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Wednesday, August 17, 2022

हिन्दुओं की हत्या से फिर लाल हुआ कश्मीर

 

श्रीनगर में फिर से दो हिन्दुओं की हत्या हो गयी। पहले दिन में आतंकवादियों ने बिन्द्रू मेडिकेट के मालिक माखन लाल बिन्द्रू की गोली मार कर हत्या कर दी। जम्मू और कश्मीर पुलिस ने एक ट्वीट में बताया कि आतंकवादियों ने बिन्द्रू मेडिकेट के मालिक माखन लाल बिन्द्रू पर गोलियां चला दीं। उन्हें अस्पताल में ले जाया गया, जहाँ पर उन्होंने दम तोड़ दिया। इलाके को खाली करा लिया गया है और आतंकवादियों को पकड़ने के लिए तलाश की जा रही है।”

कश्मीरी पंडितों से जुड़े सूत्र बताते हैं कि माखन लाल बिन्द्रू की श्रीनगर में दुकान बहुत पुरानी थी और यह भी वह लोग बताते हैं कि आतंक के दौर में भी वह टिके रहे थे, उन्होंने कश्मीर छोड़कर जाना नहीं चुना। कश्मीरी पंडितों से जुड़े सूत्रों ने अपनी यादें बताते हुए कहा कि वह सभी उसी दुकान से दवाई लेने जाते थे।

वह आतंक के युग में नहीं गए, दवाइयां बेचते रहे और जल्दी ही उनका नाम एक भरोसेमंद नाम हो गया था, जहां से ली गयी दवाइयों पर विश्वास किया जा सकता था। शायद उन्हें यह विश्वास हो कि एक दिन सब सही होगा। मगर “विश्वास” काम नहीं आया!  

बिन्द्रू मेडिकोज

और यह विडंबना है कि आज जब कश्मीरी पंडितों को दोबारा बसाए जाने की बात हो रही है और यह कहा जा रहा है कि कश्मीरी पंडित वापस जाएं, तो बरसों से बसे हुए माखन लाल बिन्द्रू को निशाना बना लिया गया और माखन लाल बिन्द्रू आज अंतिम यात्रा पर चले गए।

दूसरा निशाना बने भागलपुर के वीरेंद्र पासवान! जिन्हें श्रीनगर में आतंकियों ने अपनी गोलियों का निशाना बना लिया। वीरेंद्र पासवान एक चाट का ठेला लगाते थे और वह बिहार के भागलपुर के थे और इस समय वह आलमगरी बाजार, ज़दीबल में रह रहे थे।

पुलिस के अनुसार आतंकवादियों ने एक गैर-स्थानीय व्यक्ति को मदीना चौक, लालबाज़ार, के पास श्रीनगर में मार डाला। मृत व्यक्ति की पहचान भागलपुर, बिहार के निवासी थे और सड़क किनारे ठेला लगाते थे। इस इलाके में तलाशी अभियान चल रहा है!”

स्थानीय हो या गैर-स्थानीय, आतंकवादियों की गोली के लिए दोनों एक समान हैं। इस्लामी आतंकवादियों का निशाना भागलपुर के वीरेंद्र पासवान के लिए भी है और वर्षों से बसे हुए स्थानीय माखनलाल बिन्द्रू के लिए भी। उन्हें इस्लाम की गिरफ्त में आ चुके कश्मीर से शेष काफिरों को मिटाना है, उन्हें जल्दी है, जल्दी है कि जो शेष रह गए हैं, उन्हें निपटाया जाए, और जन्नत जाया जाए।

इस घटना से उस दावे पर भी प्रश्न उठ रहे हैं जिसमें बार बार कश्मीरी पंडितों से घाटी में आने के लिए कहा जा रहा है और यह भी कहा जा रहा है कि अब घाटी में कश्मीरी पंडितों के रहने के लिए माहौल अनुकूल है।

यह कैसा अनुकूल माहौल है, जिसमें न ही कश्मीर के माखनलाल बिन्द्रू सुरक्षित हैं और न ही भागलपुर के वीरेंद्र पासवान!

क्षेत्रवाद और जातियों के आधार पर हिन्दुओं को विभाजित करने वाले नेता काश यह समझते कि इस्लामी आतंकवादियों की गोली का निशाना न ही कश्मीर के बिन्द्रू रनेम और न ही बिहार के पासवान सरनेम में अंतर करता है और न ही मानता है। उसके लिए वह दोनों ही काफ़िर हैं, और दोनों को ही मारना उसका मजहब है!

यहाँ तक कि सीमापार अफगानिस्तान में उसके लिए वह सिख भी काफिर हैं, जो सिख आज भारत में हिन्दुओं को अपना दुश्मन मानते हैं और भारत में हिन्दुओं के खून के प्यासे हो रहे हैं, ब्राह्मणों को चुनमंगा कहकर अपमानित करते हैं, परन्तु कोई ब्राह्मण उनपर ताना भी नहीं कसता, मगर जैसे ही सीमा पार करते हैं वह, उन्हें अहसास होता ही होगा कि हिन्दू क्या होता है क्योंकि आज ही तालिबान ने अफगानिस्तान में गुरुद्वारे पर हमला किया है और करता परवन गुरुद्वारे में कई लोगों को बंदी बना लिया है।

मगर दुःख और विडंबना यह है कि हिन्दुओं से बार बार यह कहने वाले कि हमने तुम्हारी बहनों की आबरू बचाई थी, पाकिस्तान और अफगानिस्तान दोनों ही इस्लामी देशों में अपने गुरूद्वारे तक नहीं बचा पा रहे हैं।

पिछले दिनों पाकिस्तान में भी एक सिख की हत्या कर दी गयी थी। पुलिस के अनुसार कुछ अज्ञात बंदूकधारी उनके हकीम सरदार सतनाम सिंह के ऑफिस में घुसे और  उन्होंने गोली चलाकर उनकी हत्या कर दी।

यह जो इस्लामी आतंकवादियों की गोलियां हैं, वह हिन्दुओं और सिखों में तनिक भी अंतर नहीं करतीं हैं, वह कश्मीर और बिहार के हिन्दुओं में अंतर नहीं करती हैं, वह ब्राहमण और पासवान में अंतर नहीं करती हैं, उनकी गोलियों का निशाना केवल इस्लाम न मानने वाले हैं!

परन्तु सबसे बड़ा दुःख यही है कि चाहे इस्लामी आतंकवाद से निकली गोलियां हों या खालिस्तानी आतंकियों का प्रहार, दोनों का निशाना वह हिन्दू हैं, जिसने शायद ही कभी यह भी पलट कर पूछा हो कि आप अपने पन्थ को ऊंचा दिखाने के लिए हमारे धर्म को नीचा क्यों दिखाते हो? क्यों आपने हमारी हत्याएं कीं, क्यों जनेऊ के वजन के हिसाब से इतिहास में हमारी लाशें गिनीं!

हिन्दुओं ने पलटकर प्रश्न नहीं किया, बस स्वीकार किया और अपने साथ मिलाया! और उसे कश्मीर से भागलपुर और यहाँ तक कि लखीमपुर खीरी में क्या मिल रहा है? मौत, मौत और केवल मौत! और वह भी ऐसी मृत्यु जिस पर कोई पछतावा तक जाहिर नहीं करता!

हिन्दुओं का नरसंहार जारी है!

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