“पश्चिम बंगाल: गंगासागर में स्नान के लिए 47 बांग्लादेशी हिंदुओं ने की घुसपैठ, गुम हुआ बेटा तो खुला राज”, जागरण, जनवरी 14, 2206
“मकर संक्रांति पर पुण्य स्नान करने गंगासागर आने के लिए बांग्लादेशी हिंदुओं के एक बड़े वर्ग को घुसपैठ का सहारा लेना पड़ता है। कारण ये है कि उनमें से अधिकांश के अब तक पासपोर्ट नहीं बन पाए हैं और जिनके पास हैं, उन्हें इस ‘उद्देश्य’ के लिए वीजा नहीं मिल पाता है।
गंगासागर में चिह्नित हुई एक बांग्लादेशी महिला इसका खुलासा किया है। नयना दास नाम की महिला ने बताया, ‘मैं पुण्य स्नान करने अपने तीन साल के बेटे रूद्र व 46 अन्य लोगों के साथ गोपाल नामक एजेंट की मदद से अवैध तरीके से सीमा पार करके यहां आई थी। यहां मेरा बच्चा गुम हो गया था। उसे तलाशने के लिए मजबूरन मुझे अपनी असली पहचान बतानी पड़ गई। मेरे साथ जो लोग आए हैं, उनमें ज्यादातर बुजुर्ग हैं। भारत आने के बाद सब अलग-अलग निकल गए। साथ में होने पर आसानी से पहचान में आ जाने का डर था।’
‘हम हमारी आस्था के महापर्व मकर संक्रांति पर यहां पुण्य स्नान करने गलत तरीके से आना नहीं चाहते, लेकिन दूसरा कोई उपाय नहीं है। हमारा न तो पासपोर्ट बनता है और न इसके लिए वीजा मिलता है। बांग्लादेश में वर्तमान में जिस तरह की परिस्थितियां हैं, उसमें तो वीजा मिलना लगभग असंभव है……”
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