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Saturday, September 18, 2021

हिन्दुओं के त्योहारों के साथ कथित सेक्युलर छल

हाल ही में इरफ़ान हबीब ने कहा कि अकबर का पूरा दिन रक्षाबंधन पर राखी बंधवाते हुए बीत जाता था। इन दिनों जब यह कथित प्यार की नाली बहाई जा रही है, संयोग से तभी उसी भूमि पर मजहब और कबीलाई मानसिकता की क्रूरता का नंगा नाच चल रहा है, जहां से होता हुआ बाबर आया था। बाबर ने कटे हुए सिरों की मीनार बनाई थी और हुमायूँ ने तो रानी कर्णावती का पत्र स्वीकार ही नहीं किया था, जब रानी ने शेष स्त्रियों के साथ जौहर कर लिया था तब वह पहुंचा था और जब बहादुर शाह ने चित्तौड़ को पराजित कर दिया था तब वह बहादुरशाह को पराजित करने पहुँचा था।

हुमायूँ ने तो राखी का मान नहीं रखा था, यह बात अब साबित होती जा रही है, फिर भी झूठे इतिहास में अभी तक यह पढ़ाया जा रहा है।  अब इरफ़ान हबीब ने एक नई बात कह दी है कि रक्षाबंधन के दिन अकबर का पूरा दिन राखी बंधते ही बीतता था। चूंकि वामपंथी इतिहासकारों का एक मात्र उद्देश्य हिन्दू त्योहारों को नीचा दिखाना और उसके साथ हिन्दुओं को नीचा दिखाना है।

वह कहानी तो बढ़िया कह लेते हैं, परन्तु उनका दुर्भाग्य है कि उनके पास अपनी इस कहानी के लिए तथ्य नहीं होते हैं। हुमायूँ और रानी कर्णावती वाला उनका झूठ जब से बेपर्दा हुआ है, तब से वह और झूठ कहने लगे हैं। अब आया है अकबर का राखी वाला झूठ। अकबर को महान बनाने के लिए कई प्रकार के झूठ गढ़े गए है और लगातार ही गढ़ते चले आ रहे हैं। जबकि यह सत्य है कि वह हिन्दुओं की हत्या करने वाला क्रूर शासक था।

उसने पानीपत के युद्ध में मारे गए सैनिकों के सिरों की मीनारें बनाई थीं ऐसा अल-बदाऊंनी (१५४० – १६१५)  ने मुन्तखाब-उत-तवारीख (Muntakhab–ut–Tawarikh) में लिखा है।

यह पुस्तक अकबर के शासनकाल के साथ ही अकबर की निजी अय्याशियों के विषय में भी बताती है। कि अकबर ने कितने निकाह किए थे। अकबर की पहली बीवी उसके चाचा हिंदाल मिर्जा की बेटी थी। उसका दूसरा निकाह अब्दुल्ला खान मुग़ल की बेटी से हुआ था और उसने तीसरा निकाह भी अपनी फुफेरी बहन से किया था, जिसका निकाह हुमायूँ ने बैरम खान से कराया था। परन्तु अकबर ने जब बैरम खान का कत्ल करवा दिया (जैसा कुछ इतिहासकारों का कथन है) तो उसने अपनी ही उस फुफेरी बहन से निकाह कर लिया, जिसका निकाह बैरम खान से हो चुका था।

अलबदायूंनी की किताब से अकबर की अय्याशियों का एक और उल्लेख मिलता है, इसी पुस्तक के पृष्ठ 59 पर लिखा है “और इसी स्थान पर (मथुरा के आसपास) बादशाह ने अमीरों के साथ शादियों के माध्यम से रिश्ते बनाने का सोचा। दिल्ली पर सबसे पहले चर्चा की गयी और कव्वालों एवं हिजड़ों को उन अमीरों के हरमों में से लड़कियों को चुनने के लिए भेजा गया। और फिर शहर में आतंक छा गया।”

“आगरा के सरदार शेख बादाह की एक बहू थी। जिसका शौहर जिंदा था, मगर जो बहुत सुन्दर थी। एक दिन बादशाह की नज़र उस पर पड़ी और अकबर ने आगरा के सरदार के पास एक सन्देश भेजा कि वह उसकी बहू से निकाह करना चाहता है। और यह मुगल बादशाहों में नियम है कि अगर किसी बादशाह ने किसी औरत पर शारीरिक सम्बन्ध बनाने/निकाह करने के लिए निगाह डाल दी तो उस औरत के शौहर को हर हाल में अपनी बीवी को तलाक देना होगा। जैसा सुलतान अबू सैद और मीर चोबन और उसके बेटे दमश्क ख्वाजा की कहानी में दिखाया गया है। फिर अब्दुल वासी ने यह आयत पढ़ी “खुदा की धरती बहुत चौड़ी है। इस संसार के मालिक के लिए यह दुनिया बहुत संकुचित नहीं है।” और फिर उसका शौहर अपनी बीवी को तीन बार तलाक बोलकर दक्कन में बीदर चला गया और उसकी बीवी अकबर के हरम में आ गयी।

फिर यह भी लिखा है कि मुगल बादशाह की नज़र पड़ने पर शौहर को अपनी बीवी को तलाक देना होता था, तो वह “कोड्स ऑफ चंगेज़ खान” के अनुसार होता था।

कोड्स और चंगेज़ खान के अनुसार कदम बढ़ाने वाले अकबर को ही भारत में “संस्थागत रूप से हरम” स्थापित करने का श्रेय जाता है, जहाँ पर अकबर के समय पांच हजार से ज्यादा औरतें थीं।

इसके साथ ही उसने ओरछा की प्रवीण राय को भी पैसे और ताकत के बल पर अपने हरम में लाने का प्रयास किया था। परन्तु वह अपनी सूझ बूझ से उस जाल में नहीं फंसी थीं।

हरम की किन औरतों से अकबर राखी बंधवाता होगा पता नहीं क्योंकि अपनी बहन उसके कोई थी नहीं और फुफेरी और चचेरी बहनों के साथ वह निकाह कर सकता था।

राजपूतों के खिलाफ सैन्य अभियान चलाता था, हिन्दुओं को मारता था, फिर आखिर में प्रश्न वहीं पर आकर ठिठक जाता है कि अकबर आखिर राखी किससे बंधवाता था और यदि ऐसा नहीं है तो फर्जी कहानियाँ सुनाकर अभी तक हमें परेशान करने वाले इरफ़ान हबीब अब भी इतनी बेशर्मी से झूठ कैसे बोल सकते हैं?


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