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Tuesday, February 7, 2023

जानिये क्यों ‘द केरल स्टोरी’ फिल्म राजनीतिक और प्रशासनिक मुश्किलों में फंसी

फिल्म ‘द केरल स्टोरी‘ फिल्म की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। इस फिल्म का टीजर पिछले ही दिनों रिलीज किया गया था, उसके पश्चात यह फिल्म विवादों में घिर गयी है। केरल के डीजीपी ने तिरुवनंतपुरम के पुलिस आयुक्त को इस फिल्म के टीजर पर एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया है। केरल पुलिस के अनुसार, यह निर्देश मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन को भेजी गई एक शिकायत पर आधारित है।

क्या है ‘द केरल स्टोरी’?

यह फिल्म देश में हिन्दू लड़कियों के साथ हुए अत्याचार की कहानियों को कैमराबद्ध करने का प्रयास है। इस फिल्म में दक्षिण भारत में इस्लामिक संगठनों ने तंत्र द्वारा प्रलोभन, दबाव और भय दिखाकर अपहृत की गई ऐसी हिन्दू युवतियों की कहानी है जिन्हें आतंकवादी संगठनों ने अपना गुलाम बनाकर रख लिया। फिल्म के निर्देशक सुदीप्तो सेन ने इस कहानी पर महीनों तक शोध किया है और इस कार्य में उन्हें कई समाजसेवी संगठनों ने भी सहायता की है।

फिल्म ‘द केरल स्टोरी’ के निर्माता विपुल अमृतलाल शाह के अनुसार यह एक ऐसी मानवीय त्रासदी की कहानी है जो दर्शकों को अंदर तक झकझोर देगी। ये फिल्म केरल राज्य में लापता हुई 32 हजार महिलाओं के पीछे की घटनाओं का खुलासा करती है। निर्माता के अनुसार यह फिल्म केरल को झकझोर देने वाली घटनाओं की एक बहुत ही वास्तविक, निष्पक्ष और सच्ची कहानी है।

फिल्म के टीजर में अभिनेत्री अदा शर्मा कहानी सुनाते हुए नजर आ रही हैं, वह बताती हैं कि कैसे हिंदू से मुस्लिम बनाकर उनका धर्मांतरण किया गया और शालिनी उन्नीकृष्णन से फातिमा बा बनाकर आंतकी संगठन आईएसआईएस से जुड़ने को विवश कर दिया गया। इस फिल्म में एक महिला की कहानी दिखाई है जो नर्स बनने का सपना देखती है, लेकिन उसका अपहरण कर धर्मांतरण कर दिया गया।

उसके पश्चात उसे आईएसआईएस आतंकवादी संगठन में सम्मिलित कर दिया गया, और अब वह अफगानिस्तान की जेल में बंद है।इस टीजर में शालिनी के साथ-साथ 32 हजार अन्य महिलाओं के साथ हुए इस्लामिक षड्यंत्र की अनसुनी गाथा है, जो कोई नहीं जानता, ना कोई सुनना चाहता है।

फिल्म के टीज़र देखने के पश्चात लोग समर्थन और विरोध में बंटे

फिल्म का टीजर झकझोरने वाला है, और इसे देखने के पश्चात सोशल मीडिया पर दर्शक दो गुटों में बंट गए हैं। एक तरफ लोग फिल्म की सराहना कर रहे हैं और धर्मांतरण को गंभीर विषय बता रहे हैं, वहीं कुछ लोग फिल्म निर्माताओं के विरुद्ध दुष्प्रचार कर रहे हैं । इन लोगों का कहना है कि फिल्म निर्माताओं को केरल में लड़कियों के गायब होने और आतंकी संगठन में भेजने के आंकड़ें को स्पष्टता से रखना चाहिए। वहीं एक और गुट है जो इस फिल्म को प्रतिबंधित करने की मांग कर रहा है, वहीं केरल का प्रशासन भी इस फिल्म के विरुद्ध कड़ी कार्यवाही करने का मन बना चुका है।

केरल सरकार और पुलिस ने फिल्म के विरुद्ध कार्यवाही शुरू की

केरल के डीजीपी ने तिरुवनंतपुरम के पुलिस आयुक्त को इस फिल्म के टीजर पर एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया है। केरल के मुख्यमंत्री को भेजी गई एक शिकायत पर कार्यवाही करते हुए ही यह आदेश दिया गया है। इस विषय में केरल पुलिस का कहना है कि उनके उच्चस्तरीय अपराध जांच शाखा ने इस फिल्म में बताये गए तथ्यों की प्रारंभिक जांच शुरू कर दी है, जिसकी रिपोर्ट डीजीपी को भेजी गई है, और उसी के अनुसार आगे की कार्यवाही होगी।

कांग्रेस ने की फिल्म को प्रतिबंधित करने की मांग

वहीं कांग्रेस के नेता वीडी सतीसन ने इस फिल्म पर केरल राज्य को बदनाम करने और गलत सूचना फैलाने का आरोप लगाया है। उन्होंने दावा किया है कि ये फिल्म अन्य राज्यों के सामने केरल की छवि खराब करने की योजना से बनाई गई है। उन्होंने ये भी कहा कि फिल्म को बनाने के पीछे संघ परिवार का हाथ हो सकता है।

वीडी सतीसन ने कहा, “”मैंने वह टीजर देखा है। यह गलत सूचना फैलाने का मामला है। केरल में ऐसा कुछ नहीं हो रहा है, यह अन्य राज्यों के सामने केरल की छवि खराब करने के लिए बनाई गयी है। यह संघ परिवार का एजेंडा है और वह लोग लगातार गलत सूचना देकर लोगों के बीच द्वेष फैलाने का प्रयत्न कर रहे हैं।

सतीसन पूछते हैं कि यह फिल्म किस आधार पर और किस सूचना पर बनाई गई है?” उन्होंने कहा कि केरल में लापता हुई 32 हजार लड़कियों के बारे में कोई विश्वसनीय जानकारी नहीं है। कांग्रेस नेता ने कहा, “राज्य पुलिस के पास ऐसी घटनाओं की कोई जानकारी नहीं है ,अगर केंद्रीय खुफिया जानकारी के पास कुछ है, तो उन्हें इसे जनता के सामने लाना होगा। महिलाओं की सूची, उन महिलाओं के पते जो आईएसआईएस में सम्मिलित हुईं और उन्हें केरल से भर्ती किया गया था,” ये सभी रिकॉर्ड दिखाना होगा”।

उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर फिल्म को लेकर केरल की पिनाराई विजयन सरकार कोई कार्रवाई नहीं करती तो फिर पार्टी न्यायालय जायेगी । उन्होंने ने इस फिल्म पर प्रतिबन्ध लगाने की मांग भी की है। उनके अनुसार यह फिल्म समाज में द्वेष फैला रही है, और इस प्रकार आधी अधूरी जानकारी पर फिल्म बनाने से सांप्रदायिक मुदे पैदा हो जाते हैं। इससे पहले, तमिलनाडु के एक पत्रकार अरविंदकशन बी आर ने ‘द केरल स्टोरी’ के टीजर को लेकर केरल के मुख्यमंत्री को पत्र लिखा था। पत्रकार ने केरल सरकार से फिल्म के निर्देशक को बुलाने और उसकी सच्चाई की जांच करने को कहा।

‘द केरल स्टोरी’ एक दुष्प्रचार या एक क्रूर सत्य?

फिल्म का विरोध करने वाले इसमे बताई गई 32,000 महिलाओं की संख्या पर प्रश्नचिन्ह लगा रहे हैं, लेकिन कोई भी इस बारे में बात नहीं कर रहा कि इसमें बताये गए जबरन धर्मांतरण और युवतियों को सीरिया और अफ़ग़ानिस्तान भेजने की बात सही है या नहीं। हालांकि तथ्य यही है कि केरल और अन्य दक्षिण भारतीय राज्यों में पिछले कुछ वर्षों में विदेशी फंडिंग और मजहबी अंधता के कारण जिहाद की घटनाएं बढ़ती ही जा रही हैं।

अगर केरल की ही बात की जाए तो वहाँ लव जिहाद की घटनाएं हो रही हैं, जहां हिन्दू लड़कियोंको प्रेम जाल में फंसा कर उन्हें मुस्लिम बनाया जा रहा है। उसके पश्चात उन्हें आतंकवादी संगठनों में सम्मिलित होने के लिए सीरिया और अफ़ग़ानिस्तान भी भेजा जा रहा है। ऐसा ही एक उदाहरण 2019 में देखने को आया था, जहां भारत से कुछ मुस्लिम युवतियां सीरिया चली गयी थी, क्योंकि उन्हें आईएसआईएस से जुड़ना था।

इन युवतियों को मजहब के नाम पर सेक्स गुलाम बनाया गया था, और बाद में इन युवतियों को अफ़ग़ानिस्तान भेज दिया गया था, जहां उन्हें गिरफ्तार करके जेल में डाल दिया गया था। इन युवतियों ने भारत सरकार से उन्हें वापस बुलाने की याचना की थी, लेकिन मोदी सरकार ने इन युवतियों को वापस लाने से मना कर दिया था। सरकार के अनुसार यह युवतियां कट्टरपंथी हैं और इन्हे भारत वापस लाने से कहीं ना कहीं देश में सुरक्षा व्यवस्था की चुनौती खड़ी हो सकती है।

इसके अतिरिक्त केरल में ऐसे कई संगठनों पर एनआईए ने कार्यवाही की है, जो खाड़ी के देशों में काम कर रही भारतीय युवतियों को मजहब के नाम पर भड़का कर उन्हें आईएसआईएस जैसे आतंकी संगठनों से जुड़ने के लिए विवश करते थे। ऐसे सैंकड़ों मामले देखने को मिले जहां खाड़ी देशों में नौकरी देने के बहाने से केरल की युवतियों को सीरिया, इराक़ जैसे देशों में भेजा गया और बाद में उन्हें वहां आईएसआईएस के आतंकियों को बेच दिया गया था। उसके बाद उन युवतियों के साथ क्या हुआ, इसके बारे में कोई भी जानकारी किसी के पास नहीं है।

यह फिल्म एक ज्वलंत विषय को उठा रही है, और ऐसे में यह महत्वपूर्ण है कि संख्या पर बात हो, विमर्श हो।

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