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Sunday, May 29, 2022

मोहम्मद इरफान को बचपन के दोस्त ने 30 टुकड़ों में काटा

मित्रता वह अटूट बंधन का स्रोत है जहाँ न तो धर्म आड़े आता है और न ही मत। मित्रता में कड़वाहट भी एक प्रेम का अनमोल प्रतीक है। किन्तु जब मित्रता के खांचे में कट्टरता अपनी पैठ बनाने लगता है तब, बचपन का मित्र भी हिंसाअपनाकर हानि पहुंचाने का कार्य करता है। एक ऐसी ही दिल को झकझोर देने वाली घटना उत्तर प्रदेश के हापुड़ क्षेत्र से आई है, जहाँ एक 34 वर्षीय व्यक्ति, जिसका नाम मोहम्मद इरफान है, को उसके व्यापारिक साथी और दोस्तों ने कथित तौर पर गला घोंट कर मार दिया। पुलिस रिपोर्ट के अनुसार 18 मार्च को इरफान लापता हो गया था। 

हत्या के उपरांत शव को 30 टुकड़ों में काटकर बुलंदशहर-हापुड़ टोल प्लाजा के पास एक बंजर जमीन में दफना दिया गया। 

पुलिस को जैसे ही इस मामले संज्ञान लिया, सर्वप्रथम शव को निकालने का कार्य किया गया और उसके बाद हत्या में लिप्त आरोपियों को पकड़ने का कार्य आगे बढ़ाया गया। इस हत्या में मृतक का बचपन का दोस्त एवं व्यापारिक साथी रागिब और मोहम्मद आकिब को आरोपित पाया गया है। 

पुलिस जाँच के अनुसार पैसे के विवाद को लेकर इरफान की हत्या उसके ही दोस्तों द्वारा की गई थी। टोल प्लाजा के पास फास्टैग बेचने वाली अपनी दुकान से घर नहीं लौटने पर इरफान के परिवार ने उसके लापता होने की शिकायत दर्ज कराई थी। जिसके बाद इस घटना का खुलासा हुआ। 

यह पहली घटना नहीं 

हाल ही में एक और घटना हरिद्वार से सभी के सामने आई है, जिसमें गुलजेब हुसैन नामक युवक ने अपने ही समुदाय की लड़की जिसका नाम रमसा बताया जा रहा है, की केवल इसलिए हत्या की क्योंकि उसने निकाह के लिए मना कर दिया। प्रेम-प्रसंग में हुई इस हत्या ने सभी को चिंता में डाल दिया है। 

शव से पीछा छुड़ाने के लिए आरोपित ने शव को सूटकेस में डालकर वहां से भागना चाहा। किन्तु, जनता द्वारा संदेह होने पर आरोपित से पूछताछ की गई और फिर उसे पुलिस को सौंप दिया। 

पहले यह मामला लव जिहाद का लग रहा था क्योंकि आईडी संभवतया किसी और नाम की जमा की गयी थी, परन्तु बाद में पता चला कि यह एक ही समुदाय के बीच प्रेम प्रसंग का मामला था। 

बंगाल बीरभूम की घटना 

अपने हिंसक स्वरूप के लिए प्रख्यात पश्चिम बंगाल भी एक बार फिर अपने ऐसे ही एक भयावह वृत्तांत के लिए चर्चा में है। बंगाल में तृणमूल कांग्रेस नेता भादू शेख की हत्या के उपरांत कट्टरपंथियों ने प्रतिशोध की भावना से अपने ही समुदाय के लोगों के घरों को आग में झोंक दिया। 

इस घटना में कुल 8 लोगों की मृत्यु की खबर प्राप्त हुई थी, जिनमें महिलाऐं और छोटे बच्चे युक्त थे। इस घटना ने न केवल बंगाल  प्रशासन के माथे पर चिंता की लकीर खींच दी, अपितु विपक्ष इस भयावह स्थिति को देखने के उपरांत राज्य में राष्ट्रपति शासन की मांग कर रहा हैं। 

इस मामले में अब तक 20 से अधिक उपद्रवियों की गिरफ्तारी कर ली गई है, जिसमें तृणमूल कांग्रेस का नेता अनारूल हुसैन भी अभियुक्त है। 

ट्विटर पर दिनेश पंथ लिखते हैं “कथित सेकुलर नेताओं और उनके जेबी पत्रकार किसी मुसलमान की जान की कीमत तभी लगाते हैं जब उन्हैं लगता है कि किसी  हिन्दू ने उसे मारा है। अगर कोई मुस्लिम दूसरे मुस्लिम को मारे तो इनकी नजर में वह अपराध नहीं है क्योंकि यह उनके एजेंडा को सूट नहीं करता… दोगलेपन की हद है।”

पत्रकार वसीम अकरम त्यागी ने इस घटना पर लिखा कि ‘बंगाल के बीरभूम में जिस शख्स की हत्या हुई वह भी मुस्लिम है। उस हत्या के ‘प्रतिशोध’ में जिन्हें मारा गया वो भी मुस्लिम। मृतकों में 7 साल की बच्ची से लेकर 52 वर्षीय अधेड़ तक शामिल हैं। सभी को जलाकर मारा गया है। ममता बनर्जी आपको मुस्लिमो ने 76% वोट क्या इसीलिए दिया था?’

शांतनु मिश्रा

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