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Saturday, February 24, 2024

कभी प्लेबॉय की छवि वाले इमरान खान अब ठहराते हैं लड़कियों के वस्त्रों को बलात्कार के लिए जिम्मेदार

पकिस्तान के प्रधानमंत्री ने एचबीओ पर न्यूज़ प्रोग्राम एक्सिओस (Axios) के साथ दिए गए एक साक्षात्कार में महिलाओं को लेकर एक बेहद ही आपत्तिजनक बयान दिया है, जिसके कारण उनकी आलोचना हर जगह हो रही है। हालांकि इस साक्षात्कार के कई पहलुओं की आलोचना हो रही है, जैसे चीन में उइगुर मुसलमानों के विषय में दिए गए बयान पर। दरअसल उनसे प्रश्न किया गया था कि वह पश्चिम में इस्लामोफोबिया की तो बहुत आलोचना करते रहते हैं, परन्तु वह एक बार भी चीन में शिंगजैंग क्षेत्र में मुस्लिमों के साथ होने वाले नरसंहार पर मुंह नहीं खोलते हैं। तो उन्होंने कहा कि वह चीन से ऐसे मामलों पर “बंद दरवाजों में” बात करना पसंद करते हैं। और इमरान खान का जोर कश्मीर पर अधिक था।

इमरान खान इस बात पर कोई भी संतोषजनक जबाव नहीं दे पाए कि आखिर क्यों चीन द्वारा मुसलमानों पर किये जा रहे अत्याचारों पर वह मुंह नहीं खोल रहे हैं। उन्होंने बस यही कहा कि चूंकि चीन ने उनकी मदद बहुत कठिन समय में की है, इसलिए वह चीन के साथ ऐसी कोई भी बात “बंद दरवाजों” के पीछे करते हैं।

हालांकि उनके देश में उनकी आलोचना औरतों को लेकर उनके बयान को लेकर हो रही है। इमरान खान ने कहा कि लड़कियों के कपड़ों के कारण ही पाकिस्तान में यौन उत्पीडन की घटनाएँ बढ़ रही हैं।

इमरान खान ने कहा कि अगर औरतें बहुत ही छोटे कपड़े पहन रही हैं, तो इसका असर आदमियों पर होगा ही, क्योंकि वह रोबोट नहीं हैं।

और फिर उन्होंने कहा कि यह निर्भर करता है कि आप किस सोसाइटी में रहते हैं। उन्होंने कहा कि वहां पर डिस्को क्लब्स आदि नहीं हैं तो ऐसे कपड़े क्यों पहने जाएं।

इमरान खान के इस साक्षात्कार के बाद सोशल मीडिया पर उनके खिलाफ जैसे एक अभियान छिड़ गया है। और नागरिक समाज से लेकर पत्रकार तक कई लोग उनकी आलोचना कर रहे हैं।

इंटरनेश्नल कमीशन ऑफ ज्यूरिस्ट, दक्षिण एशिया की लीगल एडवाइज़र रीमा कौसर ने आलोचना करते हुए ट्वीट किया कि वह प्रधानमंत्री द्वारा इस प्रकार बार बार बलात्कार पीड़ितों को ही दोषी ठहराए जाने को लेकर निराश हैं। उन्होंने कहा कि यह बहुत शर्मनाक है कि प्रधानमंत्री ने यह कहा कि “चूंकि आदमी रोबोट नहीं हैं, तो अगर वह औरतों को तंग कपड़ों में देखेंगे, तो वह आकर्षित होंगे ही, और इससे बलात्कार ही होगा।”

सोशल मीडिया पर पत्रकार बेनजीर शाह ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री की आलोचना करते हुए लिखा कि प्रधानमंत्री का बलात्कार पर दिया गया बयान खतरनाक और तथ्यों के आधार पर गलत है क्योंकि उन्होंने कहा कि हमारे अध्ययन में पाया गया है कि अधिकतर बलात्कारियों को तो यह याद ही नहीं रहता है कि पीड़ितों ने क्या पहना था।

इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि इमरान खान एक तरफ यह चाहते हैं कि हमारी अर्थव्यवस्था का आधार पर्यटन हो, तो वहीं दूसरी ओर वह अपने ही देश के आदमियों को ऐसे प्रस्तुत कर रहे हैं, जैसे वह टेम्पटेशन का शिकार हो जाते हैं और खुद पर कंट्रोल नहीं कर पाते, तो ऐसे में कौन महिला आएगी?

एक यूजर ने कहा कि ऐसा लगता है कि इमरान खान ने जो कहा है, वह यह स्वीकार करने जैसा है कि पाकिस्तानी सोसाइटी में इतने सारे संभावित बलात्कारी हैं कि हमें अपनी औरतों को हर समय छिपाकर रखना होता है।

शेरी रहमान ने भी ट्वीट करते हुए कहा कि क्या प्रधानमंत्री यह बता सकते हैं कि उन्होंने समाज में हिंसा और बलात्कार की पीड़ितों को ही कोसना क्यों चुना? यह उनके स्तर पर ठीक नहीं है।

पर ऐसा नहीं है कि आलोचना ही हो रही हो, दबे स्वरों में इमरान खान का समर्थन भी कुछ लोग कर रहे हैं। और कह रहे हैं कि औरतों को परदे में रहना चाहिए।

क्रिकेटर से राजनेता और फिर प्रधानमंत्री बने इमरान खान का अपना इतिहास भी प्ले बॉय का रहा है और भारतीय लिबरल समाज उनका बहुत दीवाना है। वह इतना दीवाना है कि उनकी तीसरी शादी को तो स्वीकारता ही है, बल्कि उस तीसरी शादी की ऐसी बीवी को भी स्वीकारता है जिसका आज तक चेहरा नहीं देखा। और भारत का लिबरल समाज उस स्वतंत्र स्त्री के खिलाफ जाकर खड़ा हो जाता है, जिसने इस कट्टरपंथ का सामना किया।

इमरान खान और उनकी पत्नियां

इमरान खान की पहली पत्नी जेमिमा ने अप्रेल में इमरान खान द्वारा दिए गए इस बयान का विरोध किया था जब इमरान खान ने पाकिस्तान में बलात्कार के मामले बढ़ने पर बॉलीवुड को जिम्मेदार ठहराया था। जेमिमा ने कहा था कि कुरआन में आदमियों की आँख पर पर्दा की बात की गयी है, न कि औरतों को परदे में रखने के लिए कहा गया है।”

तो जो इमरान खान ने परसों कहा है, वह यह नहीं समझना चाहिए कि इमरान खान का नया बयान है। यह मजेदार बात है कि एक ओर इमरान खान समाज में बढ़ते हुए तलाक के मामलों के लिए और समाज में आई गिरावट के लिए पश्चिमी संस्कृति को और आधुनिक मूल्यों को जिम्मेदार ठहराते हैं, तो क्या यही कारण है कि उन्होंने तीन शादियाँ कीं और तीसरी शादी के लिए किसी और का घर तुड़वाया। तीसरी शादी ऐसी औरत से की, जिसका चेहरा भी नहीं दिखाया गया है। क्या अपने निजी जीवन के माध्यम से इमरान खान कट्टरता को बढ़ावा दे रहे हैं, मजहबी कट्टरता को?

परन्तु एक बात बहुत ही हैरान करने वाली है कि इमरान खान के प्रधानमंत्री बनने पर उसके चेहरे, मोहरे, और प्ले बॉय वाले लुक पर फ़िदा होने वाले हिंदी के लिबरल समाज ने इमरान खान द्वारा लड़कियों को ही बलात्कार का दोषी ठहराए जाने पर अपना मुंह नहीं खोला है! हिंदी समाज के लेखकों और प्रगतिशील लेखिकाओं के लिए औरतों के वस्त्रों को जिम्मेदार ठहराने वाला, अपनी पहली स्वछन्द बीवी को छोड़ने वाला, और पर्दे में बीवी को रखने वाला कट्टर मजहबी इमरान खान आदर्श है, स्वतंत्रता का प्रतीक है और हिंदी की प्रगतिशील लेखिकाएं दीवानी है।

हालांकि एक समय में उनके चर्चे बॉलीवुड अभिनेत्रियों के साथ अफेयर के कारण भी होते थे!

https://www.dnaindia.com/cricket/photo-gallery-from-rekha-to-zeenat-look-at-alleged-love-affairs-of-ex-cricketer-and-pakistan-pm-imran-khan-with-bollywood-actresses-2891640/imran-khan-celebrated-birthday-with-zeenat-aman-2891642

मगर अब यह प्रेम बॉलीवुड से उतर कर हिंदी लेखन जगत में आ गया है, जिसमें वह वर्तमान में इमरान का आचरण शायद केवल इसीलिए अनदेखा कर रहे हैं क्योंकि उन्हें मोदी और हिन्दुओं से नफरत है!

क्या उनका दीवानापन मोदी के प्रति नफरत के कारण है, या उनकी अपनी किसी कुंठा के कारण हैं या फिर हिन्दू धर्म से नफरत करने के कारण है? यह एक प्रश्न ही है! पर इसका उत्तर यह लिबरल लेखक या लेखिकाएं दे सकेंगी, इसमें संदेह ही है!


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