब्जा किया जा रहा है। ग्रामीणों ने बैगा और आदिवासी समाज की पारंपरिक पहचान को लेकर अपनी चिंता से भी अधिकारियों को अवगत कराया।
मंगलवार को 18 गांवों के ग्रामीण कलेक्ट्रेट पहुंचे। यहां इन्होंने कलेक्टर तूलिका प्रजापति को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन देकर आरोप लगाया कि आर्थिक रूप से कमजोर, अशिक्षित और भोले-भाले परिवारों को बहला-फुसलाकर तथा प्रलोभन देकर उनके मूल धर्म और परंपराओं से दूर किया जा रहा है।
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