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Tuesday, August 16, 2022

असम में ‘बाढ़-जिहाद ‘ – कट्टर जिहादी मानसिकता के कारण सिलचर डूबा, लाखों का जीवन हुआ अस्त व्यस्त

असम इस समय भीषण बाढ़ से जूझ रहा है, प्रदेश का अधिकांश हिस्सा बाढ़ की चपेट में है, लाखों लोगो का जनजीवन अस्त व्यस्त हो चुका है।
आ चुके हैं। असम की भयावहता का अनुमान आप महज इसी से लगा सकते हैं कि आम जनजीवन अस्त-व्यस्त हो चुका है। राज्य सरकार, केंद्र सरकार, सेना और अन्य एजेंसी लोगो के बचाव में लगी हुई हैं, सरकार सैंकड़ो करोड़ खर्च कर रही है, ताकि लोगो का जीवन बचाया जा सके। यहाँ यह जानना महत्वपूर्ण है कि असम की बाढ़ में 6 अप्रैल से अब तक 34 जिलों में कम से कम 180 लोगों की मौत हो गई है और लगभग 90 लाख लोग इससे प्रभावित हुए हैं।

ऐसा ही एक मामला सिलचर में देखने को मिला है, जहां बराक नदी का तटबंध टूट जाने के कारण पूरा नगर बाढ़ में डूब गया है। अगर हम मात्र सिलचर की ही बात करें, तो यहां 10 दिनों से अधिक समय से पानी भरा हुआ है। दीमा हसाओ में भूस्खलन के बाद से एक महीने से अधिक समय तक रेल संपर्क टूटा हुआ है, वहीं नजदीकी मेघालय में भूस्खलन ने सड़क मार्ग से सिलचर की के संपर्क को तोड़ दिया है।

आपको कैसा लगेगा अगर हम कहें कि यह एक मानव निर्मित त्रासदी थी? इस विषय में एक चौकाने वाली जानकारी मिली है, कि इस बांध को तोड़ा नहीं गया था, बल्कि उसे काटा गया था और ऐसा करने वाले लोगों को अब हिरासत में लिया जा चुका है। पुलिस के अनुसार सिलचर में ऐसी भयानक स्थिति बाढ़ की वजह से नहीं, बल्कि बांध को काटे जाने की वजह से हुआ है, जिसे एक षड़यंत्र के द्वारा किया गया है।

पुलिस के अनुसार, इस भयानक षड्यंत्र को 6 जिहादी मानसिकता के लोगों ने रचा। इस सारे षड़यंत्र में सम्मिलित 6 में से 4 अपराधियों को गिरफ्तार कर लिया गया है। मुख्य आरोपी काबुल खान ने इस षड़यंत्र का खुलासा किया, और उसी की दी गयी जानकारी के आधार पर अन्य अपराधियों को हिरासत में लिया गया है, जिनके नाम हैं मिठु हुसैन लश्कर, नाजिर हुसैन लश्कर और रिपन खान।

पुलिस अधीक्षक रमनदीप कौर के अनुसार, इन जिहादियों ने बेतुकांदी बांध के तटबंध को काट दिया, जिसके कारण बराक नदी का पानी सिलचर में जा घुसा और हालात नियंत्रण से बाहर हो गए। फिलहाल पुलिस आरोपियों से पूछताछ कर रही है, और इस षड्यंत्र में लिप्त अन्य लोगो के बारे में जानकारी जुटा रही है।

मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने बताया था इसे मानव निर्मित आपदा

कुछ दिनों पहले असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने इस घटना को एक मानव निर्मित आपदा बताया था, और उन्होंने इसके लिए जिम्मेदार लोगो के विरुष कड़ी कानूनी कार्यवाही करने का आदेश भी दिया था। पिछले ही दिनों मुख्यनंत्री बाढ़ पीड़ित इलाकों के दौरे पर थे, जहां उन्हें एक वीडियो दिखाया गया था।

ऐसा बताया जा रहा है कि आरोपी काबुल खान ने यह वीडियो नियमों का उल्लंघन करते हुए फिल्माया था। इस वीडियो में कुछ लोग तटबंध से छेड़छाड़ करते हुए दिख रहे थे। मुख्यमंत्री ने कछार जिले में तटबंध स्थल का दौरा करते समय स्थानीय निवासियों को यह वीडियो दिखाया था और उनसे इसमें उपस्थित लोगो की पहचान करने का आग्रह किया था, ताकि इन लोगो पर कानूनी कार्यवाही की जा सके।

स्थानीय लोगो की सहायता से आरोपी काबुल खान की पहचान हो गई। जांच में सामने आया है कि तटबंध टूटने के लिए मुख्य रूप से 6 लोग उत्तरदायी थे। मुख्यमंत्री के निर्देश पर गुवाहाटी में सीआईडी ने इसविषय पर एक एक मामला दर्ज किया है। सीआईडी ​​के वरिष्ठ अफसर इस मामले की जांच कर रहे हैं, और सरकार की तरफ से सभी लिप्त लोगो के विरुद्ध कड़ी कार्यवाही करने के आदेश दिए गए हैं।

सूत्रों के अनुसार 24 मई को सिलचर से करीब 3 किलोमीटर दूर बेथुकंडी में एक वेटलैंड नाले के बारिश के पानी को बराक नदी में जाने देने के लिए तटबंध काट दिया गया था। इसके परिणामस्वरूप जून में मूसलाधार बारिश के बाद नदी का पानी सिलचर नगर में घुस गया था, और इससे 1 लाख से अधिक लोग प्रभावित हुए। तटबंध तोड़ने को मामले में अज्ञात बदमाशों के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई थी।

बाढ़ जिहाद – अब हिन्दू कहाँ जाएं और क्या करें?

आज जहां देश भर में जिहादियों द्वारा की जा रही हिंसक घटनाओं से देश त्रस्त हो चुका है, ऐसे में यह बड़ी ही हैरान करने करने वाली घटना
ने देश भर को किंकर्तव्यविमूढ़ कर दिया है। जिहादी मानसिकता के लोग येन केन प्रकारेण काफिरों (हिन्दुओं) का सफाया करना चाहते हैं, और इसके लिए यह अब कोई भी कदम उठाने से पीछे नहीं हट रहे हैं। हम इस बात को लेकर अत्यंत चिंतित हैं, कि इस द्वेष का हल क्या निकलेगा और कब तक हिन्दुओं को जिहादी मानसिकता के कारण नुकसान उठाना पड़ेगा।

सरकार ऐसे आरोपियों को गिरफ्तार कर लेगी, उन्हें सजा दिला देगी, लेकिन इनकी निकृष्ट मानसिकता को जब तक ख़त्म नहीं किया जाएगा, यह लोग ऐसे ही हिन्दुओं पर आघात करते ही रहेंगे। ऊपर से हमारे देश का प्रशासन और न्यायपालिका भी इस विचारधारा के उन्मूलन की तरफ उदासीन है, ऐसे में हिन्दू कहाँ जाए और किस्से अपनी व्यथा कहे ?

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