सारांश: ओपइंडिया हिंदी के लेखक अर्पित त्रिपाठी ब्लूमबर्ग के एंडी मुखर्जी के उस लेख पर जवाब देते हैं, जिसमें भारत में iPhone के उत्पादन को लेकर सवाल उठाए गए हैं। लेखक 1983 की मारुति 800 का उदाहरण देते हैं, जिसमें शुरुआत में लगभग 3 प्रतिशत स्थानीय सामग्री थी और लगभग 10 वर्षों में 94.1 प्रतिशत पुर्जे भारत में बनने लगे। फिर वे बताते हैं कि 2009 में चीन में iPhone का स्थानीय हिस्सा केवल 3.6 प्रतिशत था, जो बाद में 30 प्रतिशत से ऊपर गया, और तर्क देते हैं कि मैन्युफैक्चरिंग आधार धीरे-धीरे बनता है।
क्यों अहम है: यह लेख भारत की विनिर्माण क्षमता पर पश्चिमी मीडिया की धारणाओं को चुनौती देता है और चीन व भारत के औद्योगिक इतिहास की तुलना के ज़रिये दिखाता है कि आत्मनिर्भर उत्पादन इकोसिस्टम धीरे-धीरे बनता है। यह पश्चिमी आर्थिक मीडिया के भारत-विरोधी प्रोपेगेंडा के आरोपों से भी जुड़ता है।
“पहले रघुराम राजम की ‘पेचकसबाजी’, अब Bloomberg ने iPhone पर फैलाया झूठ: जानें भारत की मैन्युफैक्चरिंग पर कैसे फैलाया जा रहा चीनी प्रोपेगेंडा?” — OpIndia Hindi, 1 नवंबर 2026
आपने मारुति सुजुकी की 800 (Maruti Suzuki 800) कार तो जरूर देखी होगी। भारत में लाखों फैमिलीज की पहली कार। साल 1983 में लाँच हुई थी। लेकिन आप सोच रहे होंगे ब्लूमबर्ग (Bloomberg) के भारत पर प्रोपेगेंडा की हेडलाइन के साथ आख़िर यहाँ 45 साल पहले की मारुति की बात क्यों हो रही है।
ये इसीलिए हो रही है ताकि इससे समझ आए कि मैन्यूफेक्चरिंग (उत्पादन) कोई एक दिन का खेल नहीं है। जब मारुति की ये गाड़ी भारत में बनना शुरू हुई थी तो क्या आपको पता है कि इसमें सिर्फ़ 3% के आसपास लोकल कंटेंट था। यानी 97% पार्ट्स बाहर से आते थे। भारत से सिर्फ MRF के टायर्स और क्लोराइड इंडिया की बैटरी ली गई थी जो इस कार में लगी थी।
इंजन और ट्रांसमिशन तो काम्प्लेक्स पार्ट्स हैं, शीशे, स्टीयरिंग, सीट्स और लगभग 97% पार्ट्स जापान से ही आए थे और भारत में उन्हें एक साथ जोड़ दिया गया था। अब अगर आज के ब्लूमबर्ग, एंडी मुखर्जी और रघुराम राजन की लैंग्वेज में कहें तो ये ‘पेचकसबाजी‘ होगी।…
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