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Wednesday, February 28, 2024

पीएफआई पर छापों के विरोध में केरल बंद – कट्टर इस्लामी तत्वों ने संघ व भाजपा कार्यालयों पर किये हमले, उच्च न्यायालय ने पीएफआई को लगाई लताड़

22 सितम्बर का दिन भारत के इतिहास में याद रखा जाएगा, क्योंकि भारतीय सरकार ने पहली बार इतने वृहद् स्तर पर एक देशविरोधी संगठन के विरुद्ध छापेमारी की है । पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) जो एक आतंकी संगठन है, उसके विरुद्ध 13 राज्यों और 50 से ज्यादा जगह पर सैंकड़ों एनआईए और ईडी ने ताबड़तोड़ छापे मारे और 100 से ज्यादा संदिग्धों को गिरफ्तार कर लिया।

यह कार्यवाही इतनी त्वरित और गुप्त थी कि पीएफआई और उसने समर्थक भी भौचक्के रह गए, उन्हें समझ ही नहीं आया कि एकाएक यह हुआ क्या। जब उन्हें कुछ समझ आया, तब तक केंद्रीय एजेंसियां उनके सभी बड़े नेताओं और कैडर को गिरफ्तार कर चुकी थी। ऐसे में पीएफआई के सामने एक ही विकल्प बचा था, देश में कानून व्यवस्था की स्थिति को बिगाड़ना। पीएफआई ने इन छापों व गिरफ्तारियों के विरोध में 23 सितम्बर को केरल में बंद का आह्वान किया था।

पीएफआई ने केरल में राष्ट्रव्यापी बंद का किया आह्वान

पीएफआई ने गुरुवार को कहा था कि आरएसएस के नियंत्रण वाली फासीवादी सरकार द्वारा केंद्रीय एजेंसियों का दुरुपयोग कर विरोधियों को चुप कराने के प्रयासों के खिलाफ शुक्रवार को राज्यभर में बंद किया जाएगा। पीएफआई के राज्य महासचिव ए अब्दुल सत्तार ने एक वक्तव्य दिया कि यह बंद सुबह छह बजे से शाम छह बजे तक होगा। अब पीएफआई बंद का आवाहन करे और किसी प्रकार की हिंसा ना हो, ऐसा तो संभव ही नहीं है।

इस बंद के दौरान केरल के कई शहरों में तोड़फोड़ व बवाल के समाचार प्राप्त हुए हैं, जहां कोल्लम में पुलिस पर हमला किया गया है, वहीं कन्नूर के मट्टनूर में आरएसएस के कार्यालय पर पेट्रोल बम फेंकने की खबर सामने आयी है। तमिलनाडु के कोयंबटूर में भी भाजपा कार्यालय में तोड़फोड़ होने की सूचना मिली है। केरल बंद के दौरान कोल्लम जिले के पल्लीमुक्कू में बाइक सवार पीएफआई समर्थकों ने दो पुलिसकर्मियों पर हमला किया। इस बीच कन्नूर के मट्टनूर में आरएसएस के कार्यालय पर पेट्रोल बम फेंकने की खबर मिली है।

पीएफआई के बंद के बीच कई जगहों पर छिटपुट हिंसा की घटनाओं की सूचना मिली है। तिरुवनंतपुरम, कोल्लम, कोझिकोड, वायनाड और अलाप्पुझा समेत विभिन्न जिलों में केरल राज्य सड़क परिवहन निगम की बसों पर पथराव किया गया, वहीं एक वाहन पर पेट्रोल बम फेंका गया, जो कन्नूर के नारायणपारा में अखबार वितरित करने जा रहा था। अलाप्पुझा में बंद का समर्थन कर रहे लोगों के पथराव में केएसआरटीसी की बसें, टैंकर लॉरी और कुछ अन्य वाहनों को भरी हानि पहुंचने की खबर है। कोझिकोड और कन्नूर में पीएफआई कार्यकर्ताओं द्वारा कथित तौर पर किए गए पथराव में क्रमश: 15 वर्षीय एक लड़की और एक ऑटो रिक्शा चालक घायल हो गए।

कोयंबटूर में भाजपा कार्यालय पर हमला होने के पश्चात घटना से गुस्साए भाजपा कार्यकर्ताओं ने जमकर प्रदर्शन किया, जिसके बाद पुलिस ने उन्ही उचित सुरक्षा सुनिश्चित की। भाजपा के कार्यकर्त्ता नंदकुमार ने कहा कि, पीएफआई इसी प्रकार के हमले करता है, और विपरीत विचारधारा के लोगों को को येन केन प्रकारेण हानि पहुंचाने का प्रयास करते हैं।

केरल उच्च न्यायालय ने पीएफआई को अवैध रूप से बंद करने के लिए लताड़ा

केरल उच्च न्यायालय ने पीएफआई के बंद के आह्वान पर कड़ा रुख दिखाया है। उच्च न्यायालय ने मामले का स्वतः संज्ञान लेते हुए संगठन के नेतृत्व के विरुद्ध मामला दायर कर लिया है। उच्च न्यायालय के पूर्व के आदेश के अनुसार बिना अनुमति के राज्य में कोई बंद आयोजित नहीं कर सकता है। बंद के विरुद्ध सुनवाई करते हुए उच्च न्यायालय ने केरल पुलिस को निर्देश दिए कि वह बंद का समर्थन नहीं करने वाले नागरिकों और सरकारी संपत्तियों की सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम करे।

केरल उच्च न्यायालय ने कड़े शब्दों में जहा कि, “7 जनवरी 2019 के आदेश में कहा था कि कोई भी सात दिनों की पूर्व सूचना के बिना राज्य में बंद के लिए आह्वान नहीं कर सकता है।” न्यायालय ने कहा कि सार्वजनिक संपत्ति का नुकसान स्वीकार नहीं किया जा सकता है, और किसी भी प्रकार की हिंसक घटनाओं में लिप्त दोषियों पर कड़ी कार्यवाही करे।

बीजेपी ने पीएफआई पर साधा निशाना

भाजपा की केरल इकाई के अध्यक्ष के सुरेंद्रन ने आरोप लगाया कि पीएफआई की ओर से पहले भी बुलाई गई सभी हड़तालों के दौरान उपद्रव व हिंसा की गई थी। राज्य सरकार को लोगों के जीवन और संपत्ति की पर्याप्त सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए। पीएफआई बाहुबल का प्रदर्शन कर आतंकवाद के मामलों में बचने का प्रयास कर रहा है, वहीं केरल की वामपंथी सरकार भी उनके प्रति नरम रुख अपना रही है।

यहाँ यह समझने की आवश्यकता है कि यह बंद कोई स्वह स्फूर्त प्रतिक्रिया नहीं है, बल्कि पीएफआई को इस तरह के हिंसक प्रदर्शन करने में महारत हासिल हो चुकी है। हमने देखा है कैसे नागरिकता अधिनियम कानून, दिल्ली दंगों, शाहीन बाग़ आदि जगहों में पीफाई ने ऐसे ही शुक्रवार को ही सामूहिक सभाएं बुलाईं थी । इन सभाओं को शुक्रवार के दिन करने के पीछे मजहबी कारण ही है, क्योंकि शुक्रवार यानी जुम्मे की नमाज़ अत्यंत आपत्तिजनक होती है, और उसके बाद हमेशा तनावपूर्ण स्थिति होती ही है।

पीएफआई ने इस शुक्रवार भी यही करना चाहा, लेकिन लोगों और प्रशासन की सतर्कता के कारण उनका यह दांव खाली चला गया है। उल्टा पीएफआई के ही सैंकड़ों कार्यकर्त्ता गिरफ्तार कर लिए गए हैं । वहीं केरल में कई जगह से ऐसे समाचार भी आ रहे हैं, जिसमे बताया गया है कि लोगों की दुकानें जबरन बंद कराने का प्रयास करने पर दुकानदारों ने पीएफआई के कार्यकर्ताओं की पिटाई भी की । ऐसा लग रहा है की अब पीएफआई के बुरे दिन शुरू हो गए हैं।

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