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Monday, February 6, 2023

अरुणाचल सीमा पर चीन को भारतीय सैनिकों ने दिया ‘मुंहतोड़ जवाब’, सरकार ने संसद में दिया जवाब लेकिन विपक्ष ने दिखाया ‘देशविरोधी’ चेहरा

गलवान के बाद एक बार फिर से भारत और चीन के सैनिकों के बीच हुई झड़प हुई है। भारतीय सेना के अनुसार चीन के सैनिकों ने 9 दिसंबर को एलएसी (लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल) का उल्लंघन करने का प्रयास किया, जिसका भारतीय सैनिकों ने मुंहतोड़ जवाब दिया। इस झड़प में दोनों ही देशों के सैनिकों के घायल होने की खबर है, जहाँ भारत के ६ जवान घायल हुए हैं, वहीं चीन के 20 से अधिक जवान घायल हुए हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स और सैन्य सूत्रों के अनुसार नौ दिसंबर को 300 से ज्यादा चीनी सैनिक अरुणाचल प्रदेश में तवांग के यांग्त्से में 17 हजार फीट की ऊंचाई पर भारतीय सीमा में घुसपैठ करने लगे। यहां भारतीय पोस्ट को हटाने के लिए चीनी सैनिक कंटीले लाठी डंडे और इलेक्ट्रिक बैटन लेकर आए थे। भारतीय सेना भी चीनी सैनिकों का मुकाबला करने के लिए पूरी तरह से तैयार थी।

जैसे ही चीनी सैनिकों ने हमला किया, भारतीय जवानों ने भी जोरदार जवाब देना शुरू कर दिया। भारतीय सैनिकों ने कंटीले लाठी-डंडों से चीनी सैनिकों की बुरी तरह पिटाई की, जिसके पश्चात चीनी सैनिक वहां से जान बचा कर भाग गए। इस घटना में चीन के 20 से अधिक सैनिक बुरी तरह से घायल हो गए हैं, कुछ की हड्डियां टूटी, तो कुछ के सिर फट गए।

इस घटना से सम्बंधित एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। हम इस वीडियो की सत्यता प्रमाणित नहीं कर सकते, लेकिन यह स्पष्ट है कि घटनास्थल तवांग ही है, और चीनी सैनिकों की पिटाई करने वाले भारतीय सैनिक सिख रेजिमेंट और जाट रेजिमेंट के ही दिख रहे हैं।

इस घटना पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने दिया संसद में वक्तव्य

चीनी सेना के भारतीय सेना की झड़प पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने संसद में वक्तव्य दिया है। विपक्ष की नारेबाजी के बीच, लोकसभा में राजनाथ सिंह ने कहा, 9 दिसंबर 2022 को चीनी सेना ने तवांग सेक्टर के यांग्त्से क्षेत्र में अतिक्रमण करने का प्रयास किया, उनका ध्येय एलएसी पर यथास्थिति को बदलना था। चीन के इस प्रयास का हमारी सेना ने दृढ़ता के साथ सामना किया। इस झड़प में दोनों तरफ से हाथापाई भी हुई। भारतीय सेना ने बहादुरी दिखाते हुए चीन के सैनिकों को अतिक्रमण करने से रोका और वापस लौटने पर विवश कर दिया।

रक्षा मंत्री ने कहा कि इस घटना में हमारे किसी भी सैनिक की न तो मृत्यु हुई है, न ही कोई गंभीर रूप से घायल हुआ है। अधिकारियों के दखल के बाद पीएलए सैनिक वापस चले गए। 11 दिसंबर को भारत के स्थानीय सैन्य अधिकारी ने पीएलए के अधिकारी के साथ बैठक की और इस घटना पर चर्चा की। उन्हें सीमा पर शांति बनाए रखने के लिए कहा गया है। मैं इस सदन को आश्वस्त करना चाहता हूं कि हमारी सेनाएं भारत की अखंडता के लिए प्रतिबद्ध हैं और इसके खिलाफ कोई भी प्रयास को रोकने के लिए तत्पर हैं। मुझे विश्वास है कि यह सदन भारत की सेना को समर्थन देगा और उसकी क्षमता और पराक्रम का अभिनंदन करेगा।

विपक्ष ने चीनी घुसपैठ पर सरकार को घेरा और सेना के शौर्य को अनदेखा किया

चीनी सैनिकों की घुसपैठ के विषय पर विपक्ष ने संसद में सरकार को घेरा। कांग्रेस ने कहा, समय आ गया है कि सरकार ढुलमुल रवैया छोड़कर सख्त लहजे में चीन को समझाए कि उसकी यह हरकत बर्दाश्त नहीं की जाएगी। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने ट्वीट में लिखा, ‘भारतीय सेना के शौर्य पर हमें गर्व है। सीमा पर चीन की हरकतें किसी भी तरह से स्वीकार नहीं की जाएंगी। बीते दो साल से हम बार-बार सरकार को जगाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन मोदी सरकार केवल अपनी राजनीतिक छवि को बचाने के लिए इस मामले को दबाने में लगी है। इसी कारण चीन का दुस्साहस बढ़ता जा रहा है।’

वहीं कांग्रेस के प्रवक्ता पवन खेरा ने कहा, चीनी राष्ट्रपति को झुक कर सलाम करने में और लाल आँख दिखाने में अंतर होता है।हमला मैप पर हो और जवाबी हमला एप्प पर किया जाये तो वही होता है जो अब हो रहा है: चीन ने अब अरुणाचल पर अपनी बुरी नज़र डाली है।क्या प्रधान मंत्री अपनी छवि बचाने के लिए फिर से चीन को क्लीन चिट दे देंगे?

विपक्ष ने दिया संसद सत्र स्थगन का प्रस्ताव, रक्षा मंत्री के वक्तव्य देने के पश्चात किया वाकआउट

इस विषय पर विपक्ष के नेताओं ने शून्यकाल को रद्द करने के ज्ञापन दिए और सरकार से इस विषय पर वक्तव्य देने को कहा। सरकार की ओर से रक्ष मंत्री राजनाथ सिंह ने वक्तव्य भी दिया, लेकिन उसके पश्चात विपक्ष के सभी नेताओं ने सदन से वाकआउट कर दिया।

ऐसा प्रतीत हो रहा है जैसे विपक्ष ने शीतकालीन सत्र को इसी विषय पर रद्द करने का मन बना लिया है। वैसे भी विपक्ष इसी प्रकार के हथकंडे अपना कर विभिन्न सत्रों को विरोध प्रदर्शन की भेंट चढ़ा चुका है। कुछ समय पहले ही पेगासस के विषय पर बहुत हल्ला मचाया गया था, जिसके पश्चात सदन की कार्यवाही नहीं चल पायी थी। हालांकि बाद में उच्चतम न्यायालय ने इस विषय पर सरकार के पक्ष में निर्णय दिया था, लेकिन विपक्ष के हथकंडो के कारण पूरा सत्र बेकार हो गया था, और जनता के दिए गए कर की हानि भी हुई थी।

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