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Monday, November 29, 2021

मेरठ में कबाड़ी माफिया हाजी नईम उर्फ गल्ला पर योगी सरकार की बड़ी कार्यवाही

उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ की सरकार द्वारा हर प्रकार के माफियाओं पर कड़े कदम उठाए जाने जारी है। अभी हाल ही में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार मेरठ में कबाड़ी बाजार पर कड़ी कार्यवाही की है। यह बाजार कहने के लिए ही केवल कबाड़ी बाजार था, परन्तु यहाँ पर चोरी की गाड़ियों को काटा जाता था और फिर वहां से दूसरे दो नंबर वाले बाजारों में भेजा जाता था।

उत्तर प्रदेश सरकार ने हाजी नईम उर्फ गल्ला की चार करोड़ दस लाख की कोठी सहित कई संपत्तियों को कुर्क कर दिया। यह कार्यवाही पुलिस ने शनिवार दोपहर में की। पाठकों को यह जानकर हैरानी हो सकती है कि क्या कोई कबाड़ी करोड़ों का मालिक हो सकता है? पर पश्चिमी उत्तर प्रदेश में रहने वाले अधिकांश लोगों को मेरठ के कबाड़ी बाजार के विषय में पता है, क्योंकि यहाँ की अधिकतर चोरी हुई गाड़ियां वहीं जाती थीं और रातों रात उसके पुर्जे दूसरे बाजारों में पहुँच जाते थे।

हाजी नईम उर्फ गल्ला की कहानी अपराध और व्यवस्था के गठजोड़ की ऐसी कहानी है, जिसमें आम नागरिक पिसता रहा और चोर करोड़ों में खेलते रहे। ऐसा नहीं था कि पुलिस को इस विषय में जानकारी न हो कि एक साधारण मैकेनिक पहले कबाड़ी और फिर अचानक से ही करोड़ों की संपत्ति का मालिक कैसे बन गया। गल्ला पर हाथ डालना पहले की सरकारों के लिए संभव नहीं था। वर्ष 2017 से पहले तो गल्ला पर हाथ डालने की बात कोई सोच भी नहीं सकता था। क्योंकि सत्ताधारी सपा के साथ उसके नज़दीकी सम्बन्ध बताए जाते थे। मीडिया में रिपोर्ट और लोगों से बात करने पर पता चलता है कि यही कहावत थी कि गल्ला पर हाथ डालने का मतलब है सीधे ट्रांसफर!

हाजी गल्ला, जिसने वर्ष 1995 में दिल्ली रोड पर गाडी मरम्मत करने वाली दुकान खोली थी और फिर धीरे धीरे उसने कबाड़ी का काम करना शुरू कर दिया। उसकी दुकान सोतीगंज में थी, और फिर देखते ही देखते सोतीगंज जैसे उसका किला बन गया। उसने सोतीगंज और सदर बाजार इलाके में 2 आलीशान मकान खड़े कर लिए।  उसने कोठी बनवाई और कई प्लाट खरीदकर ऊंची बाउंड्री बनवाकर गोदाम बनाए, जहाँ पर चोरी की गाड़ियाँ आती और कटती थीं।

हाजी गल्ला पर एक नहीं बल्कि कई राज्यों में मुक़दमे दर्ज थे। पर गल्ला तक पुलिस पहुँच जाए, ऐसा मुमकिन नहीं था। दिल्ली एनसीआर ही नहीं, बल्कि देश में कई राज्यों से उसके पास चोरी के वाहन कटने के लिए आते थे। उसने अपना चोरी का एक साम्राज्य खड़ा कर लिया था और वह भी अखिलेश और मायावती दोनों ही सरकार के रहते हुए।

परन्तु योगी सरकार में हाजी गल्ला पर कार्यवाही हुई। उसके खिलाफ जब सरकार ने सख्त कदम उठाए तो उसके पास आत्मसमर्पण के अतिरिक्त कोई रास्ता नहीं बचा। उसके विरुद्ध गैंग्स्टर एक्ट के अंतर्गत पचास हजार रूपए का इनाम घोषित किया गया था

ऐसा भी नहीं था कि हाजी गल्ला केवल अकेला ही यह काम करता था, उसके बेटे भी उसके साथ चोरी के वाहन काटने का काम करते थे।  पुलिस के लगातार बढ़ते दबाव के बाद उसने बेटों के सहित आत्मसमर्पण कर दिया था। हालांकि उसने पुलिस की कैद से बचने के लिए बेहोशी का नाटक भी किया था, पर चेकअप के बाद उसे जेल भेज दिया गया।

क्योंकि पुलिस के अनुसार उसने बेहोशी का नाटक किया था।

अब तक कई कबाड़ियों पर कार्यवाही  हो चुकी है, जिनमें सोतीगंज से नईम उर्फ हाजी गल्ला और उसके बेटों सहित, जिशान उर्फ पव्वा, फुरकान, अलीम और सदर बाजार से शुऐब, खालिद और वसीम शामिल हैं।

पुलिस अभी हाजी गल्ला के बेटों से पूछकर गोदामों का पता लगा रही है और उनकी निशानदेही पर छापे मार रही है। आज ही पुलिस ने कैंट क्षेत्र के पास एक गोदाम पर छापा मारा तो वहां से चोरी के कई इंजन मिले। पुलिस ने इन्हें अपने कब्जे में ले लिया है और साथ ही हाजी गल्ला की उस कोठी में भी सामानों की सूची बनाई जा रही है, जिसे पुलिस ने जब्त कर लिया था। यह माना जा रहा है कि अभी भी कोठी में करोड़ों का सामान रखा हुआ है।

पुलिस का कहना है कि अभी और गोदामों के बारे में पूछताछ की जा रही है।

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