HinduPost is the voice of Hindus. Support us. Protect Dharma

Will you help us hit our goal?

HinduPost is the voice of Hindus. Support us. Protect Dharma
8.4 C
Varanasi
Thursday, January 27, 2022

‘दी बैटल फॉर संस्कृत’ (संस्कृत के लिए संघर्ष) – सारांश

बहुत समय से भारत से संबंधित (अकादमिक व सामान्य) लेखों में पश्चिमी दृष्टिकोण का प्रभाव रहा है। इन दिनों भारत के भीतर इस क्षेत्र में पश्चिमीकरण एवं पश्चिम की दखल के खिलाफ एक नयी जागरूकता का आरम्भ हुआ है।

इस पुस्तक ‘बैटल फॉर संस्कृत’ (संस्कृत के लिए संघर्ष) का मूल उद्देश्य संस्कृत तथा भारतीय संस्कृति के विद्वानों को (जो परंपरा से जुड़े हुआ हैं) सचेत करना है। यह पुस्तक अमरीका में स्थित और जनित एक महत्वपूर्ण विचारधारा का परिचय कराती है – एक ऐसी विचारधारा जो भारत के सांस्कृतिक,सामाजिक तथा राजनीतिक लेखन को बड़े स्तर पर प्रभावित कर रही है। इस शैक्षिक क्षेत्र को उन्होंने नाम दिया है- इंडोलॉजी या संस्कृत स्टडीज।

जैसा कि “बैटल फॉर संस्कृत” में खुलासा किया गया है – इस क्षेत्र (इंडोलॉजी) में कार्यरत विद्वानों का घोषित उद्देश्य है – संस्कृत ग्रंथों का  (अपने अनुसार) विश्लेषण करना और संस्कृत ग्रंथों में रचे-बसे तथाकथित ‘ज़हर’ को निकाल फेंकना । इस प्रकार यह “विद्वान्” जन भारतीय समाज में दुराव पैदा कर रहे हैं।

इनका मानना है कि  –

  • अधिकाँश संस्कृत पुस्तकें सामाजिक रूप से दमनकारी हैं और वे अभिजात्य /शासक वर्ग के हाथों में राजनीतिक हथियार के रूप में कार्य देती हैं।
  • इन ग्रंथों में से धार्मिकता निकाल फेंकने की आवश्यकता है और
  • संस्कृत भाषा तो बहुत समय पहले ही ‘मृत’ हो चुकी है !

कोई भी पारम्परिक भारतीय विद्वान इन बातों को हर सूरत में फ़ौरन ख़ारिज कर देगा और नहीं तो कम से कम इन बातों पर प्रश्न चिन्ह तो खड़ा करेगा ही।

यह शोध, जो कि पश्चिमी इंडोलॉजी की खामियों को उजागर करता है एवं पारम्परिक भारतीय सोच की पैरवी करता है, की शुरुआत एक अनूठी घटना से हुई। यह घटना श्रृंगेरी शारदा पीठम, जो कि हिन्दुओं का महत्वपूर्ण धार्मिक प्रतिष्ठान है से सम्बंधित है। राजीव  मल्होत्रा  को आभास हुआ कि एक आगामी परियोजना श्रृंगेरी पीठम के सिद्धांतों के लिए, यहाँ तक कि समस्त सनातन धर्म वालों के लिए अत्यंत विनाशकारी सिद्ध हो सकती है।

आप किसी भी पक्ष के साथ हों, सभी यह स्वीकारेंगे कि ‘दी बैटल फॉर संस्कृत’ एक मौलिक शोध को लेकर आगे बढती है और एक सशक्त और शाश्वत  बहस की पहल करती है यह पुस्तक एक महत्त्वपूर्ण विषय के बारे में एक प्रमुख क़दम है। यह पुस्तक दोनों पक्षों/ पहलुओं पर समान रूप से दृष्टि डालती  है। कौन सा पहलू दूसरे से ज़्यादा विशिष्ट है या दोनों विचारों के बीच एक समन्वय सेतु निर्माण करने की गुंजाइश है- पाठक स्वयं फैसला करें !


‘दी बैटल फॉर संस्कृत’ पुस्तक की वेबसाइट – http://battleforsanskrit.com/

खरीदने के लिए – http://www.amazon.in

राजीव मल्होत्रा एक शोधकर्ता, लेखक और वक्ता हैं । उनसे संपर्क करने के लिए-:

फ़ेसबुक: RajivMalhotra.Official

वेबसाइटhttp://www.rajivmalhotra.com/

ट्विटर: @RajivMessage

rajivm


क्या आप को यह  लेख उपयोगी लगा? हम एक गैरलाभ (non-profit) संस्था हैं। एक दान करें और हमारी पत्रकारिता के लिए अपना योगदान दें

Related Articles

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Latest Articles

Sign up to receive HinduPost content in your inbox

We don’t spam! Read our privacy policy for more info.