“आधुनिक बिहार के ‘शिल्पकार’ की विदाई, 20 साल के ‘सुशासन’ के बाद जा रहे नीतीश: जानें- महिला शिक्षा से सुरक्षा तक, कैसे बदली राज्य की तकदीर”, ऑपइंडिया, मार्च 07, 2026
“राजनीति की बिसात पर जब कोई मोहरा अपनी चाल चलता है, तो हार-जीत के आँकड़े गिने जाते हैं। लेकिन जब कोई जननायक विदा लेता है, तो आँकड़े नहीं, आँखें बोलती हैं। भारतीय राजनीति जब कोई नेता पद छोड़ता है, तो अक्सर सत्ता के गलियारों में सन्नाटा पसर जाता है, लेकिन पार्टी के कार्यकर्ताओं की आँखों में आँसू कम ही देखे जाते हैं। राजनीति की इस काजल की कोठरी में जहाँ हर कदम पर दाग लगने का डर रहता है, वहाँ एक नाम ऐसा है जिसने उजले कपड़े पहनकर प्रवेश किया और दो दशकों के सफर के बाद भी बेदाग निकल आया। वह नाम है ‘नीतीश कुमार’।
जिन पर न तो कभी परिवारवाद का साया पड़ा और न ही भ्रष्टाचार का कोई छींटा। आज जब नीतीश कुमार बिहार की सत्ता की बागडोर छोड़कर राज्यसभा जाने की तैयारी कर रहे हैं, तो यह केवल एक नेता का पद छोड़ना नहीं है, बल्कि बिहार के राजनीतिक इतिहास के एक स्वर्णिम ‘नीतीश युग’ का समापन है। नीतीश कुमार का यह कदम बिहार की राजनीति में एक बड़े बदलाव का प्रतीक है।
2005 में जब उन्होंने मुख्यमंत्री की कुर्सी संभाली थी, तब बिहार प्रशासनिक कमजोरी, जातीय हिंसा और फिरौती जैसे अपराधों के गहरे संकट में था। आज 20 साल बाद, बिहार ने स्थिरता, विकास और संस्थागत मजबूती की एक लंबी दूरी तय कर ली है। नीतीश कुमार ने घोषणा की है कि वे मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देकर राज्यसभा जाएँगे, ताकि वे संसद के दोनों सदनों और राज्य विधानमंडल के दोनों सदनों का सदस्य बनने की अपनी इच्छा को पूरा कर सकें। उनके इस प्रस्थान के साथ ही बिहार के विकास की वो गाथा याद आती है, जिसे उन्होंने अपने विजन और कठिन परिश्रम से लिखा है……”
पूरा लेख ऑपइंडिया पर पढ़ें
