“2026: जब भारत के नेतृत्व में पश्चिमी प्रभुत्व की विश्व व्यवस्था दरकने लगेगी”, ऑपइंडिया, दिसंबर 27, 2025
“जब परिधि में खड़े देश केंद्र की भाषा बोलने लगते हैं, तभी वैश्विक शक्ति संतुलन बदलता है। 2026 वही वर्ष है, क्योंकि 1 जनवरी से भारत ब्रिक्स (BRICS) की अध्यक्षता सँभालने जा रहा है।
औपचारिक रूप से यह दायित्व एक वर्ष- यानी 31 दिसंबर 2026 तक भारत के पास रहेगा। लेकिन इसे केवल कैलेंडर आधारित जिम्मेदारी समझना भारी भूल होगी। भारत की यह अध्यक्षता कोई रूटीन कूटनीतिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि सभ्यतागत और भू-राजनीतिक नेतृत्व परिवर्तन है। यह दायित्व भारत को उस समय मिल रहा है, जब वह वैश्विक शक्ति संतुलन के खेल में मूकदर्शक नहीं, बल्कि नियम लिखने की स्थिति में खड़ा है।
वह समय बीत चुका है जब पश्चिमी मीडिया ‘ढीला-ढाला क्लब’ कहकर ब्रिक्स का उपहास करता था। अब वह केवल ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका तक सीमित नहीं है। सऊदी अरब, यूएई, ईरान और मिस्र जैसे देशों के प्रवेश ने इसे पेट्रो-डॉलर व्यवस्था के वास्तविक विकल्प के रूप में खड़ा कर दिया है। इस समूह ने 2024 में दुनिया का लगभग 42 प्रतिशत तेल का उत्पादन किया है…..”
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