“लाखों मृत मतदाता, फर्जी नाम और अवैध घुसपैठिए: पश्चिम बंगाल में क्यों जरूरी है SIR, पढ़ें ऑपइंडिया का रिसर्च पेपर”, ऑपइंडिया, जनवरी 26, 2026
“ऑपइंडिया ने एक शोध पत्र (रिसर्च पेपर) तैयार किया है जो पश्चिम बंगाल में सामने आ रहे वोटर लिस्ट की दिक्कतों की पड़ताल करता है। वोटर लिस्ट से जुड़ा यह संकट उस समय सामने आया है, जब चुनाव आयोग (ECI) देशभर में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) यानी विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान चला रहा है। यह एक बड़ी और कानूनी रूप से अनिवार्य प्रक्रिया है, जिसके तहत 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में मतदाता सूचियों की गहन समीक्षा शुरू की गई है।
राष्ट्रीय स्तर पर SIR लागू करने का फैसला बिहार में हुए SIR के बाद लिया गया। बिहार में इस अभ्यास के दौरान वोटर लिस्ट में गंभीर संरचनात्मक गड़बड़ियाँ सामने आई थीं जैसे बिना मिलान वाली प्रविष्टियाँ, डुप्लीकेट वोटर और संदिग्ध विदेशी नागरिकों के नाम। हालाँकि, पश्चिम बंगाल में सामने आई तस्वीर इससे कहीं ज्यादा गंभीर और चौंकाने वाली साबित हो रही है।
चुनाव आयोग की मैपिंग प्रक्रिया में पश्चिम बंगाल में भारी विसंगतियाँ पहले ही सामने आ चुकी हैं। SIR के दौरान लगभग 24.16 लाख वोटरों को मृत पाया गया है। वहीं, UIDAI (आधार प्राधिकरण) ने चुनाव आयोग को जानकारी दी है कि राज्य में करीब 34 लाख आधार कार्ड धारकों को मृत घोषित किया जा चुका है। इसके अलावा 13 लाख ऐसे मृत व्यक्ति भी सामने आए हैं जिनके पास आधार कार्ड नहीं था, यह जानकारी प्रक्रिया के दौरान साझा की गई है……..”
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