“सोमनाथ, नेहरू और 17 चिट्ठियाँ: मंदिर पुनर्निर्माण के समय ‘सेक्युलर’ जवाहरलाल को एक नहींं कई दिक्कतें थी, पचा नहीं पा रहे थे सनातन धाम की भव्य दिव्य वापसी”, ऑपइंडिया, जनवरी 12, 2026
“सोमनाथ मंदिर के रेनोवेशन के बाद मई 1951 में उद्घाटन कार्यक्रम के लिए तत्कालीन राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद को बुलाया गया था। हमने पिछले हिस्से में देखा कि कैसे प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने इतना हंगामा किया कि राष्ट्रपति खुद कार्यक्रम में जाएँ, फिर भी राजेंद्र प्रसाद कार्यक्रम में शरीक हुए। सोमनाथ मामले को लेकर नेहरू के कुछ और लेटर देखते हैं।
सोमनाथ मंदिर का प्रोग्राम पास आ रहा था। इसी बीच, अप्रैल 1951 में, ट्रस्ट के अध्यक्ष जामसाहेब दिग्विजय सिंह जडेजा ने कुछ पड़ोसी देशों में इंडियन एम्बेसी को लेटर लिखकर वहाँ की नदियों का पानी भेजने का आग्रह किया। इनका इस्तेमाल उद्घाटन के मौके पर किया जाना था। ‘सेक्युलर’ जवाहरलाल ने इस पर एतराज जताया। दर्द इतना ज़्यादा था कि नेहरू ने एक साथ कई लेटर फाड़ दिए।
नेहरू आगे कहते हैं, ‘मुझे समझ नहीं आता कि हम इस बात की चिंता क्यों नहीं करते कि दूसरे हमारे कामों, हमारी एक्टिविटीज के बारे में क्या सोचते हैं।’ वे आगे कहते हैं, ‘मुझे यह भी समझ नहीं आता कि चीन से नदी का पानी भारत कैसे लाया जाएगा? मैं इन सब से बहुत परेशान हूँ।’ चिट्ठी में आगे नेहरू मुंशी से पूछते हैं कि अगर ऐसी चिट्ठियाँ दूसरे उच्चायोग को भेजी गई हैं तो उन्हें बताया जाए, ताकि वे उन्हें भी चिट्ठी लिख सकें…..”
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