“जंगल ही नहीं, शहरों से भी होंगे साफ… पूरा इकोसिस्टम होगा खत्म ताकि फिर कभी पनप न सके वामपंथी आतंक: नक्सल मुक्त भारत के बाद का रोडमैप तैयार”, ऑपइंडिया, जनवरी 14, 2026
“31 मार्च 2026… यह सिर्फ एक तारीख नहीं, बल्कि भारत के आंतरिक सुरक्षा इतिहास में एक निर्णायक लक्ष्य है- ‘नक्सल मुक्त भारत’। केंद्र सरकार, सुरक्षा एजेंसियाँ और राज्य सरकारें पिछले एक दशक से इस दिशा में लगातार और सुनियोजित तरीके से आगे बढ़ रही हैं। अब जब नक्सलवाद अपने अंतिम गढ़ों तक सिमट चुका है, तो सरकार ने सिर्फ इसे हराने तक खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि यह भी सुनिश्चित करने की तैयारी कर ली है कि वामपंथी आतंकवाद दोबारा सिर न उठा सके।
सरकार ने इसके लिए विस्तृत एजेंडा बनाया है जिनमें अर्बन नक्सलियों पर लगाम लगाना भी शामिल है। सरकार के इस एजेंडा पर विस्तार से चर्चा करें उससे पहले बताते हैं कि किस तरह सरकार इस नक्सलियों के खात्मे के लिए पूरी तरह कमर कस चुकी है। 14 जनवरी 2026 को ही छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में 29 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है। ये सरकार की नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई लड़ाई का एक मामूली हिस्सा है आँकड़े पर गौर करें तो दिखता है कि किस तरह बीते वर्ष में नक्सलवाद पर सबसे बड़ा प्रहार किया गया था।
नक्सली हिंसा में ऐतिहासिक गिरावट
पिछले एक दशक में सुरक्षा बलों और सरकार की साझा कोशिशों से नक्सली हिंसा में 53 प्रतिशत की बड़ी कमी दर्ज की गई है। अगर पिछले दो दशकों की तुलना करें तो साल 2004 से 2014 के बीच जहाँ हिंसा की 16,463 घटनाएँ हुई थीं, वहीं 2014 से 2024 के बीच यह घटकर 7,744 रह गईं। इस दौरान सुरक्षाकर्मियों की शहादत में 73 प्रतिशत (1,851 से घटकर 509) और आम नागरिकों की जान जाने की घटनाओं में 70 प्रतिशत (4,766 से घटकर 1,495) की भारी गिरावट आई है, जो प्रभावित इलाकों में लौटती शांति का स्पष्ट संकेत है……”
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