कांकेर और बालाघाट में बुधवार और गुरुवार को नक्सल हिंसा में सक्रिय 6 माओवादी सुरक्षा बलों के सामने झुके, जिससे छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश में माओवाद की विचारधारा पर जोरदार चोट पड़ी और सरकारों ने इसे नक्सल उन्मूलन के लक्ष्य की बड़ी प्रगति बताया।
कांकेर में 4 माओवादी आत्मसमर्पण करने पहुंचे और पुलिस ने उन्हें सामने देखा तो तस्वीर साफ हो गई कि माओवादी नेटवर्क तेजी से टूट रहा है। SSP इंदिरा कल्याण इलेसेला ने बताया कि ये चारों लंबे समय तक हिंसा में शामिल रहे, लेकिन अब इन्होंने मुख्यधारा की राह चुनी। पुलिस ने बताया कि सभी पर कुल 23 लाख का इनाम था। काजल उर्फ राजिता वेदाड़ा पर 8 लाख का इनाम था और वह गढ़चिरौली डिवीजन की कंपनी नंबर 10 में सक्रिय थी। मंजुला उर्फ लक्ष्मी पोटाई, विलास उर्फ चैतू उसेंडी और रामसाई उर्फ लखन मड़्रावी जैसे 3 माओवादी भी आत्मसमर्पण करने पहुंचे और सुरक्षा बलों ने इनके पुराने मामलों की पुष्टि की। पोटाई 2006 से 2025 के बीच 16 वारदातों में शामिल रही और 2009 के मदनवाड़ा कर्कोटी नरसंहार में उसकी भूमिका सामने आई, जिसमें SP विनोद चौबे और 28 जवान वीरगति को प्राप्त हुए। रामसाई ने 2004 से 42 से अधिक हमले चलाए और सुरक्षा बलों को कई बार निशाना बनाया।
छत्तीसगढ़ सरकार ने पुनर्वास नीति के तहत सभी आत्मसमर्पित माओवादियों को 50 हजार की त्वरित सहायता दी और आगे उन्हें रोजगार, सुरक्षा और पुनर्वास के अवसर देने की प्रक्रिया शुरू की। पुलिस ने बताया कि राज्य में पिछले दो साल में 2380 से अधिक माओवादी हथियार छोड़ चुके हैं और पूना मार्गेम अभियान इस बदलाव का बड़ा कारण बन रहा है। SSP ने साफ कहा कि सरकार सभी माओवादियों को वापस सामाजिक जीवन में लाना चाहती है और जो लौटना चाहते हैं उन्हें पूरी सुविधा मिल रही है।
उधर मध्यप्रदेश के बालाघाट में 2 नक्सलियों दीपक और रोहित ने CRPF कैंप कोरका में आत्मसमर्पण कर राज्य की तस्वीर बदल दी। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने वीडियो कांफ्रेंसिंग से इस कार्यक्रम को संबोधित किया और घोषणा की कि अब मध्यप्रदेश नक्सलवाद से मुक्त हो गया है। दीपक पर 29 लाख और रोहित पर 14 लाख का इनाम था और दोनों ने खुद कहा कि वे हिंसा छोड़कर सामान्य जीवन में लौटना चाहते हैं। SP आदित्य मिश्रा ने बताया कि अब जिले में कोई हार्डकोर नक्सली सक्रिय नहीं है और सुरक्षा बलों ने पूरे क्षेत्र को नियंत्रण में ले लिया है।
मुख्यमंत्री यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में 2026 तक नक्सलवाद खत्म करने का लक्ष्य तेजी से पूरा हो रहा है। उन्होंने कहा कि पुलिस बलों के साहस और बलिदान ने लाल सलाम को अंतिम सलाम दे दिया है और अब राज्य पूरी तरह शांति की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
इन दोनों घटनाओं ने साफ कर दिया कि माओवाद की हिंसक विचारधारा तेजी से कमजोर पड़ रही है और आत्मसमर्पण की बढ़ती लहर उसके पतन का स्पष्ट संकेत दे रही है।
