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Tuesday, October 4, 2022

करौली हिंसा में लिब्रल्स और कट्टर इस्लामी तत्वों ने हिन्दुओं को ही दोषी ठहराना आरंभ किया

राजस्थान के करौली में हिन्दुओं के साथ जो हुआ, वह किसी से छिपा नहीं है। जो वहां से वीडियो आ रहे हैं, वह दुखी करने वाले हैं और हिन्दू दुकानदारों के साथ जिस प्रकार का व्यवहार किया गया, वह साफ़ दिखाता है कि इसकी तैयारी बहुत पहले से थी और भास्कर की ग्राउंड रिपोर्टिंग ने इसकी तैयारी को भी प्रमाणों के साथ दिखाया था।

दैनिक भास्कर के अनुसार बाइक रैली पर पथराव किया जाएगा, यह पहले से तय था। उसमें लिखा है कि “उपद्रव के 24 घंटों बाद पुलिस व प्रशासन के अधिकारियों ने मौके का जायजा लिया तो उन्हें कई घरों की छत पर पत्थरों के ढेर मिले। सांसद मनोज राजोरिया ने बताया- ‘मैंने कलेक्टर व एसपी के साथ मौके का दौरा किया। जहां कई मकानों पर पत्थरों के ढेर मिले हैं। मकानों से करीब दो ट्रॉली पत्थर निकाले गए। इनमें एक मकान के ऊपर जिम संचालित हो रहा था।’

भास्कर ने इस घटना के कई पीड़ितों से बात की और उन्होंने बताया कि कैसे पथराव के बाद भागदौड़ का माहौल बन गया था और लोग अपनी अपनी जान बचाने के लिए भागे थे। अचानक भीड़ में मुंह पर नकाब बांधे युवक घुस आए। उनके हाथ में लाठी-सरिए और चाकू थे। उन्होंने भागते लोगों पर हमला बोल दिया।

रिपब्लिक न्यूज़ पर भी एक वीडियो सामने आया था, जिसमें पीड़ित बता रहे हैं कि कैसे हिन्दुओं की दुकानों को ही चुन चुन कर निशाना बनाया गया था। इस आग में चंद्रशेखर गर्ग की टीन दुकाने जल गयी हैं और उन्होंने कहा कि फायर ब्रिगेड ने उनकी कॉल का कोई जबाव नहीं दिया, तो वहीं मुस्लिमों की आवाज सुनने के लिए तीन से चार टीमें थीं। और यह भी बताया गया कि केवल हिन्दुओं की ही दुकानें जली हैं, और उन्होंने रिपब्लिक से बात करते हुए यह कहा कि साढ़े तीन बजे के करीब मुसलमानों की दुकानें अचानक से ही बंद होना शुरू हो गयी थीं। हिन्दुओं की आठ से दस ही दुकाने हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि वह लोग आपस में बातें तो कर रहे थे, मगर हम लोग इतने सालों से साथ रह रहे थे, साथ काम कर रहे थे और हमारे बीच भाईचारा था, इसलिए हमें लगा नहीं कि ऐसा कुछ हो सकता है और उन लोगों ने हमें भगा दिया, हमारे पैसे लूट लिए और हमारी दुकानें जला दीं।

इस वीडियो में साफ पता चल रहा है कि कैसे सुनियोजित तरीके से हिन्दुओं को मारा गया, जलाया गया, खौफ भर गया। इसी वीडियो में रमेश चन्द्र जंघम ने भी कहा कि रैली के दौरान वह फूल बरसा रहे थे, उसके बाद अचानक से ही लाठी पड़नी शुरू हो गयी और उन लोगों ने हम पर डंडे चलाने शुरू कर दिए।

किराने की दुकान चलाने वाले हेमंत अग्रवाल ने भी कहा कि उनकी किराने की दुकान सबसे बड़ी दुकान थी और उन लोगों ने हमारी दुकान लूट ली और हम लोग मुस्लिम भीड़ के सामने हम रोए, गिड़गिड़ाए और रहम की भीख माँगी, लेकिन उन्हें हमारे ऊपर जरा भी दया नहीं आई।

हेमंत ने यह भी कहा कि आस पड़ोस वाले मुसलमानों के घर में ही लूट का सामान मिल जाएगा, पर गहलोत प्रशासन कोई कदम नहीं उठा रहा है।

वहीं इस घटना में भी कट्टरपंथी संगठन पीएफआई का सम्बन्ध आ रहा है। इस कट्टर इस्लामी संगठन ने इस हिंसा से दो दिन पहले ही गहलोत सरकार को पत्र लिखा था

पीएफआई का भी सम्बन्ध इन हिंसा के मामले में सामने आया है, जिसमें कहा गया था कि हिन्दू नववर्ष की आड़ में साम्प्रदायिकता फैलाने की साज़िश। और सतर्क रहने के लिए सरकार को पत्र लिखा है। ऐसे में यह प्रश्न सहज ही उठता है कि प्रशासन को यह कैसे नहीं पता था कि हिंसा हो सकती है, जबकि पीएफआई को यह पता था कि हिंसा हो सकती है?

हिन्दुओं के विरुद्ध एकतरफा हिंसा करने के बाद अब देश का लिबरल समाज और पाकिस्तानी एवं मुस्लिम मीडिया हिन्दुओं को ही दोषी ठहरा रहा है और झूठी खबरें फैला रहा है।

opindia के अनुसार वाशिंगटन पोस्ट के कॉलमनिस्ट खालेद बेयदोन ने हिन्दुओं को करौली दंगे का दोषी ठहराया और झूठ फैलाया कि भारत में राजस्थान में रमजान के दौरान 24 घंटों के भीतर ही 40 से अधिक घर और दुकानें जला दी गईं और उसके बाद उसके एक और ट्वीट किया कि हिंदुत्व नस्लीय संहार है!

इन जहरीले ट्वीट्स के साथ ही न जाने कहाँ कहाँ की तस्वीरें भी इस्लामी प्रोपोगैंडा फैलाने के लिए प्रयोग की जाने लगीं। कर्नाटक और तेलंगाना की तस्वीरें राजस्थान की तस्वीरें कहकर पोस्ट की जानें लगी। और इतना ही नहीं वह पाकिसान भी भारत को नसीहतें देने लगा, जहां पर रोज ही हिन्दू लड़कियों का अपहरण मजहब केनाम पर हो रहा है और वहां पर मंदिरों और हिन्दुओं दोनों की ही सुरक्षा का कोई अश्वासन नहीं है।

SarahGates1 के ट्विटर हैंडल से

कई वीडियो भी कई प्रोपोगंडा वेबसाईट जैसे वायर ने साझा किये, जिनमें पुरानी घटनाएँ थीं। जिनका खंडन पुलिस ने भी किया।

यह देखना बहुत ही दुखद है कि पिछले कई दिनों में यह एक ट्रेंड बन गया है कि पहले दंगों की सुनियोजित तैयारी कर ली जाती है। हिन्दुओं की संपत्ति की पहचान कर ली जाती है और फिर जब दंगे होते हैं तो उसके लिए हिन्दुओं की किसी घटना को उत्प्रेरक कहा दिया जाता है। जैसे दिल्ली दंगों में दंगों की पूरी तैयारी की मुस्लिमों ने। छतों पर पत्त्थर, बड़ी गुलेल मिली। हिन्दुओं के घरों को निशाना बनाया गया, और उसके लिए दोषी किसे ठहराया गया, कपिल मिश्रा को, जिन्होनें बस इतना कहा था कि एक और शाहीन बाग़ नहीं बनने देंगे! और यह सुनवाई में साबित हो रहा है कि यह सब पूर्व नियोजित था कि कैसे कपिल शर्मा और फिर भीम आर्मी पर दंगों का ठीकरा फोड़ना है!

और यही हुआ, कपिल मिश्रा को किस तरह से निशाना बनाया गया, यह किसी से छिपा नहीं हैं, हाँ, इस बात को न्यायालय में साबित नहीं कर पाए।

इस मामले में भी कांग्रेस के नेता मतलूब की संलिप्तता पाई गयी है और उसके रिश्तेदार भी इन दंगों में शामिल थे, और वरिष्ठ पुलिसकर्मियों ने भी हिंसा को रोकने की कोई कोशिश नहीं की। भीड़ को तोड़फोड़ करने की पूरी आजादी दे दी गयी थी

यह देखना बहुत दुखदायी है कि जहाँ हिंसा पूरी तरह से हिन्दुओं के विरुद्ध होती है उसमें एक विशेष प्रकार से केवल हिन्दुओं को ही निशाना बनाया जाता है, उन्हें ही दोषी ठहराया जाता है, झूठी खबरें उन्हीं के विषय में प्लांट की जाती हैं!

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