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Sunday, May 29, 2022

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान इस्लामोफोबिया पर भाषण दे रहे हैं, उधर हिन्दू लडकियां पाकिस्तान में मारी जा रही हैं

पाकिस्तान में प्रधानमंत्री इन दिनों इस्लामोफोबिया पर बहुत बात कर रहे हैं। आज ही उन्होंने पश्चिमी जगत के इस्लामोफोबिया पर बहुत ही भावुक भाषण दिया है। जिसमें उन्होंने अपील की है मदीना जैसा आधुनिक समाज होना चाहिए। ओआईसी के सदस्यों को उन्होंने बधाई दी कि उन सभी के सम्मिलित प्रयासों के चलते 15 मार्च को इस्लामोफोबिया से लड़ने के लिए दिन घोषित हुआ है। 15 मार्च इसलिए चुना गया क्योंकि इसी दिन न्यूजीलैंड में एक बंदूकधारी व्यक्ति ने मस्जिद में यह सोचकर हमला कर दिया था कि अधिकतर मुस्लिम आतंकी होते हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि यह कितने दुःख की बात है कि हम लोग इतने सारे हैं, फिर भी हम फिलिस्तीन और कश्मीर पर बात नहीं कर पाते हैं:

इमरान खान को इस्लामोफोबिया की इतनी चिंता है कि उन्हें यह कतई भी चिंता नहीं है कि उनके देश में हिन्दुओं के साथ क्या हो रहा है? मगर उससे भी मजे की बात यह है कि ओआईसी अर्थात मुस्लिम देशों के संगठन के सम्मेलन में चीन के विदेश मंत्री भी थे। यह वही चीन है जो अपने यहाँ के मुस्लिमों पर तरह तरह के अत्याचार करता है

मगर हाथों में हाथ डाले पाकिस्तान के शाह मुहम्मद कुरैशी चीन के विदेश मंत्री से एक मुस्लिम नेता होने के नाते यह नहीं पूछ पाए कि चीन अपने क्षेत्र में उइगूर मुस्लिमों के साथ अत्याचार क्यों कर रहा है? क्यों चीन में मस्जिदों को ढहाया जा रहा है? चीन ने कहा कि वह विकास और प्रगति के लिए इस्लामिक देशों के साथ काम करना चाहता है, परन्तु उसके अपने देश में जो मुस्लिम हैं? उनका क्या?

ओआईसी में फिलिस्तीन पर बात हुई, कश्मीर पर बात हुई, और इन सभी पर बातें हुईं कि कैसे इस्लाम का नाम सही करना है, कैसे गलत छवि को सुधारना है, परन्तु इमरान खान यह नहीं बता पाए कि आखिर उनके अपने देश में अल्पसंख्यकों के साथ कैसा व्यवहार कर रहे हैं? क्यों आखिर हिन्दू लड़कियों के साथ दुर्व्यवहार थम नहीं रहा है? आज भी जब वह यह कह रहे थे कि कैसे इस्लामोफोबिया से लड़ना है, तो वहीं उसी समय pakistan में एक हिन्दू लड़की की हत्या को लेकर उबाल था।

पकिस्तान में कल एक अट्ठारह साल की हिन्दू लड़की पूजा ओड की हत्या तब उसका अपहरण करने वाले ने कर दी, जब वह उसका अपहरण करने में विफल रहा। पाकिस्तान में हिन्दुओं के अधिकारों के लिए लड़ने वाले कार्यकर्त्ता कपिल देव ने लिखा कि

अट्ठारह साल की हिन्दू लड़की पूजा ओड की हत्या तब उसका अपहरण करने वाले ने कर दी, जब वह उसका अपहरण करने में विफल रहा! आप अपने अल्पसंख्यकों के साथ ऐसा ही व्यवहार करते हैं और फिर हम पर आरोप लगाते हैं कि हम इन मुद्दों को उठाकर देश की बदनामी करते हैं।

ऐसा नहीं था कि केवल पूजा की ही हत्या हुई है। जिस दिन इमरान खान संयुक्त राष्ट्र में इस्लामोफोबिया का प्रस्ताव लेकर गए थे, उस दिन भी पाकिस्तान से एक लड़की का अपहरण हुआ था

16 मार्च को नीना कोल्ही की बलात्कार के बाद हत्या का समाचार था। उन्होंने लिखा कि एक के बाद करके कितनी लड़कियों को अपनी जान देनी होगी, जब हमारी सरकार इन लड़कियों के प्रति जागरूक होगी?

यहाँ तक कि पाकिस्तान में 8 मार्च को ही 13 साल की राबिया भील का अपहरण घोटकी सिंध से कर लिया गया था। उसका अपहरण किया गया, और फिर उसका जबरन निकाह करवा दिया गया।

पूजा के लिए न्याय मांगते हुए कपिल देव ने ट्वीट किया था कि हमें पूजा के लिए न्याय चाहिए, भुट्टो ज़रदारी साहब, यह आपका क्षेत्र है और हम अधिकतर लोग आपके वोटर हैं।

इस विषय में परकाश हीरानी ने ट्वीट किया कि

यह मत भूलिए कि उर्दू मीडिया चुप है क्योंकि वह पूजा है मुस्कान नहीं। अगर वह भारत की मुस्कान होती तो हमारा मीडिया अगर पूरे दिन नहीं तो कम से कम घंटों तक बहस करता।

यह मत भूलिए कि अधिकतर लोग शांत हैं। अगर वह कर्नाटक की लड़की होती, तो वे हजारों ट्वीट ट्रेंड चलातीं।

इस घटना को लेकर पाकिस्तान में हर ओर से आवाजें उठ रही हैं, कुछ मुस्लिम भी इस घटना के विरोध में आए और उन्होंने भी जबरन मतांतरण पर रोक लगाने के लिए सरकार से कदम उठाने के लिए कहा

एक यूजर निमरता ने लिखा कि हमारा मीडिया और हमारे नेता दूसरे देशों के मामलों की रिपोर्टिंग करने में इतना व्यस्त हैं कि उनके पास अपने ही देश में अल्पसंख्यकों के साथ जो हो रहा है, उस पर बात करने का समय नहीं है

वहीं मीडिया के अनुसार उसके कातिल को हिरासत में ले लिया गया है। परन्तु यह भी देखा गया है कि ऐसे मामलों में सजा बहुत कम मिल पाती है क्योंकि परिवार पर अपराधी को माफ करने का दबाव आ जाता है। यही बीना शाह ने ट्वीट करते हुए कहा

यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि पाकिस्तान में जहां हिन्दू लड़कियों को जीने की भी आज़ादी नहीं मिल पा रही है तो वहीं वहां के लोगों को इस बात के लिए बहुत चिंता है कि भारत में मुस्लिम लड़कियों को स्कूल यूनिफ़ॉर्म के स्थान पर बुर्का क्यों नहीं पहनने दिया जा रहा?

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