“ ‘मजारों पर हिंदुओं को रुमाल बांधे देखता हूं तो दर्द होता है, बाबा बागेश्वर ने कोटा में किस दर्द की बात”, नवभारत टाइम्स, जनवरी 25, 2026
“बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री अपने बयानों को लेकर अक्सर चर्चा में रहते हैं। वर्तमान में वे कोटा में श्रीराम कथा करने पहुंचे हैं। यहां धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने यहां धर्मांतरण और सनातन संस्कृति को लेकर खुलकर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि जब वे हिंदू- भाइयों को सिर पर रुमाल बांधने वालों या चादर चढ़ाने के लिए जाते देखते हैं, तो उन्हें पीड़ा होती है। धीरेंद्र शास्त्री ने आगे धर्मांतरण के मुद्दे पर अपनी पीड़ा जताई। उन्होंने कहा कि चमत्कारों के नाम पर धर्मांतरण कराना गलत है। उन्होंने आगे कहा कि हिंदुओं को रूमाल वालों के पास जाते देखता हूं, तो बहुत बुरा लगता है।
सनातन धर्म किसी से कम नहीं-धीरेंद्र शास्त्री
धीरेंद्र शास्त्री ने इस दौरान यह भी कहा कि सनातन धर्म किसी से कम नहीं है। शास्त्री ने कहा कि बालाजी ने उन्हें इसीलिए सिद्धि दी है ताकि धर्म विरोधियों की ठठरी और गठरी बांधी जाए। उन्होंने कहा कि हम हिंदुओं से प्रार्थना करतेहैं कि अपने बजरंगबली किसी से कम नहीं हैं। ऐसी कोई गली नहीं, जहां बजरंगबली की चली नहीं… मैं पूरेविश्वास के साथ कह सकता हूं कि सनातनियों को छोड़कर किसी भी मजहब के संतों में इतनी हिम्मत नहीं हैकि वे बागेश्वर धाम सरकार का सामना कर लें। यह मैं किसी अहंकार में नहीं, बल्कि हनुमान जी की कृपा के भरोसे कह रहा हूं।
आज समाप्त हुई कथा, उमड़े श्रद्धालुओं की भीड़
बता दें कि कोटा में पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की 3 दिवसीय ‘श्रीराम कथा’ और ‘गौमाता महोत्सव’ का आयोजन किया गया….. ”
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