“जहाँ आते-जाते हैं PM मोदी और CM योगी, उस मगहर में शमसुल हुदा ने क्यों खरीदी थी जमीन ?.. सामने आए जियाउद्दीन और बशीर मियाँ के भी नाम; केंद्रीय और राज्य एजेंसियों की रडार से अभी तक बाहर तौसीफ रज़ा”, सुदर्शन न्यूज़, फरवरी 19, 2026
“लगभग 6 माह पहले सुदर्शन न्यूज़ ने अपने शो बिंदास बोल में सबूतों के साथ शमसुल हुदा नाम के एक ब्रिटिश मौलाना की पोल खोली थी। यह मौलाना इंग्लैंड का नागरिक होते हुए भी लगभग एक दशक से भारत की सैलरी और पेंशन ले रहा था। धर्मयोद्धा डॉ सुरेश चव्हाणके जी द्वारा किये गए इस खुलासे के बाद इसके खिलाफ न सिर्फ उत्तर प्रदेश पुलिस बल्कि ED तक ने केस दर्ज किया। हमारे सच पर धौंस का पर्दा डालने की साजिश रचने वाली शमसुल की औलाद तौसीफ फिलहाल पहुँच के बाहर है। उसका पता न तो केंद्रीय एजेंसियों को है और न ही प्रदेश के पुलिस बल को। इस बीच मामले में कुछ नए नाम भी निकल कर सामने आये हैं जो केस की गंभीरता को कई गुना बढ़ा रहे हैं। ताजा जानकारी के मुताबिक अवैध मदरसे से जुड़े केस और जमीन की खरीद फरोख्त मामले में बशीर, वहीद व जियाउद्दीन भी शामिल हैं।
सुदर्शन न्यूज़ के हाथ मौलाना शमसुल की औलाद तौसीफ द्वारा खरीदी गई एक जमीन के कागजात लगे हैं। इस कागजातों में मगहर में ग्रामीण इलाके के रायपुर छपिया में डील हुई एक जमीन का जिक्र है। जमीन में विक्रेता वहीद खान है जबकि खरीदार शमसुल की औलाद तौसीफ है। इस खरीदारी में गवाहों के तौर पर बशीर और जियाउद्दीन के नाम दर्ज हैं। दोनों ने बाकायदा अपनी फोटो खिंचवाई है। वहीद को छोड़ कर बाकी सभी संतकबीरनगर के खलीलाबाद निवासी हैं। माना जा रहा है कि जियाउद्दीन तो शमसुल के उस मदरसे के कागजातों में भी दर्ज है जो लम्बी जांच व कार्रवाई प्रक्रिया से गुजर रहा है।
यह जमीनी डील 21 जुलाई 2025 को उपनिबंधक सदर खलीलाबाद के कार्यालय में हुई थी। वहीद खान ने खुद को व्यापारी बताया है जबकि बाकियों ने खुद को किसान लिख रखा है। 21 जुलाई 2025 में इस जमीनी खरीद-फरोख्त का पैसा किस माध्यम से आया अभी तक इसका खुलासा नहीं किया गया है। जांच एजेंसियों की पूछताछ से फ़िलहाल जियाउद्दीन और बशीर भी अभी तक बचे हुए हैं। नाम न छापने की शर्त पर एक स्थानीय व्यक्ति ने दावा किया है कि इन गवाहों जियाउद्दीन और बशीर की चल अचल सम्पत्तियों, फोन कॉल डिटेल व बैंक खातों की जांच हो तो कई और गंभीर राज भी खुलेंगे….”
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