“हम ‘लव जिहाद’ कहें तो हो जाते हैं महिला विरोधी, तुम्हारे भाईजान गैर मुस्लिम लड़कियों को नोंच-खसोट लें तो भी न हो चर्चा… आरफा जी बढ़िया है आपकी ‘स्ट्रेटजी’”, ऑपइंडिया, अप्रैल 22, 2026
“आरफा खानुम शेरवानी खुद को मुस्लिमों का ‘मुन्जी’ समझती हैं। जहाँ वो हर बार किसी मुस्लिम पहचान वाले अपराधी के मामले को उठाती हैं, और एकतरफा पक्ष लेकर सोशल मीडिया पर मुखर हो जाती हैं। लेकिन आरफा को जमीन पर क्या हो रहा है उससे कोई मतलब नहीं होता, उससे ज्यादा उन्हें अपने तय नैरेटिव को आगे बढ़ाने की जल्दी रहती है। यही वजह है कि विवादित मुद्दों पर बोलते हुए वह फैक्ट्स मिस कर देती हैं और नतीजतन उनके ‘विचार’ लड़खड़ा जाते हैं।
अब उनके इस नए बयान को ही देख लीजिए। आरफा ने ‘लव जिहाद‘ को सीधे-सीधे हिंदू महिलाओं का अपमान बता दिया। मतलब जो भी इस मुद्दे पर सवाल उठा रहा है, वो महिलाओं को समझहीन मान रहा है, यहाँ यही बताने की कोशिश की गई। लेकिन आरफा, बात इतनी सीधी नहीं है जितनी आप बना रही हैं। हर चीज को एक लाइन में समेट देना आसान होता है, लेकिन क्या इससे सच भी उतना ही आसान हो जाता है?
आरफा बार-बार ‘लव जिहाद‘ को महिलाओं की आजादी का मुद्दा बताकर पूरी बहस को वहीं खत्म करना चाहती हैं। लेकिन क्या जो लोग इस पर सवाल उठा रहे हैं, उनके पास कोई वजह नहीं है? आरफा, क्या आप ‘महिला की स्वतंत्रता’ की बात कहकर आगे बढ़ जाएँगी? असली बात ये है कि आप सवालों का जवाब देने के बजाए सवाल उठाने को ही कठघरे में खड़ा कर देती हैं और यही तरीका इस पूरे मुद्दे को और उलझा देता है…….”
पूरा लेख ऑपइंडिया पर पढ़ें
