“महाराष्ट्र का धर्मांतरण-विरोधी विधेयक: “लव जिहाद” के नाम पर संदेह को कानून का रूप देना”, सब रंग इंडिया, मार्च 11, 2026
“प्रस्तावित ‘धर्म स्वतंत्रता अधिनियम, 2026’ का उद्देश्य कथित ज़बरन धर्मांतरण को कठोर दंड और राज्य की दखलंदाज़ी वाली निगरानी के साथ अपराध घोषित करना है।
महाराष्ट्र मंत्रिमंडल द्वारा “धर्म स्वतंत्रता अधिनियम, 2026” के मसौदे को मंजूरी दिया जाना देश में तेजी से उभरती उस विधायी प्रवृत्ति का ताजा संकेत है, जिसमें कथित “लव जिहाद” के खतरे को आधार बनाकर धर्मांतरण-विरोधी कानूनों को तैयार किया जा रहा है। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, 5 मार्च को मंजूर किया गया यह प्रस्तावित कानून “गैर-कानूनी” धार्मिक धर्मांतरणों को अपराध की श्रेणी में लाएगा, जिसके लिए सात साल तक की जेल और 5 लाख रूपये तक के जुर्माने का प्रावधान है। साथ ही, यह धार्मिक चुनाव और अलग-अलग धर्मों के लोगों के बीच रिश्तों को नियंत्रित करने वाला एक नियामक ढांचा भी पेश करेगा।
इस मसौदा कानून के तहत, जो भी व्यक्ति किसी दूसरे धर्म में धर्मांतरण करना चाहेगा, उसे एक अधिकारी से पहले से अनुमति लेनी होगी और 60 दिन का नोटिस देना होगा। इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, इसके बाद 25 दिनों के भीतर धर्मांतरण का पंजीकरण करवाना जरूरी होगा, वरना इसे रद्द या अमान्य घोषित किए जाने का खतरा रहेगा। यह कानून आगे यह भी अनिवार्य करता है कि यदि धर्मांतरण करने वाले व्यक्ति का कोई रिश्तेदार जबरदस्ती का आरोप लगाता है, तो पुलिस को तुरंत FIR (प्रथम सूचना रिपोर्ट) दर्ज करनी होगी और जांच शुरू करनी होगी। सबसे अहम बात यह है कि इस प्रस्तावित कानून के तहत आने वाले अपराध गैर-जमानती हैं, जिससे आरोपियों के लिए मुश्किलें और भी ज्यादा बढ़ जाएगी…….”
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