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Sunday, May 19, 2024

ब्रह्मास्त्र के आंकड़ों के बहाने क्या झूठ की खेती की गयी? उसे हिट या फ्लॉप क्या कहा जाए? कहानी क्या है?

पिछले दो सप्ताहों से जब से ब्रह्मास्त्र रिलीज हुई, तब से ही इसके आंकड़ों को लेकर एक संशय छाया है, हालांकि बार बार यह कहा जा रहा है कि फिल्म ने इतने करोड़ की कमाई की, उतने करोड़ की कमाई की, फिर भी चेहरों पर खुशी नहीं दिख रही है। लोगों के चेहरों पर खीज दिखाई दे रही है। यह खीज क्यों है, जब वह 250 करोड़ से अधिक कमा चुकी है, जब लोग कह रहे हैं कि छप्पर फाड़कर कमाई कर रही है और क्यों उनके प्रशंसकों का निशाना विवेक रंजन अग्निहोत्री की फिल्म द कश्मीर फाइल्स है और साथ ही उनका सारा ध्यान बॉयकाट गैंग अर्थात हिंदुत्व की बात करने वालों को नीचा दिखाने पर है?

आखिर क्या कारण है कि वह लोग इतने परेशान हैं और एक अजीब बौखलाहट है, जिस प्रकार से मीडिया में रोज इस फिल्म को लेकर आंकड़े आए और जबरन सुपरहिट प्रमाणित करने का कुप्रयास किया गया, यह भी संदेह भरता है। फिर भी बीच-बीच में ऐसा कुछ न कुछ होता रहा, जिसने आंकड़ों की बाजीगरी पर प्रश्न उठाए ही। जैसे कंगना रनाउत ने भी बार बार कहा कि यह आंकड़े फर्जी हैं, तो वही के आर के, जिन्हें ब्रह्मास्त्र फिल्म की रिलीज से पहले किसी और मामले में गिरफ्तार कर लिया था, उन्होंने भी लिखा था कि थिएटर खाली हैं और फिर भी ब्रह्मास्त्र सुपरहिट है

रिलीज के तीसरे सप्ताह फिल्म ने 250 करोड़ नेट की कमाई कर ली है:

फिर भी लोग इस पर संदेह व्यक्त कर रहे हैं। पत्रकार मीना दास नारायण ने लिखा कि समझ नहीं आ रहा कि ईडी बॉक्स ऑफिस का यह घोटाला क्यों होते देख रहे हैं

लोगों ने इस ट्वीट पर खाली थिएटर की तस्वीरें साझा कीं

मीडिया का जो वर्ग पूरी तरह से इस फिल्म को सुपरहिट दिखाने के लिए बेचैन दिखा, जब उसने कश्मीर फाइल्स के आंकड़ों के साथ इसकी तुलना करनी आरम्भ कर दी। जबकि द कश्मीर फाइल्स की लागत बहुत कम थी एवं उसे बहुत ही कम स्क्रीन पर रिलीज किया गया था। कश्मीर फाइल्स का बजट जहां मात्र लगभग 15 करोड़ के आसपास था तो वहीं ब्रह्मास्त्र का बजट लगभग 400 करोड़ के आसपास का है। हालांकि लोगों का कहना है कि ऐसा नहीं है।

रणवीर कपूर का कहना है कि बजट के विषय में यह अफवाहें हैं। यदि फिर यह अफवाहें हैं तो फिर यह अफवाहें बाजार में क्यों आईं और किनके द्वारा आईं यह भी एक प्रश्न हैं। और कश्मीर फाइल्स से इस फिल्म की तुलना कैसी की जा सकती है, क्योंकि एक फिल्म को फ्लॉप दिखाने के लिए जो मशीनरी आतुर दिखाई दी, वही मीडिया और मशीनरी ब्रह्मास्त्र को सुपर हिट दिखाने के लिए उतारू है, जबकि अभी तक इसके आंकड़ों में स्पष्टता नहीं है।

विवेक अग्निहोत्री ने कश्मीर फाइल्स के साथ इसकी तुलना को लेकर मजाक उड़ाया। उन्होंने मीडिया में आई इस सूचना पर कि ब्रह्मास्त्र ने “द कश्मीर फाइल्स” को कैसे बीट किया? क्या हॉकी से, स्टिक से या किससे?

फिर प्रश्न उठ खड़ा होता है कि ब्रह्मास्त्र फिल्म के व्यापार को लेकर इतनी बेचैनी क्यों है? आखिर क्या ऐसा है जो कई प्रश्नों को जन्म दे रहा है:

इस फिल्म की कथित सफलता को लेकर कहानियाँ कही जा रही हैं, स्टोरीज बनाई जा रही हैं। और आम लोग इस पर मजाक भी उड़ा रहे हैं:

इस फिल्म के कथित आंकड़ों को लेकर gems of bollywood पर भी प्रश्न उठाए जा रहे हैं, परन्तु बाट घूमफिर कर वहीं आ रही है, कि न ही फिल्म का बजट स्पष्ट है और न ही आंकड़े, फिर कैसे इस फिल्म को हिट या सफलता बताया जा रहा है?

कहीं ऐसा तो नहीं कि बॉलीवुड का एक बड़ा वर्ग जिसने आज तक हिन्दुओं के प्रति घृणा भरने का कार्य किया था एवं जिसने आज तक हिन्दुओं की भावनाओं का तिरस्कार किया था और जो हिन्दू दर्शकों की जरा भी परवाह नहीं करता है, जिसके लिए हिन्दुओं का उपहास उड़ाना एक बहुत आम बात है, वह इस बॉयकाट की पुकार से डर गए और लाल सिंह चड्ढा, जिसे लेकर सबसे अधिक उत्साह था और जिसके बहिष्कार को लेकर सबसे ज्यादा और सबसे कड़ा प्रहार हुआ और जिस प्रकार उसके व्यापार पर प्रभाव पड़ा, उसने बॉलीवुड के हिन्दू हेटर्स गिरोह में हलचल पैदा कर दी और उन्हें पूरी तरह से हिलाकर रख दिया!

आर्थिक चोट जब लगी तो शायद पहली बार यह उन्हें अहसास हुआ कि मेक अप मैन, टेक्नीशियन आदि के रोजगार पर असर पड़ता है, परन्तु आज तक यही लोग तो थे जो इंडस्ट्री से बाहर के लोगों के साथ खेल करते आए थे, और उनके कैरियर को प्रभावित करते हुए आए थे, तो उनके दिल में अचानक से ही इन लोगों के प्रति सहानुभूति क्यों उत्पन्न होने लगी थी? दरअसल यह उनके लिए सहानुभूति नहीं थी, यह केवल एक छल था, एक चाल थी कि किसी भी प्रकार से उनकी फ़िल्में चल जाएं!

परन्तु लोगों ने इस तर्क पर भी प्रश्न किया था कि आखिर क्यों यह विचार तब नहीं आए, जब वह लोग दूसरों के कैरियर को नष्ट कर रहे थे!

इतने छल, इतने पीआर और कहीं न कहीं झूठे आंकड़ों के बीच ब्रह्मास्त्र के आंकड़ों पर प्रश्न चिह्न उत्पन्न हो ही रहे हैं क्योंकि ब्रह्मास्त्र की पूरी टीम का हमला हिंदुत्व की बात करने वालों पर है, देश की बात करने वालों पर है, क्योंकि कश्मीर फाइल्स की सफलता ने उन्हें भौचक्का कर दिया था! उस फिल्म में देश ने अपना नैरेटिव बता दिया था कि वह क्या देखना चाहते हैं, तो वहीं बॉलीवुड अभी तक हिन्दुओं के नैरेटिव पर काम करने के लिए तैयार नहीं है!

ब्रह्मास्त्र के बहाने उसी नैरेटिव को सेट करने का प्रयास किया गया है कि हम नहीं सुधरेंगे, और हर मूल्य पर फिल्म हिट कराएँगे!  

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