HinduPost is the voice of Hindus. Support us. Protect Dharma

Will you help us hit our goal?

HinduPost is the voice of Hindus. Support us. Protect Dharma
20.1 C
Varanasi
Thursday, December 2, 2021

गोंड रानी कमलापति के बहाने कुछ प्रश्न

भोपाल में अब हबीबगंज रेलवे स्टेशन गोंड रानी कमलापति के नाम पर हो गया है। अत्याधुनिक सुविधाओं से संपन्न इस रेलवे स्टेशन का नाम अब कमलापति रेलवे स्टेशन हो गया है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इस विषय में ट्वीट करते हुए लिखा कि

मैं भोपाल रेलवे स्टेशन का नाम आदिवासी रानी, कमलापति के नाम पर रखने के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त करता हूँ। वह गोंड समुदाय का गर्व थी और वह अंतिम हिन्दू रानी थीं।

कहा जाता है कि रानी कमलापति बहुत सुन्दर थीं और उन्होंने षड्यंत्रकारियों का डटकर सामना किया था। उन्होंने अपने पति की मृत्यु का प्रतिशोध लिया था और साथ ही उन्होंने अपने पति की मृत्यु का प्रतिशोध लेने के लिए जिस मोहम्मद खान की सहायता ली थी, उसके धोखे के कारण ही उन्हें अपनी जीवन लीला समाप्त करनी पड़ी थी।

रानी कमलापति ने दोस्त मोहम्मद खान को एक लाख रूपए देने का वादा किया था, जिसे वह पूरा नहीं कर पाई थीं, इसके बदले में रानी ने भोपाल का एक हिस्सा दे दिया था। कुछ इतिहासकारों के अनुसार वह मोहम्मद खान को राखी बांधती थीं, मगर मोहम्मद खान की दृष्टि भोपाल पर थी। रानी की सहायता करने और भोपाल का कुछ हिस्सा लेने के बाद उसने रानी के पुत्र नवल शाह के साथ लडाई लड़ी। जिसमें नवल शाह मारा गया और कहा जाता है कि इस लड़ाई में इतना खून बहा कि घाटी खून से लाल हो गयी और इसका नाम ही लाल घाटी हो गया। इस प्रकार भोपाल पर दोस्त मोहम्मद  का कब्जा हो गया था।

फिर उसने जब रानी पर कुदृष्टि डाली तो रानी ने अपने जीवन का बलिदान ही उचित समझा और आधे भवन को जल में डुबोकर स्वयं भी जलसमाधि ले ली।

यह कहानी प्रचलित है। कमलापति की इस कहानी से कई प्रश्न खड़े होते हैं।

यह स्पष्ट है कि वह गोंड रानी थीं। अर्थात करीब 1720 के आसपास तक, भारत में गोंड राजा और रानी हुआ करते थे। जिनकी प्रजा में वह ब्राह्मण, क्षत्रिय और वैश्य भी सम्मिल्लित थे, जिन्हें शोषक कहा जाता है। जिस कथित ब्राहमणवाद को अकादमिक्स में सबसे बड़ा शत्रु स्थापित करने का प्रयास किया जाता है, वही ब्राहमण गोंड रानी के नेतृत्व में रहते थे।

फिर उन्हें पिछड़ा किसने बनाया? इन जनजातियों को अपराधी और पिछड़ा किसने बनाया? यदि ब्राह्मण और कथित उच्च जातियां ही शत्रु थीं, तो वह इनके शासनकाल में क्या करती थीं? क्या ब्राह्मणों ने विद्रोह किया?

इतिहास में झाँकने पर हम पाएंगे कि जिन्हें आज पिछड़ी जाति बोलकर हिन्दुओं को परस्पर तोड़ा जाता है, उनमें से अधिकतर के राजा रहे हैं, और जिनकी प्रजा में ब्राह्मण से लेकर हर कथित उच्च जाति रही है।

जैसे 1857 में अंग्रेजों से लोहा लेने वाली अवंतीबाई लोधी, या फिर जिहादी अकबर से मोर्चा लेने वाली महान वीरांगना गोंड रानी दुर्गावती। ऐसी एक नहीं कई रानियाँ और राजा मिलेंगे, पर प्रश्न यही है कि एक समय में जिन जनजातियों के राजा और रानी हुआ करते थे, उन्हें कब और कैसे और किस षड्यंत्र के चलते पिछड़ा घोषित ही नहीं किया गया, बल्कि उन्हें उस समाज के विरुद्ध खड़ा कर दिया गया, जो समाज कभी उनकी ही प्रजा था

एक नकली ब्राह्मणवाद का विमर्श अकादमिक स्तर पर खड़ा करके, सच्चे दुश्मन अर्थात इस्लामी जिहाद को क्लीन चिट दे दी गयी। बाबर से पहले जो भी इस्लामी आक्रमण हुए, जिन्होनें भारत की आत्मा तार तार की, जिन्होनें हमारे मंदिर तोड़ दिए, जिन्होनें हमारा ऐसा नरसंहार किया, जिसकी तुलना इतिहास में कहीं नहीं है।

वाराणसी में चल रही संस्कृति संसद में बेल्जियम के इतिहासकार कोनराड एल्स्ट ने हिन्दुओं के नरसंहार पर बोलते हुए कहा कि सनातन धर्म, उसकी संस्कृति व सभ्यता को खत्म करने के लिए हिंदुओं की हत्या करने का दौर छठवीं शताब्दी से शुरू हो गया था। पांच सौ साल में आठ से 10 करोड़ हिंदुओं की क्रूरता से हत्या की गई।

उन्होंने यह कहा कि सन एक हजार से लेकर सन 1525 तक अलग अलग हमलों में दस करोड़ हिन्दुओं की हत्या की गयी और यदि इसमें वर्ष 1947 और वर्ष 1971 की लाखों हिन्दुओं की हत्या को जोड़ दिया जाए, तो यह संख्या और भी अधिक हो जाएगी। परन्तु यह दुर्भाग्य ही है कि हिन्दुओं पर हुए अत्याचारों और नरसंहार का इतिहास में कोई भी उल्लेख नहीं है।

मुस्लिम शासकों का लक्ष्य ही काफिरों (हिन्दुओं) की हत्या करके इस्लाम को आगे बढ़ाना था। उन्होंने यहुदियों के ऊपर हुए अत्याचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि ईसाई बनने वाले लाखों यहुदियों की हत्या की गई, लेकिन हिंदुओं के नरसंहार से उसकी तुलना नहीं की जा सकती।

परन्तु यह देखना अत्यंत दुखद है कि हिन्दुओं के साथ हुए नरसंहार को ही सुनियोजित ढंग से मिटाया नहीं गया, बल्कि उसे नकारा गया और इस्लामी जिहाद के बदले एक काल्पनिक शत्रु खड़ा किया गया, जो वर्ग वास्तव में पीड़ित था, जिसकी हत्याएं हुई थीं और जिसने इस्लामी आक्रान्ताओं के सामने अपने मदिरों को बचाने के लिए अपना सर्वस्व बलिदान कर दिया था।

आज जब रानी कमलापति के नाम पर यह कहा जा रहा है कि वह अंतिम हिन्दू रानी थीं, तो फिर प्रश्न यह भी है कि वह अंतिम हिन्दू रानी किसके कारण हुईं थीं?

Related Articles

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Latest Articles

Sign up to receive HinduPost content in your inbox

We don’t spam! Read our privacy policy for more info.