गुवाहाटी के चलचित्रम महोत्सव में ‘टॉय गन’और ‘द साइलेंट क्राइसिस’ को सर्वश्रेष्ठ पुरस्कार

गुवाहाटी (असम): नॉर्थ ईस्ट की सामाजिक वास्तविकताओं, सांस्कृतिक पहचान और मानवीय संवेदनाओं को सिनेमा के जरिए सामने लाने वाली फिल्मों ने 10वें चलचित्रम राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (CNFF 2026) में प्रमुख पुरस्कार हासिल किए। मणिपुर के परशुराम थिंगनम निर्देशित लघु फीचर फिल्म ‘टॉय गन’ को पूर्वोत्तर भारत श्रेणी में सर्वश्रेष्ठ लघु फीचर फिल्म और असम की स्मिताक्षी बरुआ गोस्वामी निर्देशित वृत्तचित्र ‘द साइलेंट क्राइसिस’ को सर्वश्रेष्ठ वृत्तचित्र का पुरस्कार मिला।
शेष भारत श्रेणी में सोमनाथ बाग निर्देशित ‘गाछ पाथर’ सर्वश्रेष्ठ लघु फीचर फिल्म और हरिकिशन एम.वी. निर्देशित ‘द रिडेम्पशन’ सर्वश्रेष्ठ वृत्तचित्र चुनी गई। दो दिवसीय महोत्सव का समापन 25 अक्टूबर को गुवाहाटी के काहिलिपारा स्थित ज्योति चित्रबन फिल्म स्टूडियो परिसर में हुआ। समापन समारोह में असम की कैबिनेट मंत्री नीलिमा देवी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के असम क्षेत्र प्रचार प्रमुख डॉ. सुनील मोहंती उपस्थित रहे।
आयोजकों के अनुसार, निर्णायक मंडल ने पूर्वोत्तर की फिल्मों के लिए सात पुरस्कार श्रेणियों और शेष भारत की फिल्मों के लिए दो श्रेणियों में विजेताओं का चयन किया। कुल नौ पुरस्कार श्रेणियों में चुने गए फिल्मकारों को मंत्री नीलिमा देवी ने पुरस्कृत किया।
अन्य पुरस्कारों में ‘इन 9 मंथ्स’ के लिए सुमी सैकिया को सर्वश्रेष्ठ निर्देशक, ‘अंकुर’ के लिए सिद्धार्थ शर्मा को सर्वश्रेष्ठ पटकथा, ‘द खमयांग स्टोरी’ के लिए रूपमज्योति सैकिया को सर्वश्रेष्ठ छायाकार और ‘अनंत यात्रा’ के लिए अंबरीश बरकतकी को सर्वश्रेष्ठ संपादक का पुरस्कार मिला। निथन निर्देशित ‘टेक अवे’ को निर्णायक मंडल की ओर से विशेष उल्लेख दिया गया।
समापन समारोह में कैबिनेट मंत्री नीलिमा देवी ने कहा कि लघु फीचर फिल्म और वृत्तचित्र बनाना चुनौतीपूर्ण कार्य है। उन्होंने फिल्मकारों से शहीदों तथा महान विभूतियों के जीवन पर फिल्में बनाने का आग्रह किया, ताकि नई पीढ़ी देश के इतिहास, सांस्कृतिक परंपराओं और विरासत से परिचित हो सके।
ड. सुनील मोहंती ने आरोप लगाया कि कुछ राष्ट्र-विरोधी तत्व भारत और उसकी समृद्ध विरासत के बारे में नकारात्मक धारणाएं फैलाने के लिए सिनेमा का इस्तेमाल करने की कोशिश करते हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि चलचित्रम फिल्मकारों को भारतीय संस्कृति और विरासत पर केंद्रित ऐसी रचनाएं तैयार करने के लिए प्रेरित करेगा, जिन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी दर्शक मिल सकें।
महोत्सव की केंद्रीय थीम ‘हमारी विरासत, हमारा गौरव’ (Our Heritage, Our Pride) थी। इसके तहत सांस्कृतिक पहचान, सामाजिक सरोकारों और राष्ट्रीय विरासत से जुड़े विषयों पर आधारित फिल्मों को मंच दिया गया।
24 और 25 अक्टूबर को आयोजित महोत्सव में प्रतिस्पर्धी और गैर-प्रतिस्पर्धी श्रेणियों में कुल 44 वृत्तचित्रों और लघु फीचर फिल्मों का प्रदर्शन किया गया। उद्घाटन के दिन जापानी फिल्म ‘किंटसुगी’ (Kintsugi) दिखाई गई। नोमेन नोमेन निर्देशित यह फिल्म एक युवा पेशेवर की दुखद यात्रा पर आधारित है, जो अतीत के दुखों और बचपन के आघातों से जूझता है तथा अंततः मृत्यु को स्वीकार करने और शांति पाने की स्थिति तक पहुंचता है।

महोत्सव का समापन उज्बेक फिल्मकार असदबेक अकमल ओगली निर्देशित ‘प्रेजेंट’ (Present) की स्क्रीनिंग के साथ हुआ। फिल्म में कैंसर से जूझ रहे कुछ युवाओं को एक जोकर के साथ बिताए पलों में खुशी मिलती है, लेकिन कहानी आगे बढ़ने पर दुखद मोड़ लेती है और एक अप्रत्याशित सच सामने आता है। दोनों फिल्मों ने महोत्सव में अंतरराष्ट्रीय सिनेमा और विविध मानवीय अनुभवों को स्थान दिया।
विश्व संवाद केंद्र-असम की इकाई चलचित्रम की ओर से आयोजित महोत्सव का उद्घाटन राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता फिल्म निर्देशक डॉ. सांत्वना बरदोलोई ने किया। उद्घाटन समारोह में ज्योति चित्रबन फिल्म सोसाइटी के अध्यक्ष विद्यासागर ने वरिष्ठ फिल्म पत्रकार हेमचंद्र डोले द्वारा संपादित महोत्सव की स्मारिका का विमोचन किया।
भारत रत्न डॉ. भूपेन हजारिका की जन्म शताब्दी के अवसर पर फिल्मकार बॉबीता शर्मा निर्देशित ‘भूपेन दा अनकट’ का विशेष प्रदर्शन भी किया गया। यह प्रस्तुति महान कलाकार के योगदान और सांस्कृतिक विरासत को याद करने तथा नई पीढ़ी तक पहुंचाने के प्रयास का हिस्सा थी।
महोत्सव की प्रीव्यू कमेटी में झूलन कृष्ण महंत, बिभु दत्ता, हितेन ठाकुरिया, दीपक दत्ता और बबीता शर्मा शामिल थे। निर्णायक मंडल में दिल्ली के विष्णु शर्मा, त्रिपुरा के सुजीत देबबर्मा और असम के रामेन बोरा थे। आयोजन के दौरान चलचित्रम के स्वयंसेवकों के योगदान को भी स्वीकार किया गया।
समापन पर विश्व संवाद केंद्र-असम के सचिव किशोर शिवम, महोत्सव के सचिव भागवत प्रीतम ने आयोजन में सहयोग देने वाले सभी लोगों के प्रति आभार व्यक्त किया। आयोजकों ने उम्मीद जताई कि चलचित्रम उभरते फिल्मकारों को प्रोत्साहित करने, सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने और वंचित समुदायों की आवाज को सिनेमा के माध्यम से सामने लाने के प्रयास जारी रखेगा।
महोत्सव के निदेशक ने कहा कि चलचित्रम का उद्देश्य केवल फिल्मों का प्रदर्शन या पुरस्कार वितरण करना नहीं, बल्कि प्रतिभाशाली और उभरते फिल्मकारों तथा वृत्तचित्र निर्माताओं को व्यापक मंच उपलब्ध कराना भी है। उन्होंने नॉर्थ ईस्ट के युवा फिल्मकारों से महोत्सव में दिखाई जाने वाली देश-विदेश की फिल्मों का भरपूर लाभ उठाने का आग्रह किया। उनके मुताबिक, विभिन्न भाषाओं, सामाजिक पृष्ठभूमियों और सांस्कृतिक अनुभवों से जुड़ी फिल्मों को देखने से युवाओं को कहानी कहने की शैली, तकनीकी पक्ष और फिल्म निर्माण की बारीकियां समझने का अवसर मिलता है। इससे वे अपने काम का मूल्यांकन कर सकते हैं, अनुभव बढ़ा सकते हैं और अपनी रचनात्मक क्षमता को निखार सकते हैं।

Subscribe to our channels on WhatsApp, Telegram &  YouTube. Follow us on Twitter and Facebook

Related Articles

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Latest Articles

Sign up to receive HinduPost content in your inbox
Select list(s):

We don’t spam! Read our privacy policy for more info.