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Friday, September 30, 2022

तमिलनाडु वक्फ बोर्ड ने किया एक हिन्दू-बहुल गाँव पर कब्ज़ा; अब हिन्दुओं को अपनी जमीन बेचने के लिए वक्फ की सहमति जरूरी

आपको कैसा लगेगा अगर एकाएक आपको पता लगे कि आपकी संपत्ति पर किसी और ने अवैध दावा कर दिया है, और अब आप उसे बेच भी नहीं सकते ? ऐसा ही कुछ हुआ है तमिलनाडु के तिरुचिरापल्ली जिले के तिरुचेंदूरई गांव के लोगों के साथ, जहां स्थानीय लोगो में निराशा की लहर दौड़ गई है, क्योंकि तमिलनाडु वक्फ बोर्ड ने पूरे गांव को अपनी संपत्ति होने का दावा किया है।

तमिलनाडु वक्फ बोर्ड वक्फ अधिनियम 1954 के अंतर्गत स्थापित एक वैधानिक निकाय है। यह वक्फ संस्थानों की देखरेख और प्रबंधन करता है और साथ ही वक्फ संपत्तियों का सञ्चालन भी करता है। वक्फ संपत्तियां वे चल और अचल संपत्तियां हैं, जो इस्लाम को मानने वाले व्यक्ति द्वारा मुस्लिम कानून द्वारा पवित्र, धार्मिक या धर्मार्थ के रूप में मान्यता प्राप्त किसी भी उद्देश्य के लिए समर्पित हैं।

तमिल दैनिक दिनमलार की एक रिपोर्ट के अनुसार, तिरुचेंदूरई गांव में कृषि भूमि के मालिक मुल्लाकरूपुर के राजगोपाल ने अपनी 1 एकड़ 2 सेंट जमीन राजराजेश्वरी को बेचने के लिए एक समझौता किया था। वह साढ़े तीन लाख रुपये में परचेज डीड की व्यवस्था करने और उसका रजिस्ट्रेशन कराने त्रिची के ज्वाइंट थ्री सब-रजिस्ट्रार ऑफिस गए थे। हालांकि, सब-रजिस्ट्रार द्वारा उन्हें बताया गया कि भूमि को पंजीकृत नहीं किया जा सकता है क्योंकि यह तमिलनाडु वक्फ बोर्ड की है। सब-रजिस्ट्रार ने उनसे कहा था कि उन्हें जमीन बेचने के लिए चेन्नई में तमिलनाडु वक्फ बोर्ड कार्यालय से ‘अनापत्ति प्रमाण पत्र’ लेना होगा।

जब राजगोपाल ने पूछा कि 1992 में खरीदी गई जमीन को बेचने के लिए उन्हें वक्फ बोर्ड से एनओसी लेने की आवश्यकता क्यों है, तो सब-रजिस्ट्रार ने उनसे कहा कि तिरुचेंदूरई गांव में किसी भी जमीन को बेचने की यह प्रक्रिया है। उधर वक्फ बोर्ड ने दस्तावेजों के साथ रजिस्ट्रेशन विभाग को एक पत्र भेजा है, और कहा है कि इस गांव पर उनका अधिकार है, और जो लोग गांव में जमीन के लिए डीड रजिस्टर कराने आते हैं, उन्हें उनका अनापत्ति प्रमाणपत्र लेना आवश्यक है।

विवाद उठने पर रजिस्ट्रार ने राजगोपाल को इस संबंध में 250 पन्नों के वक्फ बोर्ड के पत्र की एक प्रति भी दिखाई। उस पत्र में वक्फ बोर्ड ने कहा है कि पूरे तमिलनाडु में हजारों एकड़ जमीन पर उनका अधिकार है, और उनको खरीदने बेचने से पहले उनकी अनुमति लेना कानून सम्मत है। हैरान परेशान राजगोपाल ने यह बात अपने गांव के लोगों को बताई, तब से गाँव के लोग वक्फ बोर्ड द्वारा उनकी जमीनों के अवैध और अनैतिक अधिग्रहण के बारे में चिंतित हैं।

गाँव के लोगो ने बताया कि उनके पास जमीन का पट्टा, चिट्टा, अदंगल, राजस्व ‘ए’ पंजीकरण, ऋणभार प्रमाण पत्र सहित राजस्व विभाग के सभी आवश्यक दस्तावेज पहले से ही हैं, ऐसे में तमिलनाडु वक्फ बोर्ड उनकी संपत्ति पर कैसे दावा कर सकता है। यह मामला जिला कलेक्टर के संज्ञान में लाया गया था, जिन्होंने इस पूरे विषय को देखने और उसके आधार पर निर्णय लेने का आश्वासन दिया है।

क्या 1500 वर्ष पुराना हिन्दुओं का ऐतिहासिक मंदिर भी अब वक्फ बोर्ड के कब्जे में है?

इस विषय में अब राजनीतिक दल भी गाँव वासियों की सहायता के लिए आगे आये हैं । त्रिची के भाजपा नेता अल्लुर प्रकाश ने कहा था कि तिरुचेंदुरई गांव कावेरी नदी के दक्षिणी तट पर स्थित एक सुरम्य कृषि गांव है, जहां बड़ी संख्या हिन्दू रहते हैं। ऐसे में वक्फ बोर्ड क्यों और कैसे तिरुचेनथुरई गांव की संपत्ति का स्वामी बन गया, जबकि दोनों में कोई सम्बन्ध ही नहीं है?

प्रकाश ने आगे बताया कि “यहाँ मनेंडियावल्ली समेथा चंद्रशेखर स्वामी मंदिर है, जिसमें पवित्र ‘पादल पेट्रा स्थलम’ भी बना हुआ है। ऐसा माना जाता है कि श्रीरंगम मंदिर के भगवान रंगनाथर पंगुनी महीने के आदिब्रह्मोत्सव त्योहार के समय तिरुचेनथुरई गांव में अपनी निंद्रा से जागते हैं। विभिन्न दस्तावेजों और साक्ष्यों से यह पता चलता है कि यह मंदिर लगभग 1,500 वर्ष पुराना है। मंदिर के पास तिरुचेनथुरई गांव के अंदर और बाहर लगभग 369 एकड़ जमीन है। क्या तमिलनाडु वक्फ बोर्ड इस जमीन पर भी अपना अधिकार बताएगा?”

स्थानीय लोगों में वक्फ बोर्ड और सरकार के प्रति आक्रोश

इस विषय पर आस पास के गाँवों में भी आक्रोश पैदा हो गया है। स्थानीय लोग कह रहे हैं जब हमारे पास जमीन के दस्तावेज हैं, तो वक्फ बोर्ड बिना किसी साक्ष्य के इसे अपनी संपत्ति कैसे घोषित कर सकता है? अगर वक्फ बोर्ड ने जमीनों को अपना होने का दावा करते हुए पत्र जारी किया है, तो भी पंजीकरण विभाग के उच्च अधिकारी वक्फ बोर्ड के दावों को सत्यापित किए बिना विलेख पंजीकृत नहीं करने का आदेश कैसे दे सकते हैं?

क्या वक्फ बोर्ड ने न्यायायिक कार्यवाही का अनुचित लाभ उठाया ?

इस विषय पर तमिलनाडु सरकार के पंजीकरण विभाग के अधिकारी ने बताया कि उन्हें यह जानकारी दी गयी थी कि राज्य में कई जल निकायों, वक्फ बोर्ड की संपत्तियों और मंदिर संपत्तियों पर अतिक्रमण है। विभाग के अनुसार असमाजिक तत्वों ने जाली दस्तावेजों के माध्यम से इन जमीनों पर कब्जा कर रखा था, और कई प्रकार के कानूनी विवाद विभिन्न लोगों के बीच पैदा हो गए थे।

जब यह विषय न्यायालय में गया तो उन्होंने सरकार की आलोचना की और संपत्तियों की वसूली के लिए उचित कदम उठाने का निर्देश दिया। इसके आधार पर 2016 में सरकार ने संपत्तियों की वसूली के उपाय किए थे, वहीं वक्फ बोर्ड ने पूरे तमिलनाडु में अपनी संपत्तियों को वापस लेने के लिए उपाय किये। इसी कार्यवाही को आधार बना कर तिरुचेंदुरई और काडियाकुरिची सहित कई गांवों की पहचान वक्फ बोर्ड की संपत्तियों के रूप में की गई है, जो सिद्धांततः गलत है।

अधिकारियों ने यह भी कहा कि वे अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के सचिव और वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष से इस विषय पर बात करेंगे। उन्होंने स्वीकार किया कि तिरुचेंदुरई मंदिर और उससे संबंधित भूमि को वक्फ बोर्ड की संपत्ति के रूप में संदर्भित करना बेतुका है और वक्फ बोर्ड के पत्र के आधार पर विलेख पंजीकरण से इनकार करने पर उन्हें समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। तिरुचेनथुरई और काडियाकुरिची जैसे गांवों के अलावा, चेन्नई और उसके आसपास के क्षेत्रों में भी यह समस्या है जहां वक्फ बोर्ड द्वारा भूमि पर दावा किया गया है।

अभी इस विषय पर ज्यादा कुछ कहना सही प्रतीत नहीं होता, लेकिन यह तो साफ़ है कि वक्फ बोर्ड को असीम शक्तियां दी हुई हैं, और वह उनका उपयोग करके अवैध तरीके से हिन्दुओं की जमीनें हड़पना चाहता है। इस विषय पर अन्य राज्यों की सरकारों को भी तुरंत कार्यवाही कर यह जांचना चाहिए कि क्या उनके राज्यों में भी वक्फ बोर्ड इस प्रकार से जमीन हड़प रहा है? केंद्र सरकार को भी कड़े कानून बना कर वक्फ बोर्ड को रद्द कर देना चाहिए, हमारे देश में इस प्रकार की मजहबी संस्थाओं का कोई स्थान नहीं होना चाहिए।

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